aadhi aabadi

  • Nov 20 2017 12:01PM

महिलाओं को समूह से जोड़ कर स्वावलंबी बना रही सखी मंडल की दीदियां

महिलाओं को समूह से जोड़ कर स्वावलंबी बना रही सखी मंडल की दीदियां
गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड के कुलगो गांव की रहनेवाली गीता देवी महिला समूह से जुड़ कर आज अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकाल रही हैं. गीता आस-पास के गांव की दूसरी महिलाओं को भी महिला समूह से जोड़ते हुए उन्हें जागरूक कर आत्मनिर्भर बना रही हैं. आज भी दूर-दराज के गांवों में ऐसी महिलाएं हैं, जो घर से बाहर निकलने में डरती हैं. महिलाओं के अंदर घर कर गये इसी डर को स्वयं सहायता समूह बनाकर खत्म करने का काम किया जा रहा है.

गीता देवी भी सक्रिय महिला सखी के तौर पर अपना योगदान दे रही हैं. गीता कहती हैं कि समूह से जुड़ कर महिलाओं में आत्मविश्वास का संचार होता है. महिलाओं का जागरूक होना बेहद जरूरी है, लेकिन आज गीता देवी के सामने जो हालात हैं, वो पहले नहीं थे. पहले वो खुद मजदूरी करती थी और पति भी मजदूरी करते थे. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. चार बच्चों का पेट पालना मुश्किल हो रहा था.

परिवार वाले कोई सहयोग नहीं करते थे. भरपेट भोजन भी नसीब नहीं होता था. बच्चों का पेट भरने के लिए दूसरों के घर से खाना मांगना पड़ता था. मजदूरी करने के लिए कोई भी बुलाये, तो चली जाती थी. ऐसे में एक बार बेटे की तबीयत खराब हो गयी. इलाज के लिए पैसे नहीं थे. सबके सामने हाथ फैलाया, लेकिन किसी से मदद नहीं मिली. इसके बाद अपना जेवर बेच कर बेटे का इलाज कराया, लेकिन बेटा ठीक नहीं हुआ. इसके बाद इलाज के लिए महाजन से कर्ज लेना पड़ा. इसी बीच सीसी भैया गीता देवी के घर के पास आकर रुके और गीता देवी को समूह से जुड़ने को कहा. 
 
गीता देवी सक्रिय सदस्य के तौर पर समूह से जुड़ गयीं. गीता कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद सीसी भैया ने कहा कि उन्हें ट्रेनिंग के लिए आंध्र प्रदेश जाना पड़ेगा. गीता देवी ज्यादा पढ़ी- लिखी नहीं थीं, इसलिए आंध्र प्रदेश जाने के नाम से चौंक गयी, क्योंकि घर से बाहर जाकर नये लोगों से बातचीत करने में उन्हें बहुत संकोच होता था. गीता बताती हैं कि उनके अंदर डर समाया हुआ था और वो सोच में पड़ गयी थीं कि सक्रिय महिला का पद वो कैसे संभाल पायेंगी. 
 
सीसी भैया ने गीता दीदी का हौसला बढ़ाया और गीता देवी 15 दिनों की ट्रेनिंग के लिए आंध्र प्रदेश चली गयीं. वहां जाकर गीता देवी ने कई दीदियों की आत्मकथा सुनी और समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं के जीवन में आये बदलाव और उनके संघर्ष के बारे में जाना. उनकी बातों को सुनकर गीता देवी में भी हिम्मत आ गयी. आंध्र प्रदेश में गीता देवी को समूह में होनेवाली बचत, लाभ- हानि और समूह की गतिविधियों की जानकारी विस्तार से दी गयी.

आंध्र प्रदेश से लौटने के बाद गीता महिलाओं को समूह बनाने के लिए प्रेरित करने लगी और अपने गांव के अलावा आस-पास के गांवों में भी समूह बनाने लगी. इसके बाद धीरे-धीरे गीता समूह से लोन लेकर अपनी छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने लगी. लोन लेकर अपने पति के लिए फर्नीचर की दुकान खोली.इसके बाद धीरे-धीरे गीता के परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी. बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ने लगे. महिला समूह गीता देवी के जीवन में वरदान साबित हुआ. गीता बताती हैं कि समूह से उन्हें काफी फायदा मिल रहा है और अब वह अपनी बेटी की शादी करना चाहती है. अपने संघर्ष की कहानी कहते हुए गीता की आंखें भर आती हैं. कभी गरीबी में जीवन गुजारनेवाली गीता आज अपनी मेहनत और लगन से दूसरे महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गयी हैं.