aadhi aabadi

  • Feb 27 2018 3:42PM

स्वच्छ भारत मिशन का वाहक बनतीं ग्रामीण महिलाएं

स्वच्छ भारत मिशन का वाहक बनतीं ग्रामीण महिलाएं

 गांव : सिमलिया

पंचायत : चिलदाग
प्रखंड : अनगड़ा
जिला : रांची

पंचायतनामा डेस्क

आजीविका मिशन द्वारा संचालित महिला समूहों से जुड़ कर आज गांव की महिलाएं सशक्त होकर आत्मनिर्भर होने लगी हैं. सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को सखी मंडल की महिलाएं अपनी समझ-बूझ के साथ अच्छी तरह आगे बढ़ा रही हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि योजनाओं का लाभ भी सीधे तौर पर उन लाभुकों को मिल रहा है, जो इसके असली हकदार हैं. सखी मंडल की महिलाएं पूरे राज्य में सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम कर रही हैं. सखी मंडल की महिलाएं राज्य के हर गांव में काम कर रही हैं. शौचालय निर्माण में भी सखी मंडल और ग्राम संगठन की महिलाएं बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी निभा रही हैं. स्वच्छ भारत मिशन केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है और इसे पूरा करने में सखी मंडल की महिलाएं वाहक बन रही हैं.

प्रखंड की टीम को मिल रहा सहयोग
आज सखी मंडल की महिलाएं और ग्राम संगठन एकजुट होकर एक संस्थान की तरह कार्य कर रही हैं, लेकिन इसके पीछे जेएसएलपीएस का काफी योगदान है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत हो रहे शौचालय निर्माण में महिलाएं बतौर राजमिस्त्री खुद कार्य कर रही हैं और कहीं-कहीं पर महिलाओं के पति या करीबी निर्माण कार्य कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी अपने गांव में ही रोजगार मिल गया है. सखी मंडल की महिलाएं निर्माण कार्य में खुद ही मसाला तैयार करती हैं और खुद ही कार्य भी करती हैं. महिलाओं को प्रशिक्षण के दौरान बताया गया है कि शौचालय के लिए गड्ढा कितना लंबा व चौड़ा खोदा जायेगा. इस कार्य के लिए आजीविका मिशन की ओर से महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि वो शौचालय निर्माण का कार्य अच्छे तरीके से कर सकें और देखरेख भी कर सकें. इसके साथ ही महिलाओं को जेएसएलपीएस की प्रखंड स्तर की टीम से पूरा सहयोग मिल रहा है.

तेजी से हो रहा निर्माण कार्य
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि साल 2018 में झारखंड को खुले में शौच से मुक्त कर दिया जायेगा. इस दिशा में सरकार प्रयास कर रही है, पर समय रहते राज्य के सभी गांवों में शौचालय निर्माण कराना इतना आसान नहीं था. किसी और विभाग या संस्थान के लिए भी इस लक्ष्य को पूरा करना इतना आसान नहीं था, लेकिन जब से यह कार्य ग्राम संगठन और सखी मंडल की महिलाओं को सौंपा गया है, तब से काम में काफी तेजी आ गयी है. हर रोज गांव में लक्ष्य के मुताबिक निर्माण कार्य हो रहा है. महिलाओं के लिए यह थोड़ा आसान इसलिए भी हो गया है, क्योंकि उन्हें अपने ही गांव में हो रहे निर्माण कार्य को देखना है, तो वो कभी भी जाकर देख लेती हैं या फिर खुद से कार्य करती हैं, जिसके कारण काम तेजी से हो रहा है.

घर और बाहर से मिल रहा सहयोग
अनगड़ा प्रखंड के चिलदाग पंचायत की सिमलिया गांव की गीतांजलि महिला समूह की महिलाएं शौचालय निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं. समूह की महिलाएं बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद तो सबसे पहले उनके अंदर आत्मविश्वास आया और घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने की हिम्मत आयी. इसके बाद जब शौचालय निर्माण कार्य से सखी मंडलों को जोड़ने की बात हुई, तो पहले तो लगा कि शौचालय निर्माण का कार्य वो नहीं कर पायेंगी और मना भी कर दिया था, हालांकि प्रशिक्षण मिलने और जेएसएलपीएस के प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों के भरपूर सहयोग से उनका उत्साह बढ़ा, तब जाकर महिलाएं काम करने के लिए तैयार हुईं और आज बेहतर कार्य कर रही हैं. महिलाओं ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार काम शुरू किया, तो उन्हें ज्यादा कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि सामान कहां से खरीदना है और किस दाम पर खरीदना है, पर अब महिलाएं सक्षम हो गयी हैं. अब घर के साथ-साथ बाहर में भी उन्हें मान-सम्मान मिल रहा है और घरवाले भी महिलाओं को काफी सहयोग कर रहे हैं.

पारदर्शी तरीके से हो रहा है काम
स्वच्छ भारत मिशन के तहत महिलाओं को जोड़ने से एक फायदा यह हुआ है कि कार्य में पारदर्शिता आयी है. बिचौलियापन में अंकुश लगा है और काम भी अच्छा हो रहा है. जिन घरों में शौचालय बन रहा है, उन घरों की कोई न कोई महिला सदस्य महिला समूह से जुड़ी है. इससे काम में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. गांव के असली लाभुकों को इसके जरिये लाभ मिल रहा है. अब शौचालय निर्माण के लिए किसी को घूस देने की जरूरत नहीं पड़ती है. इन शौचालयों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता का काफी ख्याल रखा जा रहा है. केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वर अय्यर ने सिमडेगा का दौरा किया, तो इस दौरान उन्होंने शौचालय निर्माण में सखी मंडल की सदस्यों की देखरेख व गुणवत्तापूर्ण कार्य की प्रशंसा की थी.

सिर्फ निर्माण नहीं, इस्तेमाल पर भी जोर
सखी मंडल की सदस्यों द्वारा शौचालय निर्माण कार्य किये जाने से एक और फायदा यह भी हो रहा है कि महिलाएं न सिर्फ शौचालय का निर्माण करा रही हैं, बल्कि लोगों को उसका इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं. इसलिए सही मायनों में कहा जा सकता है कि खुले में शौचमुक्त होने की दिशा में झारखंड और देश दोनों आगे बढ़ रहा है. शौचालय निर्माण होने के बाद समूह की महिलाएं घरों में जाकर उन्हें खुले में शौच से होनेवाले नुकसान के बारे में बताती हैं. वह ग्रामीणों को शौचालय के इस्तेमाल के फायदे भी बताती हैं, जिसका असर दिख रहा है.

अच्छा काम कर नाम कमाना है : दुलारी देवी
गीतांजलि महिला समूह की अध्यक्ष दुलारी देवी बताती हैं कि पहले इस काम को करने की हिम्मत सखी मंडल की महिलाओं में नहीं थी. जब इस काम को करने की जिम्मेदारी सखी मंडल की महिलाओं को दी गयी, तब महिलाओं ने बैठक कर इस पर काफी चर्चा की. इसके बाद वो काम करने के लिए तैयार हुए. वह बताती हैं कि काम में गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाता है. जो मानक शौचालय निर्माण के लिए तय किये गये हैं, उन मानकों का पूरा ध्यान रखा जाता है. इस काम को करने के बाद अब सखी मंडलों का सामाजिक दायरा भी काफी बढ़ा है और अब इनकी पहचान हर घर में होने लगी है. एक और फायदा यह भी हुआ है कि इससे गांव में ही रोजगार मिल गया है और काम करने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है. इस अभियान से खासकर ग्रामीण महिलाओं को काफी फायदा हो रहा है और महिलाएं इसे लेकर काफी खुश भी हैं.

महिलाओं के सम्मान की होगी रक्षा : सुनीता देवी
गीतांजलि महिला समूह की सदस्य सुनीता देवी बताती हैं कि सखी मंडलों के जरिये शौचालय निर्माण कार्य में तेजी आयी है और समय से निर्माण की राशि भी मिल जा रही है. अब घरों में शौचालय भी बन रहे हैं. सरकार के इस अभियान की सराहना करते हुए सुनीता देवी बताती हैं कि इस अभियान से महिलाओं के सम्मान की रक्षा होगी. पहले महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. खासकर बरसात के दिनों में तो सांप का भी डर रहता था, पर अब महिलाएं सुरक्षित हैं और उनका समय भी काफी बच रहा है. घरवाले भी इस कार्य में उन्हें पूरा सहयोग कर रहे हैं. इससे वह काफी अच्छा महसूस कर रही हैं.