aadhi aabadi

  • Aug 21 2017 2:19PM

नयी आइएएस ने देखा ग्रामीण महिलाओं में बदलाव

नयी आइएएस ने देखा ग्रामीण महिलाओं में बदलाव
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी यानी जेएसलएलपीएस ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी है. अब केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय में जो भी अधिकारी नियुक्त हो रहे हैं, उन्हें पहले झारखंड भेजा जाता है. 
 
झारखंड आकर ये अधिकारी राज्य की ग्रामीण महिलाओं में हो रहे बदलाव को देखते हैं. छत्तीसगढ़ कैडर की आइएएस अधिकारी नुपूर राशि पन्ना भी झारखंड आयी. यहां पर जेएसएलपीएस के द्वारा किये जा रहे कार्यों को देखा. राजधानी रांची आने के बाद नुपूर राशि पन्ना अनगड़ा, जानुम व गेदलसूद गयीं. वहां जाकर महिलाओं से मुलाकात की. महिला समूहों की हर गतिविधियों को जाना और महिला समूह के सदस्यों से बातचीत भी की. महिला समूह के द्वारा किये जा रहे कार्यों को भी देखा.
 
ग्राम संगठन किस तरह से कार्य करता है, उनको समझने का प्रयास किया. नुपूर कहती हैं कि झारखंड की ग्रामीण महिलाओं में आया बदलाव विकास को परिभाषित कर रहा है. पहले काफी पढ़ा और सुना था, लेकिन विश्वास नहीं होता था. अब अपने आंखों से देखने व ग्रामीण महिलाअों से बात करने और उनकी सफलता को जानने के बाद यह एहसास हो गया कि झारखंड में विकास की बयार बहने लगी है. ग्रामीण महिलाओं में सकारात्मक बदलाव हुआ है. नुपूर कहती हैं कि पहले की अपेक्षा महिलाओं में हर क्षेत्र में बदलाव हुआ है. 
 
महिलाएं सिर्फ आत्मनिर्भर नहीं हुई है, बल्कि कई महत्वपूर्ण चीजों को लेकर जागरूक भी हुई हैं. साफ-सफाई से लेकर रहन-सहन सब चीजों में एक व्यापक बदलाव दिखता है. महिलाएं पहले की अपेक्षा ज्यादा स्वच्छता पर जोर दे रही हैं. खुद साफ- सफाई पर विशेष जोर देती है.
शिक्षा की बात करें, तो महिलाओं में शिक्षा को लेकर जागरूकता आयी है. सभी महिलाएं अब अपने  बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास कर रही है. यह बदलाव एक क्रांति की तरह है, क्योंकि जैसे-जैसे समाज में शिक्षा बढ़ेगी महिलाओं की स्थिति में और भी सुधार आयेगा. 
 
छोटी बचत से महिलाओं में आया सार्थक बदलाव : नुपूर
 
नुपूर राशि पन्ना बोकारो जिले की रहनेवाली और भारतीय प्रशासनिक सेवा 2015 के छत्तीसगढ़ कैडर की आइएएस अधिकारी हैं. वे कहती हैं कि महिला समूहों से जुड़ कर महिलाओं ने बचत करना भी सीख लिया है. छोटी- छोटी बचत महिलाओं के जीवन में सार्थक बदलाव ला रहा है. 
इसी बचत से महिलाएं बड़ी पूंजी जमा कर रही हैं और काम करते हुए घर-परिवार की रोजी-रोटी कमाने में अहम भूमिका निभा रही है. सखी मंडल की दीदियों में आत्मविश्वास बढ़ा है.  प्रशिक्षण मिलने के बाद वो विभिन्न चीजों को लेकर काफी जागरूक भी हुई है.
 
महिलाओं में आत्मनिर्भरता आयी. घर की दहलीज से बाहर कदम रखने का आत्मविश्वास आया. नुपूर कहती हैं कि अगर आप किसी को खाना देते हैं, तो आप एक वक्त के लिए उसका पेट भरते हैं, लेकिन अगर आप किसी को शिक्षा देते हैं, तो उसमें आत्मविश्वास भरते हुए जीवन भर रोटी कमा कर खाने की शक्ति देते हैं. पहले जो महिलाएं घर के  सदस्यों के सामने कुछ  बोलने में झिझकती थी, वो अब बिना झिझक के ग्रामसभा में बोल रही है,  जो साफ संकेत है कि झारखंड की महिलाएं बदल रही हैं.