aadhi aabadi

  • Jan 27 2017 7:24AM

ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहीं बैंक सखी विनीता देवी

ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहीं बैंक सखी विनीता देवी
नेहा पांडेय 
केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले से पूरे देश में उथल पुथल का माहौल है.  नोटबंदी के बाद  ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक असर पड़ा है. जैसे वे अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं, पुराने नोट बदली करने से सम्बंधित सही जानकारी लोगों को नहीं मिल रहा है. घरों में रखे पुराने नोट दलालों से बदली करवा ठगी का शिकार हो रहे हैं ग्रामीण. इन सभी मुसीबतों से घिरे ग्रामीण बैंकसखी से अपनी व्यथा बता रहे हैं और बैंक सखी उनको मदद कर रही हैं. ऐसी ही एक बैंक सखी हैं - विनीता देवी.  
 
विनीता पलामू जिला के डालटनगंज प्रखंड में स्थित पोलपोल शाखा में बैंक सखी के तौर पर काम करती हैं. नोटबंदी के बाद विनीता देवी का काम अधिक बढ़ गया है. पहले वह शाम चार बजे तक अपने बैंक में कार्य करती थी, पर  अब उन्हें बैंक में शाम छह बजे तक काम करना पड़ता है. 
 
विनीती देवी अपने गांव के लोगों को ऐसे समय में सहायताकरने में गर्व महसूस करती  हैं. जेएसएलपीएस द्वारा दी गयी ट्रेनिंग को श्रेय देते हुए विनीता कहती हैं “मै ज्यादा पढ़ी- लिखी नहीं थी परन्तु जेएसएलपीएस से ली गयी ट्रेनिंग के बाद मै अपने गाँव वालों को बैंको से संबंधित जानकारियां दे रही हूं. जैसे 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट जमा करने की अंतिम ितथि 30 दिसंबर 2016  है.  इससे ग्रामीणोंकाे बैंक में पैसा जमा करने के िलए बैंकों में मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ रहा है. िजससे ग्रामीण िचंता मुक्त महसूस कर रहे है.
 
विनीता देवी सिया नामक महिला मंडल आजीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं तथा  एमए की शिक्षा पूरी कर रही हैं. बुक कीपर एवं मास्टर बुक कीपर के पद पर कार्य करने के बाद विनीता के बैंक सखी के पद के लिए चयनित किया गया. अब तक बैंक से कुल 175 जमा खाता खुलवा चुकी  हैं. विनीता देवी न सिर्फ महिलाओं को बल्कि उनके काउंटर पर आये पुरुषों का भी पूरी मदद करती हैं. 
 
बैंक सखी के रूप में काम कर विनीता देवी अपनी घर की आर्थिक स्थिति ठीक करने व बच्चों को िशक्षा देने में सहयोग दे रही है. विनीता देवी इस पद को अपनी आजीविका का एकमात्र साधन बताती हैं और कामना करती हैं की आगे भी उन्हें और मौके मिलें जहां वे अपनी आजीविका बढा सकें एवं समाज में एक ऐसा 
 
उदहारण बन सकें जहां एक महिला अपने परिवार को चलाने के लिए किसी पुरुष पर निर्भर न रहे.