aadhi aabadi

  • Feb 16 2018 1:14PM

धान काटनेवाली सरिता रूरल बीपीओ में कर रही हैं डाटा सर्वे

धान काटनेवाली सरिता रूरल बीपीओ में कर रही हैं डाटा सर्वे

गुरुस्वरूप मिश्रा

सरिता कुमारी. उम्र करीब 24 साल. सादगी में बिल्कुल गांव-गिरांव की ठेठ गृहिणी. पारिवारिक जिम्मेदारी निभाती हैं. अपनी सास के साथ खेतों में धान भी काटती हैं. डिजिटल इंडिया का कमाल कहिए, इनकी सास की दूरदृष्टि या तकनीक के जरिये वक्त के साथ कदमताल करने का इनका जुनून. आज वह रांची जिले के सिल्ली प्रखंड के झारखंड मोड़ पर संचालित देश के पहले रूरल बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) में डाटा सर्वे का काम कर रही हैं. इनके साथ अन्य नौ लड़कियां भी हैं, जो तकनीकी हुनर से अपने गांव में ही बीपीओ में काम कर आत्मनिर्भर बन रही हैं.

सास-पति ने हौसला बढ़ाया, शादी के बाद हुईं ग्रेजुएट

सरिता किसान परिवार से हैं. लिहाजा परिवार के साथ-साथ खेती-बारी में भी सहयोग करती हैं. वर्ष 2014 में इनकी शादी अविनाश कुमार महतो से हुई. उस वक्त वह इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थीं. आज उनका एक बेटा है. शादी के बाद सास केसो देवी और पति ने सरिता का हौसला बढ़ाया और आगे पढ़ाया. सिल्ली कॉलेज से वह वर्ष 2017 में हिन्दी में ग्रेजुएट की पढ़ाई पूरा की.

सीसीसी की पढ़ाई काम आयी : सरिता कुमारी

सरिता कहती हैं कि सास व पति के सहयोग से ग्रेजुएशन करने के दौरान ही तीन महीने का कंप्यूटर का सीसीसी कोर्स (कोर्स ऑन कंप्यूटर कॉन्सेप्ट) किया था. कंप्यूटर की जानकारी के कारण उन्हें रूरल बीपीओ में काम करने का मौका मिला. वह छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों का डाटा सर्वे का काम आसानी से कर ले रही हैं. हुनर से आज परिवार को आर्थिक मदद भी कर रही हैं.
 
बहू नहीं बेटी है सरिता, पढ़ेगी तभी आगे बढ़ेगी : केसो देवी, सास

केसो देवी अनपढ़ हैं, लेकिन वक्त की नजाकत को अच्छी तरह समझती हैं. वह कहती हैं कि हम तो अनपढ़ हैं बाबू, लेकिन बेटी कंप्यूटर जानेगी, तभी न आगे बढ़ेगी. कंप्यूटर का जमाना है, इसलिए उसे कंप्यूटर सिखाया और पढ़ाया. आज नौकरी कर रही है. सरिता बहू नहीं, हमारी बेटी है. कंप्यूटर पर उसे काम करते देख मन खुश हो जाता है.



10 लड़कियां कर रही हैं डाटा सर्वे : बसंत कुमार महतो, संचालक

सिल्ली के रूरल बीपीओ के संचालक बसंत कुमार महतो ने एमसीए (मास्टर ऑफ कंप्यूटर अप्लीकेशन) किया है. वह बताते हैं कि प्रज्ञा केंद्र संचालित कर रहे थे, तभी रूरल बीपीओ का संचालन करने का अवसर मिला. 23 दिसंबर, 2017 को इसकी शुरुआत हुई. अभी 10 लड़कियां डाटा सर्वे का काम कर रही हैं. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी ट्विट कर इस बाबत खुशी जाहिर की है. 
 
लड़कियों को गांव में मिल रहा रोजगार : प्रवीण कुमार, एजुकेशन कंसल्टेंट 

एजुकेशन कंसल्टेंट प्रवीण कुमार ने कहा कि इंडियन बीपीओ प्रमोशन स्कीम के तहत रांची जिले के सिल्ली और ओरमांझी में रूरल बीपीओ संचालित किये जा रहे हैं. गांव की युवतियों को गांव में ही रोजगार दिया जा रहा है. इसके तहत देश के डिजिटल साक्षर लोगों को फोन कर उनसे फीडबैक लिया जाता है और डाटाबेस तैयार किया जा रहा है.