aadhi aabadi

  • Dec 31 2018 4:34PM

महिलाएं इतनी सशक्त पहले कभी नहीं थीं

महिलाएं इतनी सशक्त पहले कभी नहीं थीं

रघुवर दास, मुख्यमंत्री झारखंड

पिछले कुछ दिनों से राज्य के संताल परगना इलाके में लगातार हमारा जन चौपाल कार्यक्रम चल रहा है. इसके पीछे हमारी सोच है कि आम जनता शासन में अपनी भागीदारी निभाए और सरकार उन्हें उनकी आशाओं के अनुरूप सुविधाएं दे सके. जन चौपाल में लोगों की भादीगारी और विचार विनिमय का जज्बा देख कर मुझे बेहद खुशी होती है. इन्हीं जन चौपालों में मैंने एक चीज गौर की कि आम ग्रामीण महिलाएं भी अब मुखर होकर अपनी बात रख रही हैं. वे अपने इलाके की समस्याओं को खुल कर सामने रखती हैं और अपनी परेशानियां सहजता से बताती हैं. पहले ऐसा कम देखा जाता था. जनता और शासन के बीच दूरी को पाटने का प्रयास किया जा रहा है. केवल विकास नहीं, बल्कि तेजी से विकास का भरोसा इस सरकार के प्रति लोगों में बढ़ा है. किसान, गरीब, युवा और महिलाओं के विकास के प्रति समर्पित है यह सरकार. घर-परिवार की धुरी है महिला. अब समाज और राज्य के विकास की धुरी भी महिलाएं ही होंगी. देश और राज्य तभी आगे बढ़ेगा जब महिलाएं आगे बढ़ेंगी

आमतौर पर महिलाओं को चूल्हा-चौके से बांध कर रखा जाता है, लेकिन मेरी सोच है कि सशक्त महिलाएं ही राष्ट्र निर्माण की नींव रखती हैं. इसलिए जब उनकी मुखरता देखता हूं, तो आत्मिक संतोष होता है. अच्छा लगता है कि पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलनेवाली हमारी राज्य की महिलाओं का आत्मविश्वास लौट रहा है. वे राज्य को एक नयी दिशा देने के लिए तत्पर हैं.

मेरी सरकार आयी, तो महिला सशक्तीकरण के लिए कई श्रृंखलाओं में हमने योजनाओं की शुरुआत की. महिलाओं के नाम पर एक रुपये में जमीन रजिस्ट्री एक ऐसा ही कदम था. झारखंड में महिलाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए यह एक अनूठी पहल है. आधी आबादी को प्रोत्साहित किये बिना कोई समाज मजबूत नहीं हो सकता. इसी परिप्रेक्ष्य में सरकार ने महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने और उनके हकों में बढ़ोतरी के लिए अचल संपत्ति पर स्टांप ड्यूटी व निबंधन शुल्क लगभग खत्म कर दिया है. अब इसके लिए मात्र एक रुपया चार्ज लगता है. इस प्रकार महिलाओं के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री एक रुपये में करनेवाला झारखंड देश का पहला राज्य बन चुका है.

इसी कड़ी में एक महती योजना का जिक्र जरूरी है. यह है तेजस्विनी योजना. यह आधी आबादी के लिए तरक्की की राह खोलती है. जीवन में आयी कुछ चुनौतियों के कारण किशोरियों-युवतियों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं बन पाता है. ऐसे में पढ़ाई, रोजगार संबंधी समस्याओं का सामना उन्हें करना पड़ता है. पर, यह मसला सिर्फ उनका नहीं है. समाज कल्याण विभाग ने इन चुनौतियों का सामना करने को तेजस्विनी योजना 2017-18 से आरंभ की है. योजना के जरिये 14 से 24 वर्ष की वैसी किशोरियां-युवतियां जो अपने आगे की पढ़ाई और रोजगार के जरिये आत्मनिर्भर होना चाहती हैं, उनकी मदद की जानी है. योजना के जरिये जीवन कौशल संबंधी शिक्षा सहित माध्यमिक स्तर की शिक्षा पूर्ण कराये जाने की योजना है. जीवन कौशल का तात्पर्य अपनी सुरक्षा, विषम परिस्थितियों का सामना, स्वास्थ्य व पोषण तथा वित्तीय प्रबंधन सहित सरकारी योजनाओं की जानकारी से है. बाजार की जरूरतों के अनुरूप उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जाना है.

महिला सशक्तीकरण के लिए जहां तक योजनाओं की बात है, तो उज्ज्वला योजना का जिक्र भी जरूरी है. घरों में लकड़ी जला कर चूल्हा जलाना किसी के लिए भी एक कष्टकारी काम है. खासकर महिलाओं को इसके कारण स्वास्थ्य और अन्य स्तरों पर बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ता रहा है. ऐसे घरों में जिनके यहां एलपीजी कनेक्शन न हो, उनके लिए केंद्र सरकार ने नि:शुल्क गैस कनेक्शन देने की योजना बनायी है. उज्ज्वला योजना की सफलता के लिए झारखंड में भी प्रभावी कदम उठाये गये हैं. 28 लाख महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन देने का लक्ष्य सरकार ने निर्धारित किया है. इसके अलावा कई ऐसी योजनाएं आरंभ हुई हैं, जिनके माध्यम से गरीब घर की महिलाओं को सूखी, संपन्न, स्वस्थ, आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास आरंभ हुए हैं. सखी मंडलों के जरिये ग्रामीण विकास की गाथाएं लिखी जाने लगी हैं.
वर्ष 2014 में राज्य में मात्र 18 फीसदी घरों में शौचालय था. चार साल बाद यह बढ़ कर 99 फीसदी हो गया. इसमें जल सहिया, रानी मिस्त्री और सखी मंडल की दीदियों ने सराहनीय कार्य किया है. राज्य के 40 लाख स्कूली बच्चों को साल में दो ड्रेस दिये जाने हैं. अब 80 लाख स्कूली ड्रेस का निर्माण पंचायत स्तर पर होगा. पंचायत की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही ड्रेस तैयार करेंगी. पॉल्ट्री फॉर्म में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, इसके लिए सरकार पूरे राज्य के सभी जिलों में पॉल्ट्री फेडरेशन सोसाइटी बनाये जाने पर जोर दे रही है. जिला स्तर पर फेडरेशन को चार लाख की राशि दी जायेगी. गुमला की महिलाओं द्वारा बनाया गया पॉल्ट्री फेडरेशन का टर्नओवर 185 करोड़ है.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और पहले पढ़ाई, फिर विदाई को हमेशा याद रखें. एक जनवरी, 2019 से मुख्यमंत्री सुकन्या योजना शुरू हो गयी है. बेटी के जन्म और पहली, 5वीं, 9वीं तथा 11वीं कक्षा में नामांकन पर प्रोत्साहन राशि मिलेगी. 18 साल तक अविवाहित रहने पर सरकार फिर से प्रोत्साहन राशि देगी.

महिला सशक्तीकरण की दिशा में राज्य काफी आगे बढ़ चुका है. हम चाहते हैं कि राज्य के विकास में स्त्री और पुरुष दोनों ही पहिए की बराबर भागीदारी हो, इससे समाज ठीक ढंग से चलता है. महिलाओं को आश्वस्त करना चाहेंगे कि वे आगे बढ़ें, सरकार हर कदम पर उनका साथ देगी.