aadhi aabadi

  • Jan 27 2017 8:48AM

नव बसंत का नवबिहान

नव बसंत का नवबिहान
अनगड़ा के सूरजमुखी सखी मंडल व मसनिया ग्राम संगठन को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
अनगड़ा के सूरजमुखी सखी मंडल व मसनिया ग्राम संगठन को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
कुमार विकास
 
अनगड़ा प्रखंड के जिद्दू गांव एवं सिरका पंचायत के मसनिया में जश्न का माहौल है. सूरजमुखी आजीविका सखी मंडल एंव मसनिया आजीविका ग्राम संगठन को देश में उत्कृष्ट परफारमेंस करने वाले समूह के पुरस्कार से नवाजा गया है. देश भर के 29 लाख स्वयं सहायता समूह एवं ग्राम संगठन के बीच इन दोनों ने जगह बनायी और पुरस्कार पाया. 
 
ये हौसलों की उड़ान है, कल तक जिन महिलाओं को अपने बूते खड़े होने की ताकत नहीं थी, आज वहीं महिलाएं अपने दम पर देश भर में झारखंड का परचम लहरा रही है. ये हौसला ही तो है, जो 29 लाख स्वयं सहायता समूहों में से सिर्फ 30 समूहों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के लिए चुना गया और उसमें अनगड़ा के सूरजमुखी महिला समूह ने भी अपनी जगह बनायी. दीनदयाल अंत्योदय योजना 
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2012 में इस सखी मंडल के सफर की शुरुआत हुई. इस सखी मंडल में कुल 15 सदस्य हैं और सभी अनुसूचित जनजाति के हैं. 
 
 सूरजमुखी सखी मंडल की पहचान एक अनुशासित सखी मंडल के रूप में है, जो पंच सूत्र का पालन करती है और सभी सदस्य मिलकर संगठन में फैसले लेते हैं. 
 
आजीविका मिशन से मिलने वाले चक्रिय निधि, सामुदायिक निवेश निधि एवं बैंकल लिंकेज के रूप में करीब पौने दो लाख की राशि सखी मंडल को दी गई थी, जिससे सदस्यों ने पहले तो अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा किया, फिर कर्ज चुकाते हुए अपनी आजीविका के साधनों को विकसित करने का प्रयास किया. 
 
समूह के सदस्यों की अपनी बचत राशि आज करीब सवा लाख रुपये से ज्यादा की है. सखी मंडल में जुड़ने से पहले ज्यादातर सदस्यों की स्थिति ठीक नहीं थी. गरीबी की वजह से परिवार को पालना मुश्किल था. ऐसे समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बहनों ने इस गांव में सखी मंडल के जरिये गरीबी के अंधकार को प्रकाशमय करने की कोशिश शुरू की और आज चार साल के बाद गरीबी को मात देते हुए इस समूह की ज्यादातर बहनें अपनी आजीविका को सुदृढ़ कर चुकी है. कोई बकरी पालन कर रही है, कोई सूकर पालन कर रही है, तो कोई किराना दुकान चला रही है. 
 
सूरजमुखी सखी मंडल की 5 सदस्यों ने 23 दिसंबर को दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राम कृपाल यादव के हाथों सम्मान एवं पुरस्कार राशि ग्रहण कर पूरे देश में राज्य का सम्मान बढ़ाया. 
 
आपको बता दें कि सूरजमुखी आजीविका सखी मंडल की बहनें अपने गांव में स्वच्छता को लेकर भी काम कर रही है और बीते दिनों आयोजित योजना बनाओ अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. आज सूरजमुखी महिला समूह अपने गांव में मूलभूत सुविधाओं की पहुंच के लिए लगातार प्रयास कर रही है और सब बहनें मिलकर सामाजिक सरोकार के मुद्दों पर जागरूक भी करती है. 
 
रांची के अनगड़ा के एक छोटे से गांव की महिलाओं की अदम्य इच्छाशक्ति, धारा के विपरीत तैरने का जज्बा और अपने आप को तपाने के हौसले ने इन महिलाओं के राज्य ही नहीं पूरे देश में मशहूर कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर देश में पहली बार दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले समूहों को पुरस्कृत किया गया और उसमें सूरजमुखी आजीविका सखी मंडल की बहनों ने झारखंड का परचम लहराकर हमें गौरवांवित किया है.
 
हौसलों से बदली जिंदगी
 
23 दिसंबर को जब राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह के मंच से मसनिया आजीविका ग्राम संगठन की स्वर्णिमा देवी ने अपनी और अपने ग्राम संगठन के कार्यों को बताने लगी तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सभागार गूंज उठा. जोहार झारखंड और जय हिन्द के नारे के साथ स्वर्णिमा देवी ने अपने भाषण को समाप्त किया. स्वर्णिमा देवी ने मंच पर उपस्थित केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राम कृपाल यादव, ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा एवं संयुक्त सचिव सह आजीविका मिशन के निदेशक अटल डुल्लू को झारखंड आकर अपने ग्राम संगठन द्वारा किये गये कार्यों को देखने के लिए आमंत्रित भी किया. मसनिया आजीविका ग्राम संगठन की सदस्य स्वर्णिमा देवी ने बदलते झारखंड की एक ऐसी छवि मंच से प्रस्तुत की, जिसे लोगों ने महसूस किया. 
 
स्वर्णिमा देवी ने बताया कि कैसे मसनिया आजीविका सखी मंडल स्कूलों में मध्याहन भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखता है ताकि बच्चों को अच्छा खाना मिल सके. साथ ही शिक्षकों पर भी निगरानी रखी जाती है. वृक्ष बचाओ एवं साफ-सफाई अभियान के तहत सामाजिक सरोकारों को भी पुनर्जिवित किया है. 
 
मसनिया आजीविका ग्राम संगठन को देश के दस सबसे अच्छे महिला ग्राम संगठन के रूप में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया. 
 
साल 2014 में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा मसनिया आजीविका ग्राम संगठन की स्थापना हुई थी. इस ग्राम संगठन में करीब 19 आजीविका सखी मंडल शामिल है, जिसमें कुल 234 महिला सदस्य है. महिला सखी मंडलों को प्रशिक्षण देना और हर संभव मदद उपलब्ध कराना, सामुदायिक निवेश निधि उपलब्ध कराना एवं सामाजिक मुद्दों एवं सरोकारों पर सखी मंडलों का उन्मुखीकरण करने में मसनिया आजीविका ग्राम संगठन का अहम योगदान रहा है. 
 
मसनिया आजीविका ग्राम संगठन की पांच दीदियों ने दिल्ली जाकर बेस्ट परफार्मिंग ग्राम संगठन का पुरस्कार ग्रहण किया. पुरस्कार राशि के रूप में दो लाख रुपये, प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह दीदियों को दिया गया. इस संगठन की महिलाओं का यह सफर सचमुच काबिले तारिफ है. अपने-अपने गांवों में कल तक दो जून की रोटी के लिए तरसने वाली इन महिलाओं ने आजीविका सखी मंडल से जुड़कर अपनी परेशानियां दूर की, दूसरों को गरीबी से बाहर निकालने और गांव से सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में एकजुटता का परिचय दे रही है. 
 
आजीविका मिशन व ग्राम संगठन 
 
की बहनों को श्रेय : कमला देवी
 
मसनिया ग्राम संगठन की सचिव कमला देवी की खुशी का ठिकाना नहीं था. कमला बताती हैं कि हमारा ग्राम संगठन अपने गांव के वैसी महिलाओं को भी समूह से जोड़ने का काम कर रही है, जो अब तक समूह से नहीं जुड़ी हैं. साथ ही कहती हैं कि दिल्ली जाकर पुरस्कार लेना एक सपना सच होने जैसा है. आजीविका मिशन व ग्राम संगठन की बहनों को इसका श्रेय देते हुए कमला बताती हैं कि सखी मंडल से जुड़कर हम ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में जो बदलाव आया है, वो अप्रत्याशित है.
 
पुरस्कार से िमला प्रोत्साहन : मोनिका
 
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद मसनिया आजीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष मोनिका देवी ने कहा कि यह पुरस्कार हम सबों के लिए ऊर्जा का स्रोत बनेगा और हम अपने गांवों के विकास के लिए और अच्छा काम करेंगे. यह पुरस्कार सिर्फ मसनिया आजीविका ग्राम संगठन का नहीं है. यह हमारे सभी 19 सखी मंडलों की मेहनत का नतीजा है.
 
एसएचजी सदस्य कहती हैं
 
पुरस्कार मिलना खुशी की बात : झुनु देवी
 
सूरजमुखी आजीविका सखी मंडल की अध्यक्ष झुनु देवी कहती हैं कि हमने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि सखी मंडल हमें दिल्ली तक पहुंचा देगी. हम बहुत खुश हैं कि देशभर के चुने हुए संखी मंडलों में हमें भी पुरस्कार दिया गया. यह हमारे लिए बहुत ही खुशी की बात है और हमारी सखी मंडल अपने अच्छे कार्यों को आगे जारी रखेगी.
 
सखी मंडल से जुड़ना 
 
गर्व की बात : सीमा देवी
 
समूह की सदस्य एवं सक्रिय महिला सीमा देवी ने मंच पर पुरस्कार लेने के बाद बताया कि यह उनके जीवन का सबसे खुशहाल दिन है, जब उनके और सखी मंडल की अन्य दीदियों का मेहनत सफल होता दिख रहा है. हम अपनी जिंदगी को तो नया आयाम दे ही रहे हैं, अब दूसरे लोगों को भी हमारी मेहनत का अंदाजा हो रहा है. आज मुझे गर्व है कि मैं आजीविका मिशन के सखी मंडल से जुड़ी हूं और जिद्दू गांव से दिल्ली तक का सफर तय की.
 
हमारे कंधों पर और बढ़ी जिम्मेदारी : अंजली देवी
 
एसएचजी सदस्य अंजली देवी कहती हैं कि अब हमारे कंधे पर और अधिक जिम्मेदारी बढ़ गयी है. लोगों को हमसे अब और ज्यादा उम्मीदें होगी. इन सालों में हमलोगों ने अपनी आजीविका को मजबूत करते हुए छोटे-छोटे सामाजिक कार्यों पर भी काफी मेहनत की है, लेकिन अभी हमें अपने गांव और समाज के लिए और बहुत कुछ करना है.