aadhi aabadi

  • Oct 19 2016 1:10PM

बैंक और समूह की दूरी पाटती बैंक सखी

बैंक और समूह की दूरी पाटती बैंक सखी
ज्योति रानी 
यंग प्रोफेशनल, मीडिया एवं कम्युनिकेशन, जेएसलपीएस
 
आर्थिक रूप से मजबूत होने के लिए हमें आर्थिक मुद्दों की जानकारी होना अति आवश्यक है. इसी सिद्धांत पर काम करते हुए झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी ( जेएसएलपीएस) ने बैंक सखी का एक कैडर तैयार किया है. 
 
ऐसी महिलाएं जो कम से कम कक्षा आठवीं तक पढ़ी हो और समूह में अच्छे काम का प्रदर्शन कर रही हो, उनका चुनाव बैंक सखी के लिए किया जा रहा है. इन सभी महिलाओं को जेएसएलपीएस द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है, जिसमें उन्हें बैंक के कार्यों को करना सीखाया जाता है. बैंक सखी, बैंक और स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के बीच व्यापार पुल का काम करती है, जिसमे वे क्रेडिट लिंकेज, क्रेडिट परामर्श, वित्तीय साक्षरता और अन्य बैंक संबधी कार्यों में मदद करती हैं. गरीबी उन्मूलन मजबूत वित्तीय संस्थानों की मौजूदगी के बिना संभव नहीं है और बैंक सबसे आसान स्थल है, जहां लोग आसानी से पहुंच सकते हैं. 
 
हालांकि, बैंकों में ऐसे लोगों की कमी है जिन्हें स्वयं सहायता समूह की अच्छी समझ हो. इसी जरूरत को पूरा करने के लिए जेएसएलपीएस ने बैंक सखी का एक कैडर तैयार किया है, जिसकी मदद से बैंक व समूह की दीदियों, दोनों की ही परेशानी हल हो गयी है. 
 
जीवंति के जीवन में समूह एक नयी आशा लेकर आयी : रांची जिले में नामकुम प्रखंड के किसकी गांव की रहने वाली है 28 साल की जीवंति कच्छप, आज बैंक सखी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी है. 
 
अपना संघर्ष और अनुभव साझा करते हुए जीवंति उन दिनों की बात बताती है, जब वह अपने पति के साथ एक संयुक्त परिवार में रहती थी और घर में सिर्फ एक ही काम करने वाला था, जिसके कारण आय बहुत कम थी और परिवार की माली हालत बहुत ही खराब थी. खाने की भी बहुत समस्या थी. साल 2011, जीवंति के जीवन में एक नयी आशा लेकर आया, जब उसे स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला. समूह के महत्व और फायदे को समझते हुए जीवंति ने जेएसएलपीएस द्वारा संचालित गेंदा फूल महिला स्वयं सहायता समूह का सदस्य बनने का निर्णय लिया और समूह से जुड़ गयी. 
 
समूह से जुड़ने के बाद उसने समूह चलाने का प्रशिक्षण लिया. जीवंति 12वीं तक पढ़ी थी, इस कारण उसे सर्वसमिति से समूह का अध्यक्ष बना दिया गया. समूह से जुड़ने के बाद जीवंति ने अपने छोटे-छोटे जरूरतों के लिए ऋण लेना शुरू किया. सबसे पहले उसने अपनी ननद की शादी के लिए पांच हजार रुपये का ऋण लिया. उसके बाद उसने खेती करने के लिए 18 हजार रुपये का ऋण लिया. धीरे-धीरे समय के साथ उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और जीवंति ने अपना ऋण भी समूह को वापस किया. जीवंति के हुनर और अच्छे कार्य को देखते हुए उसका चयन बैंक सखी के लिए हुआ. 
इसके तहत उसे दो बार बैंक सखी का प्रशिक्षण दिया गया और एक जुलाई 2015 को जीवंति ने बैंक सखी के रूप में कैनरा बैंक, टाटीसिल्वे, नामकुम, रांची में काम करना शुरू किया. बैंक में कार्य करते हुए जीवंति 75 रुपये प्रतिदिन कमा रही है. जीवंति के बैंक में काम करने से ना केवल उसका जीवन बदला बल्कि बैंक के कार्यकर्ता और समूह की अन्य दीदियों को भी बहुत फायदा मिला.
 
इस संबंध में स्वयं सहायता समूह की एक अन्य सदस्य पूनम देवी कहती है कि जीवंति दीदी के बैंक में रहने से हमें बैंक जाने में अब कोई हिचकिचाहट नहीं होती और बैंक जाकर हम अपना काम आत्मविश्वास के साथ कर पाते हैं. वहीं कैनरा बैंक में कैशियर पद पर कार्यरत सरोज धान कहती हैं कि, जीवंति के रहने से हम स्वयं सहायता समूह के कामों को अच्छी तरह से समझ पाने में सफल हुए हैं. 
 
... और आगे बढ़ने की है चाहत
 
जीवंति कच्छप, खुद को बैंक सखी की पहचान से काफी खुश है. कहती है, कभी सोचा भी नहीं था कि बैंक में बैठेने और काम करने का मौका मिलेगा. मेरे पति भी मेरी उपलब्धि से बहुत खुश हैं और चाहते हैं कि मैं और आगे बढूं. अब मेरा सपना अपना घर बनाने का है और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर बैंक अधिकारी बनाना है.