aadhi aabadi

  • Apr 21 2017 12:53PM

ग्रामीण महिलाओं की स्थिति सुधारने में जुटीं मधु

ग्रामीण महिलाओं की स्थिति सुधारने में जुटीं मधु
खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर के पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है. इकबाल के इस पंक्ति का आशय बेंगाबाद प्रखंड के गमतरिया की मधु देवी जानती हो या नहीं, पर उसका जीवन इन पंक्तियों का जीता- जागता सबूत है. कल तक घूंघट में रहनेवाली मधू आज स्कूटी वाली कहलाने लगी है. घर की माली हालत को सुधार कर अब वह गांव की महिलाओं को सुधारने में लगी हैं. अब इनका चयन राज्य स्तर से अपराजिता अवार्ड के किया गया है.
 
गांव की अनिवार्यता बन गयी 
जेएसएलपीएस के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ कर उन्होंने खुद को ऐसा बदला कि आज उनके बगैर न तो उनका परिवार चल पाता है और न गांव की महिलाएं उनके बगैर कोई बैठक ही कर पाती हैं. किसी भी निर्णय तक पहुंचने में उनकी सहभागिता जरूरी हो जाती है. परिवार में भी उनकी सहमति के बगैर कोई निर्णय नहीं हो पाता है. उनकी चरचा गमतरिया से लेकर गिरिडीह जेएसएलपीएस कार्यालय तक हो रही है.
 
मैट्रिक से पहले हुई शादी 
अल्प आयु में मधु की शादी हुई. विवाह के वक्त वह मैट्रिक भी नहीं कर पायी थी. शादी के कुछ दिन बाद ही उनकी जेठानी ने विवाद कर उसे अलग कर दिया. पति पर हिस्सेदारी का कर्ज भी लाद दिया गया. उस समय उनके पति के पास आय का कोई स्रोत नहीं था. उन पर कर्ज का बड़ा बोझ आ गया. इसी बीच उनके गांव में आजीविका मिशन से स्वयं सहायता समूह का गठन करने व उन्हें एकजुट करने का कार्य शुरू हुआ.
 
नयी बहू से लेकर बीआरपी तक का सफर 
आर्थिक संकट के बोझ से घबराने की बजाय उनका डट कर मुकाबला करना उचित समझा और उसने समूह से जुड़ कर कार्य करना शुरू किया. नयी बहू के घर से बाहर कदम रखने की चरचा गांव में आम हो गयी. इन सब की परवाह किये बगैर उन्होंने कदम को पीछे नहीं मोड़ा. इस कार्य में पति उमेश और सास का काफी सहयोग रहा. इस सहयोग की बदौलत वह आगे बढ़ती रही. परिणाम यह हुआ कि आज बेंगाबाद प्रखंड की बीआरपी बन चुकी हैं. स्कूटी से घर से निकल कर सभी तरह के सामाजिक कार्य कर रही हैं.
 
प्रशिक्षण बना टर्निंग प्वाइंट
गांव में एसएचजी से जुड़ कर काम शुरू करना मधु के लिए टर्निंग प्वाइंट बना. मधु का चयन उसकी सक्रियता को देख कर गांव की सक्रिय महिला के रूप में हुआ. इसके बाद उन्हें आंध्र प्रदेश में दक्षता निर्माण का 10 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया. वहां से आकर उन्होंने रांची में 10 दिनों का टीओटी का प्रशिक्षण लिया. पुन: रांची में 15 दिनों का इंटर्नल कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (आइसीआरपी) का प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके बाद पुन: रांची में 15 दिनों का बीआरपी का प्रशिक्षण लेकर अब बीआरपी बन चुकी हैं. आज वे ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित कर जागरूक कर रही हैं. अब तक वे बोकारो और गिरिडीह में कई टीमों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं. अब इनका चयन राज्य स्तर से अपराजिता अवार्ड के लिए किया गया है.