aamukh katha

  • Jul 17 2019 2:51PM

दीदियों का बोल रहा हुनर, बदल रही है तस्वीर

दीदियों का बोल रहा हुनर, बदल रही है तस्वीर

झारखंड में सखी मंडल की दीदियों का हुनर बोल रहा है. इससे राज्य के ग्रामीण इलाके की तस्वीर बदल रही है. महिला समूह से जुड़ने के बाद उन्हें जेएसएलपीएस द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है. इसके बाद न सिर्फ उनकी जिंदगी बदलती है, बल्कि वह अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करती हैं. हुनर के बल पर बुरे दौर में भी वह घबराती नहीं हैं. उससे उबरते हुए नयी शुरुआत कर बदलाव की मिसाल पेश कर रही हैं. पढ़िए अपने जज्बे से समाज को आइना दिखातीं सखी मंडल की दीदियों की कहानियां

1. डॉक्टर दीदी बलमदीना करती हैं पशुओं का इलाज
रांची के अनगड़ा (गेतलसूद) की आजीविका पशु सखी बलमदीना तिर्की को झारखंड सम्मान से सम्मानित किया गया है. वह अपने इलाके में डॉक्टर दीदी के नाम से प्रसिद्ध हैं. उनकी सजगता से इलाके में पशु मृत्यु दर में काफी कमी आयी है. पांचवीं पास बलमदीना साल 2012 में जूही महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. आजीविका पशु सखी के तौर पर गांव में जाकर बकरियों को कृमिनाशक और टीका देने का काम शुरू किया, तो किसान पशुओं का इलाज कराने को तैयार नहीं थे. विश्वास जगने के बाद इलाज कराने लगे. अब अपनी स्कूटी से गांव-गांव घूम-घूम कर पशुओं का इलाज करती हैं.

2. फर्श से अर्श पर पहुंचीं अलका दीदी
सिमडेगा जिले की ठेठईटांगर पंचायत के गड़गड़बहार की अलका देवी का बुक कीपर से बीएपी बनना आसान नहीं था. वर्ष 2015 में प्रकाश आजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, तो शिक्षित होने के कारण बुक कीपर का काम मिला. समूह से पांच हजार का लोन लेकर पति के लिए चाट-चाउमिन की दुकान खोलीं. बुक कीपर से वह गड़गड़बहार ग्राम संगठन की ग्राम संगठन सहायिका बनीं. मार्च 2016 में अलका के पति की मौत हो गयी. विपरीत परिस्थितयों के बावजूद अलका डटी रहीं. सेतु दीदी का काम करते हुए ऑटो खरीदीं. आज अच्छी कमायी और अपनी पहचान है.

3. गांव की आवाज बुलंद करतीं संवाददाता सखी रूबी
रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड के महेशपुर गांव की बरकत सखी मंडल की बुककीपर रूबी खातून की पहचान आज पूरे इलाके में संवाददाता सखी के रूप में है. रूबी ने टैबलेट दीदी के तौर पर काम करना शुरू किया था. समूह की बैठकों और लेखा-जोखा का डाटा टैबलेट में फीड करती थीं. अब कम्युनिटी जर्नलिस्ट बनकर अपने आस-पास की समस्याएं और सखी मंडल की महिलाओं की सफलता की कहानियां पंचायतनामा के माध्यम से लिखकर प्रेरित करती हैं. रूबी दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यक्रम में अपनी सफलता की कहानी साझा कर चुकी हैं.

4. सिरीना दीदी ने धोया अनपढ़ का दाग, बनीं आईना
पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड की सिरीना बीबी ने अपनी मेहनत और लगन से न सिर्फ अनपढ़ होने का दाग धोया, बल्कि अपने परिवार को गरीबी से भी बाहर निकालीं. सीनियर सीआरपी के तौर पर काम करने वाली सिरीनी दूर-दराज के गांवों में ग्राम संगठन बनाती हैं. पढ़ने की चाहत के बावजूद वह छठी कक्षा तक पढ़ पायी थीं. अजमेर शरीफ स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद न सिर्फ मैट्रिक की पढ़ाई पूरी कीं, बल्कि अपनी जिंदगी में भी बदलाव लायीं. वह महिलाओं को घर से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करती हैं. समाज को आइना दिखा रही हैं सिरीना.

5. मोबाइल बैंक हैं बीसी सखी रुक्मिणी
गुमला जिले के रायडीह प्रखंड के सिलम गांव की रुक्मिणी देवी बीसी (बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट) सखी हैं. ग्रामीणों का बैंक खाता खोलना, खाता में पैसे जमा करना, निकालना, खाता को आधार कार्ड से जोड़ना जैसे काम रुक्मिणी अच्छी तरह करती हैं. अब गांव के लोगों को बैंक जाने की मजबूरी खत्म हो गयी है. घर पर ही सुविधाएं मिल जा रही हैं. रुक्मिणी साल 2015 में देवी महिला सखी मंडल से जुड़ीं. बुककीपर के तौर पर काम करने लगीं. समूह का बैंक लिंकेज होने पर रुक्मिणी एक लाख रुपये का लोन लेकर सूकर पालन शुरू कीं. उनके पति ने सहयोग किया. आज उनकी जिंदगी बदल गयी है.

6. किसानों की आमदनी बढ़ा रहीं कृषक मित्र निर्मला
मनोहरपुर प्रखंड के घाघरा गांव की निर्मला देवी आजीविका कृषक मित्र हैं. आधुनिक खेती पर जोर देने वाली निर्मला अपने क्षेत्र के सवा सौ से अधिक परिवारों को आधुनिक खेती का गुर सीखा चुकी हैं. वह कहती हैं कि पहले पारंपरिक खेती पर जोर था. रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल अधिक था. इससे खेती में काफी खर्च आता था और मुनाफा कम होता था. इससे किसानों की परेशानी बढ़ जाती थी. आधुनिक खेती से अधिक मुनाफा होता है. यही वक्त की मांग भी है. महिलाओं के साथ-साथ किसानों की साथी निर्मला की खुद की जिंदगी भी बदल गयी है.

7. सोलर दीदी सोनम के लैंप से फैल रही शिक्षा की रोशनी
लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड के कुंदगढ़ी गांव की सोलर दीदी सोनम दुलारी की आज इलाके में अपनी पहचान है. जेएसएलपीएस की ओर से सोलर लैंप बनाने का उन्हें प्रशिक्षण दिया गया था. इसके बाद वह सोलर लैंप बनाने लगीं. तीन हजार से अधिक सोलर लैंप बनाकर स्कूलों में वितरण कर चुकी हैं. जय सरना समिति से जुड़ी सोनम दुलारी कहती हैं कि कम समय में उन्हें बड़ी उपलब्धि मिली है. नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके स्टॉल पर आकर सोलर लाइट प्रोजेक्ट की जानकारी ली थी. इस बातचीत से उन्हें नयी ऊर्जा मिली है.

8. टैबलेट दीदी का कमाल देखिए
आज के डिजिटल युग में गांव की महिलाएं भी नई तकनीक के साथ कदमताल कर रही हैं. रांची के अनगड़ा के गेतलसूद की टैबलेट दीदी हैं बबली करमाली. वह गांव के स्वयं सहायता समूह के लेन-देन और बैठकों के आंकड़े टैबलेट के जरिए अपलोड करती हैं, जिससे रियल टाइम में ये आंकड़े झारखंड सरकार और भारत सरकार के एमआइएस में अपडेट हो जाते हैं. दर्जनों रजिस्टर में स्वयं सहायता समूह का लेखा-जोखा रखने वाली महिलाएं आज पेपरलेस हो गयी हैं. जिन महिलाओं ने ये सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके पास अपना मोबाइल होगा. वह आज धड़ल्ले से टैबलेट चला रही हैं.

9. मिथक तोड़तीं रानी मिस्त्री गुड़िया देवी
हाथ में करनी लेकर गमला में रखे सीमेंट-बालू के मिश्रण से दीवार खड़ी कर रही हैं रानी मिस्त्री गुड़िया देवी. इससे न सिर्फ मिथक टूटा, बल्कि मजदूर से रानी मिस्त्री बनने से उनकी आमदनी भी बढ़ गयी है. फरवरी 2018 से गुड़िया रानी मिस्त्री का काम कर रही हैं. स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब तक कई शौचालय बना चुकी हैं. बोकारो की अराजू पंचायत के आरासाड़म गांव की गुड़िया देवी को परिवार वालों ने मर्दोंवाला काम करने से पहले मना किया था, लेकिन जिद से उन्होंने रानी मिस्री का प्रशिक्षण लिया और खुद को साबित कर दिया. आज सभी उनकी तारीफ कर रही हैं.