aamukh katha

  • Feb 1 2019 1:44PM

बाल विवाह नहीं

बाल विवाह नहीं

बाल विवाह यानी बच्चों की शादी. 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के की शादी बाल विवाह है. ये कानूनन जुर्म है. इसके बावजूद यह अब तक जारी है. वक्त के साथ आंकड़ों में कमी आ रही है, लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी बाल विवाह मुक्त समाज, राज्य व देश सपना बना हुआ है. जागरूकता अभियान समेत कई प्रयासों के बावजूद विश्व भर में मासूम बेटियों को कम उम्र में ब्याह कर उनकी जिंदगी नरक बनायी जा रही है.

रूढ़ीवादी परंपरा की गहरी पैठ कहें या गरीबी, अशिक्षा या दहेज के दानव को जिम्मेदार मानें. हकीकत यही है कि देश में 26.80 फीसदी और झारखंड में 38 फीसदी बालिकाएं वधू बना दी जा रही हैं. पंचायतनामा का यह अंक बेटियों को समर्पित है. इसमें देश-दुनिया के साथ-साथ झारखंड में बाल विवाह की स्थिति, कारण व नुकसान से रू--रू कराया गया है, ताकि आप संकल्प लेकर बाल विवाह को हर कीमत पर कहें ना