aadhi aabadi

  • Sep 18 2018 1:20PM

बदलते गांव की उम्मीद बनतीं सखी मंडल की दीदियां

बदलते गांव की उम्मीद बनतीं सखी मंडल की दीदियां

कुमार विकास

 

झारखंड बदल रहा है. बदलाव की इस बयार की धूरी हैं गांव, जहां से सखी मंडल की दीदियां झारखंड के विकास की परिकल्पना को साकार कर रही हैं. राज्य में ग्राम विकास का सपना महिला सशक्तीकरण के बगैर अधूरा है. रघुवर सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर महिला सशक्तीकरण है. आधी आबादी का ध्यान रखते हुए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं. बात बेटियों को बचाने की हो या बेटियों की शादी एवं पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए सुकन्या समृद्धि योजना की हो या तेजस्विनी और डीडीयू-जीकेवाई के तहत ग्रामीण युवक- युवतियों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने की हो. सरकार ने हर मोर्चे पर महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य किये हैं, ताकि महिलाओं की हालत सुधरे और उन्हें बराबरी का दर्जा मिल सके.

ग्रामीण महिलाओं को समृद्ध बनाने की कोशिश
दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण महिलाओं को सखी मंडल से जोड़कर उन्हें समृद्ध परिवार बनाने की कोशिश की जा रही है. मिशन की गतिविधियां अधिक प्रभावी हों, इसके लिए राज्य कोष से अलग से राशि भी उपलब्ध करायी गयी है. अब तक करीब डेढ़ लाख सखी मंडल का गठन हो चुका है. इसके तहत करीब 19 लाख से अधिक परिवार सखी मंडल से जुड़े हैं. मजबूत एवं प्रभावी सखी मंडल एवं ग्राम संगठन के गठन के पीछे सरकार की दूरगामी सोच है. आज राज्य में कई योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य महिला ग्राम संगठन व सखी मंडल के द्वारा किया जा रहा है. महिला ग्राम संगठन के क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में काम करने से बिचौलिया और कमीशनखोरी पर सरकार ने लगाम लगाया है.

मिशन मोड पर काम करता जेएसएलपीएस
सखी मंडल से जुड़ कर ग्रामीण महिलाएं जहां गांव के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नयी ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं, वहीं सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित कर रही है. राज्य सरकार ने गरीबी को जड़ से उखाड़ने के लिए महिला सशक्तीकरण पर बल दिया है. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी सरकार के महत्वाकांक्षी गरीबी उन्मूलन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है.

ग्रामीण महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन
उज्ज्वला योजना के तहत राज्य की गरीब महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन दिया जा रहा है. राज्य सरकार ने दिसंबर 2018 तक 35 लाख महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया है. अब तक 23 लाख 50 हजार महिलाओं को गैस कनेक्शन मिल चुका है. इससे सखी मंडल की लाखों बहनों को लाभ मिला है. अब वो सम्मान के साथ गैस चूल्हे पर खाना बना रही हैं.

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बहनें बनीं स्वच्छता दूत
सखी मंडल की दीदियां स्वच्छता के नारे को हर गांव का मूलमंत्र बना रही हैं. कौशल प्रशिक्षण के जरिए मेसन का प्रशिक्षण लेकर शौचालय निर्माण कार्य में महिला ग्राम संगठन की बहनें जुड़ रही हैं. इसके साथ ही अन्य ग्रामीण महिलाओं को शौचालय का उपयोग करने के लिए जागरूक भी कर रही हैं. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रमंडल स्तर पर महासम्मेलन आयोजित कर ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छता के लिए आगे आने की बात कही थी.

उद्यमी सखी मंडल से उभरता झारखंड
ग्रामीण महिलाएं अपने गांव की जरूरत के मुताबिक छोटे-छोटे उद्यमों को अपनाकर मुख्यमंत्री रघुवर दास के उद्यमी सखी मंडल की परिकल्पना को धरातल पर उतार रही हैं. आज गांवों में हजारों महिलाएं छोटे-छोटे स्वरोजगार से अपनी कमाई को सुनिश्चित कर रही हैं. ये दीदियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आयाम दे रही हैं. सखी मंडल एवं बैंक से कर्ज लेकर राशन दुकान, श्रृंगार दुकान, ढाबा, नाश्ता एवं चाय, जूता, टेंट हाउस एवं सब्जी दुकान चला रही हैं. पूरे राज्य में ऐसी लाखों महिलाएं होंगी, जो सम्मानजनक उद्यम की शुरुआत कर अपने परिवार समेत अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं. अब महिलाएं टेंट हाउस के व्यवसाय में भी हाथ आजमा रही हैं. पाकुड़ के अमरापाड़ा प्रखंड के सीता आजीविका समूह की महिलाएं टेंट हाउस चला रही हैं. टेंट हाउस की मालकिन व सखी मंडल सदस्य सोनी देवी बताती हैं कि आजीविका के कारण ही आज वो इस मुकाम पर पहुंची हैं.

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सुदूर गांवों तक पहुंचती बैंकिंग सेवा
बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी (बीसी सखी) मॉडल के जरिये झारखंड के दूर-दराज समेत अन्य ग्रामीण इलाकों को डिजिटल बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने का प्रयास अब रंग ला रहा है. इस मॉडल को ग्रामीण विकास विभाग के तहत जेएसएलपीएस द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है. दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं झारखंड ग्रामीण बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक एवं बैंक ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयास से सखी मंडलों से महिलाओं को चुन कर बीसी सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है. वर्तमान में करीब 300 बीसी सखियां विभिन्न ग्रामीण इलाकों में काम कर रही हैं. बीसी सखी गांवों में कम नकदी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ वित्तीय समावेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. साथ ही पॉश मशीन और माइक्रो एटीएम के जरिए घर बैठे बैंकिंग सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं. इसी का परिणाम है कि बीते सालों में हर महीने बीसी सखियों के जरिये करीब 15 करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन वैसे गांवों में हुआ है, जहां तक बैंक की कभी पहुंच नहीं थी. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सारे बैंकों को इस पहल से जुड़ने के निर्देश दिये हैं, ताकि अधिक से अधिक सुदूर इलाकों को बैंकिग सुविधाओं से जोड़ा जा सके. यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल एवं कैशलेस गांव के सपने को साकार कर रहा है.

महिला सशक्तीकरण की अनूठी पहल
राज्य सरकार महिला सशक्तीकरण की दिशा में लगातार कदम आगे बढ़ा रही है. महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए राज्य की महिलाओं को काफी राहत दी गयी है. इसके तहत महिलाओं को 50 लाख रुपये तक की जमीन या संपत्ति की खरीदारी करने पर उन्हें मात्र एक रुपये के टोकन रजिस्ट्री फीस देनी होगी. यह नियम सिर्फ जमीन या प्रोपर्टी पर लागू है. एक से अधिक खरीदने पर साधारण राशि का भुगतान करना पड़ेगा. दूसरी ओर सरकार राज्य के 17 जिलों में तेजस्विनी योजना के जरिये महिलाओं को सीधे कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार से जोड़ने का कार्य कर रही है.

जोहार परियोजना से बढ़ेगी आय
राज्य के 68 प्रखंडों में जोहार परियोजना के जरिये ग्रामीण महिलाओं को उन्नत खेती, मछली पालन, पशुपालन एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है. इसमें प्राथमिकता के तौर पर सखी मंडल की ग्रामीण महिलाओं को जोड़ा जा रहा है. इसके तहत उत्पादन के लिए अच्छी सिंचाई व्यवस्था समेत बाजार से भी लिंकेज किया जा रहा है. उत्पादक समूह में काम करके महिलाएं अपनी ताकत दोगुनी कर रही हैं. सरकार ने महिला सशक्तीकरण को लेकर इस कार्यक्रम की शुरुआत की है, ताकि गांव समृद्ध हो सके.
रघुवर सरकार ने महिला सशक्तीकरण पर विशेष जोर दिया है. सरकार एक तरफ जहां सखी मंडल की महिलाओं के जरिए गांव के विकास की कवायद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बेटियों, महिलाओं एवं बच्चियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार को लेकर विशेष पहल कर रही है. राज्य सरकार का मानना है कि महिलाएं परिवार का आधार हैं और इन्हें मजबूत करने पर ही झारखंड तरक्की की राह पर तेजी से दौड़ सकता है.