aadhi aabadi

  • Feb 1 2018 1:21PM

समूह ने दी दिशा, घर व समाज को बदल रही हैं महिलाएं

समूह ने दी दिशा, घर व समाज को बदल रही हैं महिलाएं

 महिला समूहों से जुड़ कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं. जो महिलाएं पहले अपने पैरों पर खड़ा होने के बारे में कभी सोच भी नहीं पाती थीं और घर में आर्थिक तंगी का सामना करते हुए ताना सुनती रहती थीं, वो समूह से जुड़ने के बाद घर से बाहर निकल रही हैं और परिवार का आर्थिक सहयोग करते हुए सम्मानपूर्वक जीवन जी रही हैं. जेएसएलपीएस ने ऐसी महिलाओं को आगे बढ़ने का बेहतर रास्ता दिखाया है. समूह से जुड़ कर महिलाएं छोटी पूंजी से काम रही हैं और बड़े मुकाम पा रही हैं. सब्जी बेचने से लेकर सब्जी उत्पादन तक का काम महिलाएं बड़ी आसानी से कर रही हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि समूह से लिये गये लोन को ये महिलाएं समय से वापस भी कर दे रही हैं. जेएसएलपीएस के सहयोग से महिलाएं घर- समाज को बदल रही हैं. सकारात्मक बदलाव की इस दिशा में बेहतर काम कर रही हैं और सफलता हासिल कर रही हैं. 

1. डिजिटल बैंकिंग से जुड़ रहे हैं ग्रामीण

ममता देवी

प्रखंड : मेदिनीनगर

जिला : पलामू

पलामू जिले के मेदिनीनगर प्रखंड की सखी मंडल की सदस्य मनीता देवी माइक्रो एटीएम एजेंट और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं. इतना ही नहीं मनीता गांव-घर के ग्रामीणों को कैशलेस बनाने में अपनी भागीदारी निभा रही हैं. माइक्रो एटीएम और पॉश मशीन के जरिये डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ वह अच्छी कमाई भी कर रही हैं. चियांकी कलस्टर की सुआ पंचायत की मनीता देवी के आर्थिक हालात पहले बेहद खराब थे. आर्थिक हालात में सुधार करने के लिए मनीता देवी साल 2016 में बसंती आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ गयीं और समूह से जुड़ने के कुछ दिन बाद अपने ग्राम संगठन में एमबीके बन गयीं. समूह से जुड़ने के बाद मनीता की जिंदगी धीरे- धीरे पटरी पर आने लगी. इसके बाद मनीता अपने बच्चों को ठीक ढंग से पढ़ाने लगीं. नोटबंदी के दौरान बैंकों में ग्राहकों की लंबी-लंबी कतार थी. पैसों की निकासी के लिए लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. खास कर ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए परेशानी और बढ़ गयी थी, क्योंकि उनका पूरा दिन बैंक में ही बर्बाद हो जा रहा था. ग्रामीणों के सामने पैसे की दिक्कत आ रही थी. इसी बीच मनीता देवी को जेएसएलपीएस द्वारा प्रत्येक प्रखंड में दिये जानेवाले माइक्रो एटीएम की जानकारी मिली. ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए मनीता ने माइक्रो एटीएम के जरिये ग्रामीणों की समस्याओं को दूर करने के लिए सोचा. 12 हजार रुपये देकर माइक्रो एटीएम खरीदा, जो जेएसएलपीएस के माध्यम से बाजार से कम दर में उपलब्ध हो गया. इसके बाद मनीता ने माइक्रो एटीएम चलाने का प्रशिक्षण लिया और प्रशिक्षण मिलने के बाद मनीता ग्रामीण क्षेत्रों में मिनी बैंक के तौर पर कार्य करने लगीं. मनीता ग्रामीण महिलाओं को आधार के जरिये खाता खोलने की जानकारी भी देने लगीं. इस मिनी एटीएम से अधिकतम निकासी दस हजार रुपये की जा सकती है और पैसे जमा भी किये जा सकते हैं. पैसों की निकासी या जमा करने पर उन्हें रसीद भी देती हैं. इतना ही नहीं माइक्रो एटीएम के जरिये मनीता मनी ट्रांसफर भी करने लगीं और अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल भी रिचार्ज करने लगीं. गांव में इस तरह की वित्तीय सेवा चौबीसों घंटे मिलने से ग्रामीणों का उत्साह बढ़ा. वीओ, एसएचजी और सीएलएफ आदि के पैसे जमा करने के लिए महिला समूह की सदस्य माइक्रो एटीएम का सहारा लेने लगीं. इस कार्य के लिए सुआ पंचायत में मनीता की खूब सराहना हुई और उनकी खुद की एक पहचान बन गयी. अब इलाके के लोगों को अपने बैंक से संबधित कार्यों के लिए बैंक का चक्कर नहीं काटना पड़ता है. माइक्रो एटीएम के जरिये अब घर बैठे वृद्धा पेंशन, छात्रवृति, मनरेगा का भुगतान जैसे कार्य वह कर रही हैं. इससे ग्रामीणों को काफी राहत मिल रही है. मनीता कहती हैं कि यह सब सिर्फ जेएसएलपीएस के माध्यम से ही संभव हो पाया है.

2. सब्जी की खेती कर गुना बनीं आत्मनिर्भर

आशा तिग्गा

प्रखंड : मनोहरपुर

जिला : पश्चिमी सिंहभूम

पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोरपुर प्रखंड के बरांगा गांव की रहनेवाली गुना महतो आज अपने परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही हैं. उसके पास खेत बहुत कम है, लेकिन उन्नत तकनीक से खेती कर कम जमीन पर ही अच्छा मुनाफा कमा रही हैं, हालांकि पहले ऐसे हालात नहीं थे. चार साल पहले जब वो समूह से जुड़ी थीं, तो उनकी हालत अच्छी नहीं थी. खेती-बारी की उचित जानकारी नहीं होने के कारण वो अच्छी तरह खेती नहीं कर पाती थीं. जब भी कुछ खेती करती थी, जानकारी के अभाव में बर्बाद हो जाती थी. जिससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता था. समूह से जुड़ने के बाद उन्हें खेती-बारी की सही जानकारी मिलने लगी. आजीविका कृषि मित्र के माध्यम से फसलों में डाले जानेवाले खाद और दवा के बारे में समुचित जानकारी मिली. खेती-बारी की समुचित जानकारी ले कर उन्होंने फिर से खेती करने की सोची. समूह से नौ हजार रुपये लोन लेकर उन्होंने धान की खेती की. उन्नत तकनीक और विशेषज्ञों की राय के आधार पर खेती करने से उन्हें काफी फायदा हुआ. लोन के पैसे भी गुना महतो ने समय से चुका दिये. उनके पास अपनी जमीन काफी कम है, इसलिए समूह से दोबारा 25 हजार रुपये का लोन लिया और लीज पर जमीन लेकर धान की खेती की. इस बार भी उन्हें काफी फायदा हुआ और उन्होंने लोन के पैसे भी चुकता कर दिया. इस उत्पादन से गुना को करीब 80 हजार रुपये का लाभ हुआ. धान की खेती खत्म होने के बाद गुना सब्जी की खेती कर रही हैं. उन्होंने बैंगन, फूलगोभी, शिमला मिर्च और पत्तागोभी की खेती की है. इसमें भी उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है. गुना महतो बताती हैं कि खेती-बारी में अब उनका पूरा परिवार सहयोग करता है. सपरिवार खेत में काम करते हैं. उनकी जिंदगी अब खुशहाल हो गयी है और वो लोन भी सही समय पर चुका रही हैं. गुना महतो कहती हैं कि अब वो समूह से एक लाख रुपये का लोन लेकर केले की खेती शुरू करेंगी.

3. समूह से जुड़ कर आत्मनिर्भर हुआ गोरवारी जोड़ा का परिवार

जानकी गगराई

प्रखंड : हाटगम्हरिया

जिला : पश्चिमी सिंहभूम

पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया प्रखंड के रूइयां गांव के सानगीसाइ टोला की गोरवारी जोड़ा अब खुद को गरीबी से बाहर निकाल चुकी हैं. पति का निधन हो जाने के बाद गोरवारी की स्थिति काफी खराब हो गयी थी. पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गयी थी. परिवार का पेट भरने के लिए गोरवारी जोड़ा दूसरों के खेतों में मजदूरी का काम करती थीं. इसके कारण बच्चों के पठन-पाठन में विशेष ध्यान नहीं दे पा रही थीं. आर्थिक तंगी होने के कारण बड़े बेटे ने मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ दी, वहीं दो बेटे सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं. वो पहले से ही ढिबरी बनाना जानती थीं, लेकिन पूंजी के अभाव में वो ढिबरी बनाने का काम नहीं कर पा रही थीं. साल 2016 में गोरवारी जोड़ा को सीआरपी के सदस्यों द्वारा समूह के बारे में जानकारी मिली. गांव में ही माली समूह का गठन किया गया, जिसमें गोरवारी जोड़ा भी जुड़ गयीं. समूह से जुड़ने के बाद गोरवारी समूह की हर गतिविधियों में सक्रिय रहने लगी. इस बीच गोरवारी ने समूह से छोटा लोन तीन और पांच सौ रुपये का लिया. लोन लेकर गोरवारी ने ढिबरी बनाने का काम शुरू किया. उन्होंने समूह से दोबारा 15 हजार रुपये का लोन लिया और किराने की दुकान खोली. अपनी पूंजी को और बढ़ाने के लिए गोरवारी जोड़ा अभी भी ढिबरी बना कर बेचने के साथ-साथ टीना वेल्डिंग का काम भी कर रही हैं. अपने द्वारा बनायी गयी ढिबरी को बाजार में जाकर बेचती हैं, जिससे दो से तीन हजार रुपये की आमदनी होती है. ढिबरी, टीना वेल्डिंग और किराने की दुकान से गोरवारी की आमदनी बढ़ने लगी और धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा. आमदनी बढ़ने के बाद उन्होंने अपने बेटे के लिए एक मोटरसाइकिल खरीदी. अब गोरवारी जोड़ा सही समय पर समूह का लोन चुका रही हैं. 

4. अपने परिवार को आर्थिक तौर पर सशक्त करतीं मीना

मुनिया देवी

प्रखंड : डुमरी

जिला : गिरिडीह

गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड के दुधपनिया गांव की रहनेवाली मीना देवी खुशी आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर आज अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकाल चुकी हैं. मीना देवी स्थानीय संसाधन समूह में एलआरजी के पद पर कार्यरत हैं. इसके तहत वो सरकारी योजनाओं की जानकारी समूह की महिलाओं समेत अन्य ग्रामीणों को देती हैं. इतना ही नहीं वह ग्रामीणों को राशन कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, जॉब कार्ड व पैन कार्ड बनवाना, कन्यादान योजना, लाडली लक्ष्मी योजना, वृद्धा व विधवा पेंशन जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी मदद करती हैं और कई ग्रामीणों को इसका लाभ भी दिलवा चुकी हैं. समूह से जुड़ने व उससे लाभ के बारे में मीना देवी कहती हैं कि समूह से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को दिलाने से उनकी खुद की अलग पहचान बन गयी है. जो लोग पहले उन्हें नहीं जानते थे, वो अब उनके नाम से जानने लगे हैं. लोग उनके कार्यों से खुश भी हैं. वह कहती हैं कि लोगों की मदद करने में उन्हें काफी खुशी मिलती है. इस काम को करते हुए मीना महीने में तीन से चार हजार रुपये कमा लेती हैं. अब तो परिवार के लोग भी उनके इस कार्य में सहयोग करते हैं. पहले मीना की स्थिति अच्छी नहीं थी, पर समूह से जुड़ने और घर से बाहर कदम रखने के बाद सभी उनकी तारीफ करने लगे. मीना कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास जगा और अब वह अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही हैं. पहले मीना देवी समूह से छोटा लोन लेकर घर खर्च में उसका उपयोग करती थीं. अब मीना ने बड़ा लोन लेकर खेती-बारी शुरू की है. इससे उन्हें लाभ भी हुआ है. बाजार में अनाज और सब्जियों के अच्छे दाम मिल रहे हैं और वो अपना लोन समय से चुका रही हैं. परिवार की कमाई में मीना देवी की आमदनी जुड़ने के बाद अब घर की आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार हुआ है. उनके जीवन में आये इस बदलाव के बाद अब समूह की अन्य महिलाएं भी खुद को बदलने की कोशिश में जुट गयी हैं और मीना देवी की तरह ही आत्मनिर्भर बनना चाह रही हैं.


5. उन्नत तकनीक से खेती करने के बताये गये गुर

नेहा कुमारी

प्रखंड : बरवाडीह

जिला : लातेहार

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के छिपादोहर कलस्टर के पंचायत भवन में (प्रोड्यूसर्स ग्रुप) किसान उत्पादन संघ की बैठक हुई. इसमें रांची से ‌वाइपीएसएमएमयू लाइवलीहुड से स्नेहा और दिल्ली से उज्ज्वल कुमार व विक्की कुमार उपस्थित थे. इस दौरान बरवाडीह प्रखंड के सभी एकेएम के साथ बैठक की गयी. इसमें विजिट ऑफ टेक्नो सर्व टू वैल्यू चेन के बारे में बताया गया. इसके तहत कृषि में मुनाफा के तरीके बताये गये. बीज की खरीदारी से लेकर उसकी उपज, बड़े बाजार और अच्छे दामों में कैसे बेचा जाये, जिसका ज्यादा से ज्यादा लाभ किसानों को मिले, इसके बारे में भी जानकारी दी गयी. उन्हें बताया गया कि किस तरह से हर जगह किसानों को अच्छा बाजार मिल सके. जेएसएलपीएस, एसएमएमयू, एनएमएमयू द्वारा सखी मंडल की महिलाओं को लाभ पहुंचाने को लेकर चर्चा की गयी. सभी एकेएम को गांव में मौसम अनुरूप फसल लगाने की जानकारी दी गयी. उन्हें बताया गया कि अगर कोई फसल किसान लगाते हैं, तो कितनी जमीन पर लगाते हैं, उससे उत्पादन कितना होगा, कितनी फसल बेचेंगे और बाजार भाव क्या मिलेगा. इसकी जानकारी सखी मंडल की महिलाओं से ली गयी. किसानों ने बताया कि जेएसएलपीएस से जुड़ कर उनके बताये गये तकनीक से खेती कर उन्हें काफी लाभ हो रहा है. उन्हें समय-समय पर फसलों में लगने वाले कीटों के उपचार के बारे में भी बताया जाता है, ताकि नुकसान कम हो सके. इस बैठक में बरवाडीह प्रखंड के बीपीएम, एफटीसी, सीसी समेत काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

6. समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता का मिला प्रशिक्षण

शबनम खातून

प्रखंड : बरवाडीह

जिला : लातेहार

लातेहार जिले के अमवाटीकर गांव में समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता के तहत प्रेरकों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया. यह प्रशिक्षण शिविर संदीप डुंगडुंग के निर्देश पर आयोजित किया गया. इस दौरान समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता प्रेरकों को अपने-अपने गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने एवं लोगों को शौचालय के इस्तेमाल के लिए जागरूक करने के लिए कहा गया. इस अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन के तहत बिहार के बोधगया से आये जनार्दन ठाकुर और विकास कुमार ने बताया कि खुले में शौच से मुक्त करना और लोगों की सोच में बदलाव करना ही इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है. प्रशिक्षण के दौरान पांच टीम बनायी गयी और पांचों टीम को अलग-अलग इलाकों में ले जाया गया. स्वच्छता अभियान को लेकर कलस्टर में दो दिन सुबह में स्वच्छता रैली निकाली गयी. इस दौरान खुले में शौच करने जा रहे लोगों को एसबीबीएम की टीम ने समझाया और उन्हें खुले में शौच से होनेवाली बीमारियों की जानकारी दी. उन्हें बताया गया कि खुले में शौच करते हुए पकड़े जाने पर सौ-सौ रुपये का आर्थिक दंड भी लिया जायेगा. प्रशिक्षण के बाद सभी समुदाय संचालित सम्पूर्ण स्वच्छता प्रेरकों को प्रमाण पत्र दिया गया. मौके पर लातेहार के बीपीएम हरेंद्र कुमार, राजकुमार, रहफत जहां समेत कई लोग मौजूद थे.


7. घर का खर्च और पति का इलाज करा रही हैं जांबी

सुखमति गगराई

प्रखंड : हाटगम्हरिया

जिला : पश्चिमी सिंहभूम

पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया प्रखंड के कासाकोला गांव की जांबी लोहार सब्जी बेच कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि अपने पैरों पर खड़े होकर वह कभी घर को संभाल सकेंगी, लेकिन महिला समूह से उन्हें यह ताकत मिली. पहले पति की कमायी से घर का खर्चा चलता था, लेकिन अचानक जांबी के पति गंभीर रूप से बीमार पड़ गये. बीमारी का इलाज कराते-कराते घर की माली हालत काफी खराब हो गयी. जांबी के पास आय का कोई साधन नहीं था. इसी बीच उन्हें स्वयं सहायता समूह की जानकारी मिली. वह समूह से जुड़ गयीं. कुछ दिनों बाद जांबी ने अपने पति के इलाज के लिए पांच हजार रुपये का लोन लेकर पति का इलाज कराया. पति की हालत में थोड़ा सुधार होने के बाद जांबी ने पैसे जमा कर सब्जी का व्यवसाय शुरू किया और अब उनकी सब्जी की दुकान अच्छी चल रही है. अब वो इस दुकान को और आगे बढ़ाना चाहती हैं. धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी हो रही है और वह पति का इलाज भी करा पा रही हैं. काम करने में आसानी हो, इसके लिए जांबी ने एक मोपेड खरीदी है. वह समूह का लोन आसानी से समय पर चुका रही हैं.