aadhi aabadi

  • May 10 2017 12:59PM

दिल्ली के प्रगति मैदान में राष्ट्रीय आजीविका मेले का आयोजन, महिलाओं की सशक्त भागीदारी से गरीबी से मुक्त होगा देश

दिल्ली के प्रगति मैदान में राष्ट्रीय आजीविका मेले का आयोजन, महिलाओं की सशक्त भागीदारी से गरीबी से मुक्त होगा देश
ज्योति रानी
घर की चहारदीवारी और अपने गांव को ही अपना संसार समझनेवाली दीदियों की दुनिया अब बढ़ रही है. कभी अपने राज्य को अपना देश बतानेवाली दीदियां आज भारत की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गयी हैं. मौका था राष्ट्रीय आजीविका मेले का, जहां देश के विभिन्न राज्यों से सखी मंडल से जुड़ी महिलाओं ने शिरकत कीं. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी यानी जेएसएलपीएस द्वारा संचालित सखी मंडल की करीब 100 महिलाओं को दिल्ली ले जाया गया, जिसका उद्देश्य सखी मंडल द्वारा निर्मित उत्पादों को एक राष्ट्रीय बाजार का मंच मुहैया कराना था, ताकि स्वदेशी चीजों की उपयोगिता बढ़े और जिसका सीधा फायदा सखी मंडलों से जुड़ी दीदियों तक पहुंचे.

राष्ट्रीय आजीविका मेले का शुभारंभ 14 अप्रैल, 2017 को दिल्ली के प्रगति मैदान में हुआ. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की सखी मंडल की दीदियों ने मंचासीन अतिथियों के समक्ष स्वागत गीत प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में अमरजीत सिन्हा, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, अटल डुल्लू, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग मौजूद थे. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर से आयी सखी मंडल की दीदियों का स्वागत किया और उनके हौसलों को सलाम करते हुए कहा की महिलाओं की सशक्त भागीदारी द्वारा राष्ट्रीय आजीविका ग्रामीण मिशन जरूर ही अपना उद्देश्य प्राप्त करेगा और भारत गरीबी से मुक्त हो पायेगा.

दस दिवसीय इस मेले में झारखंड की ग्रामीण महिलाओं के लिए यह अनुभव अनूठा रहा. यह मंच सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि सम्मान और पहचान का भी था. इन महिलाओं ने पहली बार इतनी लंबा सफर तय किया और वह भी राजधानी ट्रेन से. बहुतों के लिए यह सपना सच होने जैसा था. झारखंड से दिल्ली तक का सफर तो खत्म हुआ, पर अभी एक लंबा सफर तय करनी अभी बाकी है और वह है, गरीबी को मात देने और समृद्ध जीवन की ओर आगे बढ़ने का.
 
सखी मंडल की दीदियों का दिखा हुनर
उद्घाटन समारोह के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ आजीविका मेले की शुरुआत हुई. मेले में करीब 500 स्टॉल लगे थे, जिसमें 20 स्टाॅल झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी द्वारा संपोषित सखी मंडल की महिलाओं ने लगाया था. सखी मंडल की दीदियों ने अपने स्टॉलों में बाजरा, ब्राउन चावल, मिर्च पाउडर, कुलथी दाल, एनइ का अदरक, केरल का केला चिप्स, ड्रेस, पेंटिंग, साड़ी, जूते, चमड़े के उत्पाद और कई अन्य हस्तशिल्प सामान लगाया और उसे बेचा. भारत के हर कोने से आकर्षक, जेब के अनुकूल, स्वदेशी और अनदेखे वस्तु मेले में मौजूद थे. झारखंड के आदिवासी आभूषण, कश्मीर से शॉल, बिहार से मधुबनी चित्र, उत्तर प्रदेश के शिल्प, उत्तराखंड के अचार, जैविक मसाले, हस्तकला ऊन, गारू शहद और तसर सिल्क वस्त्र भी स्टॉल में उपलब्ध थे.