aadhi aabadi

  • Apr 21 2017 12:50PM

सशक्त व स्वावलंबी बनाने की पहल करती लखी चांद

सशक्त व स्वावलंबी बनाने की पहल करती लखी चांद
दुमका जिले के मसलिया प्रखंड स्थित दलाही गांव की रहने वाली लखी चांद ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर न सिर्फ अपनी आजीविका को बेहतर बनाया है बल्कि वे अब गांव की महिलाओं को सशक्त व स्वावलंबी बनाने की दिशा में लगातार आगे कदम बढ़ा रही है. पंचायतनामा से बातचीत में लखी ने बताया कि 2016 में ही वह शिवशंकर आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं थी. इस समूह से उनके अलावा गांव की 11 अन्य महिलायें भी जुटी. समूह की मदद से किसी ने बकरी पालन, तो किसी ने अपना छोटा-मोटा कारोबार शुरू किया. लखी बताती हैं कि गांव में उसके पति ब्रजेंद्र चांद की साइकिल मरम्मत की दुकान थी.

उस वक्त दुकान उतनी नहीं चलती थी. समूह से उसने भी कर्ज लिया तथा पति को वह राशि दी. पूंजी आने के बाद पति के दुकान की स्थिति बदलने लगी. उसकी आजीविका भी बेहतर होने लगी. लखी बताती है कि समूह ने उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा किया. उसने बताया कि वह अपने अपने समूह की बुक कीपर थी. अच्छा काम करते देख उसे मास्टर बुक कीपर बनाया गया तथा एमआइएस शीट भरने की भी जिम्मेदारी मिली. जिम्मेदारी को बखूबी निभाते देख उसे जल्द ही और बड़ी जिम्मेवारी मिली ब्लॉक रिर्सोस पर्सन अर्थात बीआरपी के रूप में. उसका काम आज प्रशिक्षण देना तथा समूह की महिलाओं को जागरूक करना है.

लखी ने बताया कि तेजी से स्थिति बदल रही है. महिलाओं ने अब आर्थिक रूप से भी सबल होना और बचत करना प्रारंभ किया है. पति के काम में भी वे सहयोग करने लगी है. आनेवाले दिनों में इसका असर दिखेगा. गांवों में खुशहाली आयेगी. उन्होंने बताया कि आज वह खुद अपने एक बेटे को रांची में पॉलिटेक्निक की पढ़ायी करा रही है, तो दूसरे को प्राइवेट स्कूल में. 
 
आजीविका के 10 सूत्र अपना कर आगे बढ़ें महिलाएं : लखी
लखी चांद ने ग्रामीण महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि  निर्भय व निडर होकर महिलाएं अपनी आजीविका को बेहतर बनाने के लिए आगे आयें. समूह से जुड़ कर आजीविका के 10 सूत्र को अपनायें. सिलाई आती है, तो वही करें. पत्तल प्लेट बना सकती है, तो उसमें कदम बढ़ाये. महिलाएं भी आय सृजन करेंगी, तो परिवार खुशहाल होगा.