aadhi aabadi

  • Oct 17 2018 3:35PM

स्वच्छता में महिलाओं का योगदान

स्वच्छता में महिलाओं का योगदान

पंचायतनामा डेस्क
पंचायत: टुंडाहुली
प्रखंड: ओरमांझी
जिला: रांची 

रांची जिला अंतर्गत ओरमांझी प्रखंड की टुंडाहुली पंचायत का आरा-केरम गांव आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है. ग्रामवासियों की मेहनत से यह गांव आदर्श ग्राम बन चुका है. स्वच्छता के मामले में भी यह गांव आदर्श है. गांव में प्रवेश करते ही ' मुस्कुराइए, आप नशामुक्त गांव में हैं ' बोर्ड आपका स्वागत करता है. साफ-सुथरी सड़कें, सड़क के किनारे और मोहल्लों में बांस से निर्मित कूड़ेदान बने हुए हैं. सभी ग्रामीण शौचालय का इस्तेमाल करते हैं. हर घर का आंगन साफ-सुंदर दिखता है. इसे स्वच्छ और सुंदर बनाने में महिलाओं का अहम योगदान है.

दो साल पहले हुई शुरुआत
आरा-केरम में गांव को स्वच्छ बनाने की शुरुआत दो साल पहले हुई थी. गांव में सखी मंडल की महिलाओं ने इसकी शुरुआत की थी. पहले सखी मंडल की महिलाएं गांव की सड़कों पर झाड़ू लगाती थीं, कई लोग उनका मजाक भी उड़ाते थे, लेकिन इन ग्रामीण महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी और अपना काम बखूबी करती रहीं. जब गांव स्वच्छ हुआ, तो जो लोग उनका मजाक उड़ाते थे, वो भी स्वच्छता अभियान में महिलाओं को सहयोग करने लगे. अब स्वच्छता ग्रामीणों की आदत बन गयी है. इस काम में बच्चे भी काफी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं. इसका नजारा देखना हो, तो सुबह पांच बजे आरा-केरम गांव आइये. यहां आते ही आपको बच्चों के हाथों में झाड़ू दिखेगा, जो आस-पास पसरी गंदगी को साफ करते दिखेंगे.

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मलेरिया और डायरिया से मुक्त हुआ गांव
दो साल पहले तक गांव में बारिश के मौसम में हर घर से डायरिया और मलेरिया की शिकायत आती थी, पर अब ऐसा नहीं है. बच्चे अपने नाखून साफ रखते हैं. उन्हें खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जाता है. छोटे बच्चे घर में एक जगह बैठ कर खाना खाते हैं. गांव में बीमारी कम होने से ग्रामीणों की बचत भी हो रही है.

पूरे गांव में है 16 डस्टबीन
आरा-केरम के ग्रामीण पहले प्लास्टिक को खुले में इधर-उधर फेंक देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है. ग्रामीण महिलाओं के द्वारा बांस से डस्टबीन बनाये गये हैं. इन डस्टबीनों को गांव के 16 अलग- अलग जगहों पर रखा गया है, ताकि लोग कचरे को खुले में न फेंक कर इन डस्टबीनों में डालें.

स्वच्छता हमारी आदत बन गयी है : रीना देवी
रीना देवी बताती हैं कि स्वच्छता को लेकर गांव में काफी बदलाव आया है. घर से लेकर बाहर तक साफ-सफाई करने में महिलाओं का बहुत योगदान है. समूह की महिलाएं साफ-सफाई को लेकर सजग रहती हैं. गांव में लोटाबंदी का भी काफी फायदा हुआ है. आज गांव स्वच्छ और सुंदर बन गया है.