aamukh katha

  • Mar 16 2020 12:46PM

अबला नहीं, अपराजिता है आधी आबादी

अबला नहीं, अपराजिता है आधी आबादी

गुरुस्वरूप मिश्रा

घर की चौखट के भीतर अमूमन चूल्हा-चौका संभालने वाली गांव-गिरांव की महिलाएं खेत-खलिहान से लेकर सियासत के मैदान तक फतह कर ले रही हैं. जागरूकता और एकजुटता का कमाल कहिए. अक्सर घूंघट में रहकर खामोश रहने वाली महिलाओं का आत्मविश्वास इस कदर बढ़ा है कि वह बात-बात में बोल उठती हैं कि वह किसी से कम नहीं हैं. ऐसा कोई काम नहीं, जो वह नहीं कर सकती हैं. झारखंड के किसी भी गांव में चले जाइए. बुनियादी असुविधाओं के बीच महिलाओं के चेहरे की चमक देख आप हैरत में पड़ जायेंगे. दुष्कर्म, मानव तस्करी, डायन बिसाही, घरेलू हिंसा और दहेज हत्या के बढ़ते अपराधों से अभी भी निपटने की चुनौती है, इसके बावजूद आधी आबादी अपराजिता है

कई दर्द के पहाड़ तुझ पर टूटते देखे, पर तुझे कभी टूटते नहीं देखा. झारखंड के गांव-जवारों में तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी अपने हौसले से तरक्की की नई इबारत लिखने वाली महिलाओं पर यह पंक्ति सटीक बैठती है. घर-बार हो या खेत-खलिहान. दफ्तर हो या सियासत. हर मोर्चे पर हमारी मां-बहनें किसी से कम नहीं हैं. पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर वक्त के साथ कदमताल कर रही हैं. कभी घर की देहरी तक कैद रहने वाली महिलाएं आज अपने हौसले से सामाजिक बेड़ियां तोड़कर तरक्की का आसमान छू रही हैं. पुरुषों की परछाईं बनकर रह जाने वाली गांव-गिरांव की महिलाएं अपने हुनर और काबिलियत की बदौलत अपनी पहचान बनाकर समाज में मोटी लकीर खींच रही हैं.

हर क्षेत्र में बज रहा डंका
जिस तेजी से वक्त बदल रहा है, उतनी ही तेज रफ्तार से झारखंड की ग्रामीण महिलाएं भी बदल रही हैं. इसके साथ ही बदल रही है गांव की तस्वीर. समाजसेवा, राजनीति, संगीत, फिल्म, खेल, साहित्य, शिक्षा, प्रबंधन, आर्मी, एयरफोर्स, पुलिस, आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा का क्षेत्र हो या कोई अन्य क्षेत्र. हर क्षेत्र में इनका डंका बज रहा है. 10वीं व 12वीं की परीक्षा हो या अन्य प्रतियोगिता परीक्षाएं. टॉप में जगह बनाकर मान बढ़ाती हैं बेटियां. पारिवारिक, शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक बदलाव से महिलाओं की ताकत बढ़ी है.

ये हैं गांव की डॉक्टर-इंजीनियर
गांव की ये डॉक्टर-इंजीनियर किसी बड़े संस्थान से पढ़कर नहीं निकली हैं. साधारण शिक्षा से असाधारण काम कर रही हैं. मिट्टी की डॉक्टर बनकर मिट्टी की जांच कर उसका स्वास्थ्य बता इलाज कर रही हैं. जहां बिजली नहीं पहुंच रही, उस सुदूर इलाके में सोलर इंजीनियर बनकर दुर्गम क्षेत्रों को सोलर लाइट से रोशन कर रही हैं. पर्यावरण संरक्षण में भी मोटी लकीर खींच रही हैं महिलाएं. जहां बैंक नहीं पहुंच पा रहे, वहां बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही हैं. समाज के आखिरी पंक्ति के व्यक्ति को घर जाकर पेंशन, मनरेगा व पैसे निकालने की सुविधा दे रही हैं. सखी मंडल की ताकत से अब ये हर क्षेत्र में खुद को साबित कर रही हैं.

इजरायल गयी थीं 24 महिला किसान
खेती-बारी में भी महिला किसान कम नहीं हैं. जैविक खेती हो या वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक खेती. देशभर में ये नाम कमा रही हैं. उन्नत कृषि तकनीक से अवगत कराने के लिए 24 महिला किसानों को इजरायल भेजा गया था. इजरायल से लौटीं ये महिला किसान अपने-अपने इलाके में किसानों के लिए रोल मॉडल हैं. ये किसानों को प्रशिक्षण दे रही हैं.

सियासत में नारी शक्ति
पंचायत चुनाव हो या विधानसभा चुनाव. महिलाएं अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं.
वर्ष 2005 में राज्य के पहले विधानसभा चुनाव में महिला विधायकों की संख्या चार थी, जो वर्ष 2009 में बढ़ कर आठ हो गयी. वर्ष 2014 में नौ महिला विधायक बनीं, लेकिन वर्ष 2018 में दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में दो और महिला विधायक बनी. इस तरह महिला विधायकों की संख्या 11 हो गयी थी. 2019 विधानसभा चुनाव में 10 महिला विधायकों ने चुनाव जीता. पंचायत चुनाव में भी 50 फीसदी से अधिक महिलाएं चुनाव जीती थीं. इस तरह सियासत में उनका दखल है.

देश का नाम किया रोशन
भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, भारत रत्न व देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, देश की पहली महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू, स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्री राजकुमारी अमृत कौर, भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री (उत्तर प्रदेश) सुचेता कृपलानी, देश की पहली महिला मुख्य सूचना आयुक्त दीपक संधू एवं भारत की प्रथम महिला मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस रमादेवी समेत कई महिलाओं ने देश का नाम रोशन किया है.

महिला शक्ति को जानिए
महात्मा गांधी ने कहा है कि एक आदमी को पढ़ाओगे, तो एक ही व्यक्ति शिक्षित होगा, लेकिन एक स्त्री को पढ़ाओगे, तो पूरा परिवार शिक्षित होगा. चेर ने महिलाओं को समाज की सच्ची शिल्पकार कहा है, वहीं डॉ भीम राव अंबेडर ने कहा है कि मैं किसी समुदाय की प्रगति, उस समुदाय में महिलाओं द्वारा की गयी प्रगति से मापता हूं.
स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि कुछ सच्ची, ईमानदार और ऊर्जावान महिलाएं, जितना कोई भीड़ एक सदी में कर सकती है, उसके मुकाबले ये एक वर्ष में कर सकती हैं.

चुनौतियों से निपटना है जरूरी
दुष्कर्म, मानव तस्करी, डायन बिसाही, घरेलू हिंसा और दहेज हत्या के बढ़ते अपराधों से अभी भी निपटने की चुनौती है, इसके बावजूद आधी आबादी का हौसला कम नहीं हुआ है. इनसे मुकाबला करते हुए वह आगे बढ़ रही हैं.

असुरक्षित पलायन रोकिए
हर वर्ष करीब 10 हजार महिलाओं का असुरक्षित पलायन हो रहा है. इनमें से लगभग 10 प्रतिशत दोबारा अपने गांव नहीं लौट पाती हैं. एक्शन अगेंस्ट ट्रैफिकिंग एंड सेक्सुअल एक्सप्लॉयटेशन (एटसेक) के आंकड़े बताते हैं कि ये पलायन नौ प्रतिशत बिचौलिये के बहकावे में, तीन प्रतिशत पारिवारिक दबाव में, 37 प्रतिशत सहेलियों के साथ, शेष 51 प्रतिशत परिवार के अन्य सदस्यों के साथ हो रहा है. पलायन करने वाली नाबालिग और किशोरियों में से 67 प्रतिशत की आयु 20 वर्ष से कम होती है. दिल्ली के अलावा मुंबई, यूपी, कोलकाता, ओड़िशा आदि राज्यों में भी इनकी बोली लगती है.

38 फीसदी बालिका वधू
झारखंड की कुल जनसंख्या तीन करोड़ 29 लाख 88 हजार 134 है. इसमें महिलाओं की संख्या एक करोड़ 60 लाख 57 हजार 819 है. एनएफएचएस-4 (2015-16) के मुताबिक राज्य का लिंगानुपात 1002 है. 15-49 वर्ष की महिलाएं 59 फीसदी साक्षर हैं. 20-24 वर्ष की वैसी महिलाएं, जिनकी शादी 18 वर्ष से पहले हुई है, वे 37.9 प्रतिशत हैं. घरेलू फैसलों में शामिल रहने वाली महिलाएं 86.6 प्रतिशत हैं. सामान्य से कम बॉडी मास इंडेक्स वाली महिलाएं 31.5 प्रतिशत हैं.

महिलाओं की सुरक्षा व शिक्षा है प्राथमिकता : हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. किसी कीमत पर इनकी सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. इन्हें हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. महिलाओं को बेहतर शिक्षा व्यवस्था देना उनकी प्राथमिकता में शामिल है. उनका हर कदम झारखंड का मान-सम्मान बढ़ाने वाला होगा.