aamukh katha

  • Feb 18 2020 3:17PM

किसान जैविक खेती से हो रहे आत्मनिर्भर

किसान जैविक खेती से हो रहे आत्मनिर्भर

दुर्जय पासवान
जिला: गुमला 

गुमला जिले में नक्सलियों के गढ़ बिशुनपुर प्रखंड के बनालात व घाघरा प्रखंड के बोरांग गांव में जैविक खेती से किसान स्वावलंबी बन रहे हैं. फिलहाल इन दोनों गांवों के 48 किसानों ने 25 हेक्टेयर में जैविक धान की खेती की है. बनालात व बोरांग घोर नक्सल प्रभावित इलाका है, लेकिन भय व पलायन से मुंह मोड़ने की बजाय किसान जैविक खेती कर रहे हैं. ये सभी किसान कृषि विज्ञान केंद्र, गुमला से जुड़े हुए हैं. इन्हें आकांक्षी योजना से जोड़ते हुए जैविक खेती कराया जा रहा है. इससे जहां इलाके के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं, वहीं अच्छी आमदनी भी हो रही है.

भुटकू, काला जीरा व जीरा फूल लगा रहे किसान

बनालात व बोरांग इलाके में किसानों ने धान की किस्म भुटकू, काला जीरा एवं जीरा फूल को खेतों में लगाया है. इससे उन्हें अच्छी उपज प्राप्त हुई है. किसान रामवृक्ष खेरवार, अवध सिंह, मालचंद उरांव, कुंती देवी, जाहू उरांव, प्रभु खेरवार, जीतू उरांव समेत अन्य किसानों ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र, विकास भारती, बिशुनपुर के वैज्ञानिकों की देखरेख में खेतों में जैविक खाद का प्रयोग किया गया. इससे धान की अच्छी उपज प्राप्त हुई. पूर्व में जो धान उत्पादन कर 18 से 20 रुपये प्रति किलो की बिक्री की जाती थी, उसी धान खेत में जैविक खाद का प्रयोग कर उत्पादन करने के बाद 30 रुपये प्रति किलो की दर से धान को बेचा गया. इससे किसानों को काफी अच्छा मुनाफा मिला.

जैविक खेती में सिंचाई की अधिक जरूरत नहीं

जैविक खेती से किसानों के साथ-साथ मृदा और पर्यावरण को भी फायदा होता है. भूमि की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है, वहीं कम सिंचाई की भी जरूर होती है यानी सिंचाई अंतराल में वृद्धि हो जाती है. रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है और फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होती है. जैविक खेती से भूमि की गुणवत्ता में भी सुधार आता है. भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है. भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होता है. मिट्टी की रासायनिक, जैविक और भौतिक अवस्था में सुधार होता है. वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती से और अधिक फायदा है. बढ़ती जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरा शक्ति में कमी एवं मानव स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती लाभप्रद है.

350 किसान जैविक वर्मी कंपोस्ट का कर रहे उपयोग : डॉ नीरज

कृषि वैज्ञानिक डॉ नीरज कुमार वैश्य ने बताया कि बिशुनपुर प्रखंड के बनालात एवं घाघरा प्रखंड के बोरांग घुठी गांव में किसानों द्वारा जैविक खेती की जा रही है. किसानों द्वारा उत्पादित धान का प्रसंस्करण कर जैविक चावल के रूप में बाजारीकरण किया जा रहा है. प्रखंड क्षेत्र में लगभग 350 किसान जैविक वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर अपने खेतों में प्रयोग कर रहे हैं.