aadhi aabadi

  • Aug 21 2017 2:21PM

बैंकिंग सखी कॉरस्पोंडेंट यानी बैंक आपके द्वार

बैंकिंग सखी कॉरस्पोंडेंट यानी बैंक आपके द्वार
कुमार विकास
बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट सखी (बीसी सखी) मॉडल के जरिये झारखंड के दूर-दराज समेत तमाम ग्रामीण इलाकों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने का प्रयास अब रंग ला रहा है. झारखंड में इस मॉडल को ग्रामीण विकास विभाग के तहत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है. दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं झारखंड ग्रामीण बैंक के संयुक्त प्रयास से सखी मंडलों से महिलाओं को चुन कर उनको प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हुए बीसी सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है. वर्तमान में करीब 100 बीसी सखियां विभिन्न ग्रामीण इलाकों में काम कर रही है. सखी मंडल की बहनें एक ओर जहां इस पहल से अपनी आय को बढ़ा रही है, वहीं सुदूर गांवों के आखिरी परिवार तक को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने का कार्य भी बखूबी कर रही है.
 
बैंकिग कॉरस्पोंडेंट सखी के रूप में सखी मंडल की महिलाएं गांवों में कम नकदी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. ये महिलाएं पीओएस मशीन के जरिये ग्रामीण परिवारों को गांव में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही है. बीसी सखी के जरिये सखी मंडल एवं अन्य संगठन भी डिजिटल माध्यम एवं डूअल सत्यापन के द्वारा घर बैठे लेन-देन एवं फंड ट्रांसफर कर रही है.
सखी मंडल से संवरती गांवों में बैंकिंग 
 
बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट सखी बैंकिंग की नयी परिभाषा गढ़ रही है. कल तक जिन ग्रामीण गरीब परिवारों ने बैंक देखा तक नहीं था, वो भी अब बैंकिंग सेवाओं से जुड़ रहे हैं. बीसी सखी की जीवंत कार्यशैली के कारण बैंक अब ग्रामीण परिवारों के चौखट तक पहुंच रहा है और लोग कम नकदी अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ रहे हैं. 
 
वर्तमान में यह पहल झारखंड ग्रामीण बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से चल रहा है. झारखंड के हजारों ऐसे गांव जहां से लोग बैंक काफी दूर होने की वजह से नहीं जाते थे, वहां ये बीसी सखी लाखों का ट्रांजेक्शन कर रही है. यही नहीं ‘बैंकिंग आपके घर’ की तर्ज पर ये बीसी सखी गांव में ही लोगों को मनरेगा की मजदूरी, बुजुर्गों को वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, खाता खोलने एवं लेन-देन की सुविधा उपलब्ध कराती है. दर्जनों ऐसी बीसी सखी हैं, जो हर महीने लाखों का ट्रांजेक्शन कर रही है.
 
बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी की संख्या
 
केस स्टडी
 
गुमला के रायडीह प्रखंड के सुरसिंह गांव की बैंक सखी रूक्मणी देवी ने सिर्फ जून माह में करीब 16,64,000 का ट्रांजेक्शन अपने आस-पास के गांवों में किया. खूंटी के सुदूर पिछड़ा प्रखंड रनिया के जयपुर गांव की गायत्री देवी ने  8,29,750 रुपये का ट्रांजेक्शन किया है. 
 
वहीं, राजधानी रांची के अनगड़ा प्रखंड के जोन्हा गांव की बरखा रानी कच्छप ने अकेले जून माह में 1,82,000 रुपये से ज्यादा का लेन-देन किया. सिर्फ लेन-देन ही नहीं, बल्कि बैंक से अब तक नहीं जुड़ सके लोगों के लिए भी बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट सखी वरदान साबित हो रही है. गुमला के घाघरा प्रखंड की अमृता देवी ने 528 ग्रामीण लोगों का खाता खोल चुकी है. छह महीने के छोटे से समय में गांव की इन बैंकवाली दीदीयों ने 10,314 नये लोगों का खाता खोल कर बैंकों से जोड़ा. वहीं, कुल 72.5 लाख से ज्यादा रुपये बैंक खातों में जमा करा चुकी हैं. गांव की असल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छात्रवृत्ति के करीब 3.5 लाख रुपये गांव के युवाओं में वितरित करने का काम इनके माध्यम से किया गया है. 
 
सुदूर गांवों तक पहुंचती बैंकिंग सुविधा
 
झारखंड के एक बड़े भूभाग में पहाड़ों और जंगलों की अधिकता है. यही वजह है कि सुदूर इलाकों में बसे गांव के लोग बैंक तक नहीं पहुंच पाते हैं. इस पहल ने ऐसी तमाम परेशानियों और समस्याओं को सुलझाने की दिशा में एक राह दिखाने का प्रयास किया है. राज्य स्तरीय बैंकर्स कमिटी की बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस वित्तीय वर्ष में 2000 बैंकिग कॉरस्पोंडेेंट सखी की नियुक्ति करने का आदेश दिया है. वहीं, सभी बैंक के अधिकारियों को इस योजना से जुड़ने का निर्देश दिया. साथ ही बीसी सखी द्वारा ग्रामीण परिवारों के घर तक बैंक को पहुंचाने की पहल की सराहना भी की. 
ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव एनएन सिन्हा ने इस पहल के लिए सखी मंडल की बहनों को धन्यवाद भी दिया. उन्होंने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को गांव के नजदीक ले जाना और इसमें सखी मंडल की ही चयनित सदस्यों को बैंक कॉरस्पोंडेंट बना कर इसे आगे बढ़ाते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों को मिले. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के सीइओ परितोष उपाध्याय ने कहा कि दीन दयाल अंत्योदय योजना-एनआलएलएम के तहत गरीब महिलाओं को आजीविका से जोड़ने की कोशिश की जाती है. इसके लिए सखी मंडलों को सस्ता ऋण देने की भी व्यवस्था. लेकिन, बैंक से लोगों की दूरी इस मिशन की रफ्तार को धीमी करती रही है. ऐसे में सरकार को बीसी सखी से काफी उम्मीदें हैं.
 
सखी मंडल से बैंकिंग सखी कॉरस्पोंडेंट का सफर
 
झारखंड के बेड़ो प्रखंड के पतरा टोली गांव की रहनेवाली कनक लता टोप्पो आज बैंकिंग सखी कॉरस्पोंडेंट हैं. कनक लता प्रगति महिला सखी मंडल की सदस्य है. कनक लता का चयन पहले तो सखी मंडल के द्वारा किया गया. 
 
फिर विशेषज्ञों की टीम ने कनक लता के बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट के रूप में चयन पर अपनी मुहर लगा दी. चयन के बाद कनक को बैंकिग सेवाओं से जुड़े कई तरह का प्रशिक्षण दिया गया. कनक लता टोप्पो को बीसी सखी के रूप में प्रशिक्षित कर उनको पीओएस मशीन भी उपलब्ध कराया गया. वर्तमान में कनक झारखंड ग्रामीण बैंक की बीसी सखी के रूप में काम कर रही है और वित्तीय/ बैंकिंग सेवाओं को ग्रामीण लोगों तक पहुंचा रही है. कनक ने कड़ी मेहनत और लगन से हर महीने लाखों का बैंकिंग ट्रांजेक्शन कर रही है. वहीं, जून माह में कनक ने 2,77,350 रुपये का ट्रांजेक्शन किया.
(लेखक झारखंड राज्य आजीविका प्रमोशन सोसाइटी में प्रोग्राम मैनेजर कम्युनिकेशन हैं).