aamukh katha

  • Oct 31 2016 7:55AM

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम : संविधान ने दिया हर एक को भोजन का अधिकार

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम : संविधान ने दिया हर एक को भोजन का अधिकार

डाॅ विष्णु राजगढ़िया

सामाजिक कार्यकर्ता

हमारे देश के संविधान के अनुच्छेद 47 में लिखा गया है ‘राज्य, अपने लोगों के पोषणाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करने और लोक स्वास्थ्य के सुधार को अपने प्राथमिक कर्तव्यों में मानेगा’. देश के प्रत्येक नागरिक की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे संविधान की इस भावना के आलोक में आगे बढ़ा कदम है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम वर्ष 2013 में भारत की संसद से पारित हुआ. इस कानून में क्या है, इसे यहां सरल शब्दों में बताने का प्रयास किया गया है.

इस कानून का  क्या है उद्देश्य

जनसाधारण को गरिमामय जीवन के लिए सस्ती दर पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण खाद्य उपलब्ध कराना. मानव जीवन चक्र में खाद्य और पोषण संबंधी सुरक्षा और उससे संबंधी अन्य नियम बनाना.

इस कानून के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं-

नाम- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013

विस्तार- संपूर्ण भारत में

प्रमुख परिभाषा- 

केंद्रीय पूल- खाद्यान्नों का ऐसा स्टाक, जो केंद्र और राज्य सरकारों से न्यूनतम समर्थन कीमत के माध्यम से प्राप्त किया जाता है. साथ ही, जिसे लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली या किसी कल्याणकारी स्कीम या आपदा राहत हेतु रखा जाता है

पात्र गृहस्थी- पूर्विकता प्राप्त गृहस्थी और अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत आने वाली गृहस्थी 

खाद्यान्न- चावल, गेहूं या मोटा अनाज या उनका कोई ऐसा संयोजन, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप हो 

खाद्य सुरक्षा- इस कानून के अनुरूप खाद्यान्न और भोजन की हकदार मात्रा प्रदान करना

खाद्य सुरक्षा भत्ता- हकदार व्यक्तियों को राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि

स्थानीय प्राधिकारी- पंचायत, नगर निकाय

भोजन- गरम पकाया हुआ या पहले से पकाया हुआ और परोसे जाने के पूर्व गरम किया गया भोजन या घर ले जाया जाने वाला राशन

न्यूनतम समर्थन मूल्य- केंद्र सरकार द्वारा घोषित मूल्य, जिस पर केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय पूल के लिए किसानों से खाद्यान्न प्राप्त किए जाते हैं

पूर्विकता प्राप्त गृहस्थी- इस कानून की धारा 10 में पहचान की गई गृहस्थी

सामाजिक संपरीक्षा- ऐसी प्रक्रिया, जिसमें सामूहिक रूप से जनता किसी कार्यक्रम के कार्यान्वयन का माॅनिटर और मूल्यांकन करती है

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली- उचित दर दुकानों के माध्यम से राशन कार्ड धारकों को आवश्यक वस्तुओं के वितरण की प्रणाली

सतर्कता समिति- इस कानून के सभी स्कीमों के कार्यान्वयन का पर्यवेक्षण करने के लिए धारा 29 के अधीन गठित समिति

खाद्य सुरक्षा का प्रावधान

हकदार व्यक्तियों को खाद्यान्न या भोजन नहीं मिलने पर खाद्य सुरक्षा पाने का  लाभ मिलेगा.

पात्र गृहस्थी की पहचान 

ग्रामीण और नगर क्षेत्रों में प्रतिशतता का निर्धारण केंद्र सरकार करेगी

ग्रामीण और नगर क्षेत्रों के व्यक्तियों की कुल संख्या जनगणना प्राक्कलनों के आधार पर की जाएगी 

ग्रामीण और नगर क्षेत्र के लिए निर्धारित व्यक्ति संख्या के भीतर ही अन्त्योदय अन्य योजना के लाभुक शामिल होंगे

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत लायी जाने वाली पूर्विकता प्राप्त गृहस्थियों के रूप में शेष बची गृहस्थियों की पहचान करेगी

राज्य सरकार, ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए पात्र गृहस्थियों की सूची मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार करेगी. 

पात्र गृहस्थियों की सूची सार्वजनिक क्षेत्र में लगायी और प्रदर्शित की जायेगी.

वितरण प्रणाली में सुधार के प्रयास

वितरण प्रणाली में केंद्र और राज्य सरकार निम्न सुधार करेगी- 

डोर स्टेप डिलेवरी

सभी आंकड़ों की हर स्तर पर पारदर्शिता, अनियमितता रोकने के लिए कंप्यूटर का उपयोग

लाभुकों की बायोमीट्रिक सूचना के साथ विशिष्ट पहचान के लिए ‘आधार’ का प्रयोग किया जाना

अभिलेखों की पूर्ण पारदर्शिता

उचित दर पर दुकानों का लाइसेंस देने में पंचायतों, स्वयं सेवी समूहों, सहकारी संस्थाओं, महिला समूहों को प्राथमिकता

महिला सशक्तीकरण के कदम

राशन कार्ड में घर की मुखिया के तौर पर सबसे अधिक उम्र की महिला का नाम दर्ज होगा. उसकी उम्र 18 वर्ष से कम न हो. 

अगर 18 वर्ष या अधिक आयु की महिला नहीं हो तो ऐसी स्थिति में वरिष्ठ पुरुष का नाम राशन कार्ड में मुखिया के तौर पर दर्ज होगा. बाद में जब महिला की उम्र 18 वर्ष हो जायेगी तो पुरुष सदस्य के स्थान पर वह घर की मुखिया बन जाएगी.

राज्य खाद्य आयोग

प्रत्येक राज्य सरकार एक राज्य खाद्य आयोग का गठन करेगी. आयोग में कुल सात सदस्य होंगे- एक अध्यक्ष, पांच अन्य सदस्य और एक सदस्य-सचिव होंगे. सदस्य सचिव राज्य सरकार में संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी होगा. सात सदस्यीय आयोग में कम-से-कम दो महिला होंगी, चाहे वे अध्यक्ष, सदस्य या सदस्य-सचिव हों. सात सदस्यीय आयोग में एक व्यक्ति अनुसूचित जाति का और एक व्यक्ति अनुसूचित जनजाति का होगा, चाहे वह अध्यक्ष, सदस्य-सचिव हो.  अखिल भारतीय या राज्य की सिविल सेवाओं के सदस्य या सार्वजनिक जीवन में कृषि, विधि, मानवाधिकार, समाज सेवा, प्रबंधन, पोषण, स्वास्थ्य, खाद्य संबंधी नीति या लोक प्रशासन में विख्यात लोगों को लिया जायेगा, जिनके पास निर्धनों के खाद्य और पोषण संबंधी अधिकारों में सुधार लाने संबंधी कार्य का प्रमाणित रिकार्ड हो. अध्यक्ष और अन्य सदस्य पांच वर्ष के लिए नियुक्त होंगे. वह पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होंगे. कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में 65 वर्ष की आयु के बाद पद धारण नहीं करेगा.

शिकायत निवारण तंत्र

राज्य सरकार एक आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करेगी. इसमें काॅल सेंटर, हेल्पलाइन, नोडल अधिकारी होंगे. 

शिकायत के शीघ्र और प्रभावी निवारण के लिए हर जिले में एक जिला शिकायत निवारण अधिकारी होगा. यह अधिकारी सभी शिकायत सुनकर उनका निराकरण करेगा. जिला शिकायत निवारण अधिकारी के किसी आदेश के विरूद्ध राज्य आयोग के समक्ष अपील की जा सकेगी.

राज्य खाद्य आयोग के कार्य

राज्य में इस अधिनियम के कार्यान्वयन की मोनिटरिंग और मूल्यांकन करना

हकदारियों के अतिक्रमणों की स्वप्रेरणा से या शिकायत के प्राप्त होने पर जांच करना

इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार को सलाह देना

लाभुकों को इस अधिनियम के अनुसार हक तथा पूर्ण पहुंच बनाने के लिए समर्थ बनाने के संबंध में खाद्य और पोषण संबंधी स्कीमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार को सुसंगत सेवा देने के लिए सभी एजेंसियों, स्वयं सहायता निकायों और गैर-सरकारी संगठनों को सलाह देना

जिला शिकायत निवारण अधिकारी के आदेशों के खिलाफ अपील की सुनवाई करना

वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना, जिसे राज्य सरकार द्वारा विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा

महिलाओं-बच्चों को पोषण सहायता 

प्रत्येक गर्भवती स्त्री और स्तनपान कराने वाली माता को गर्भावस्था और प्रसव के बाद छह माह तक आंगनबाड़ी से निःशुल्क भोजन मिलेगा. साथ ही छह हजार रुपये नगद भी मिलेगा. हालांकि सरकारी नौकरी करने वाली महिलाओं को, जिन्हें ऐसा ही अन्य लाभ मिल रहा हो, उन्हें नगद राशि का लाभ नहीं मिलगा.  छह माह सेे छह वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी में निःशुल्क भोजन मिलेगा. माताओं को छह माह तक के अपने बच्चों को केवल स्तनपान कराना है. 

कक्षा आठ तक के अथवा छह से चौदह साल के बच्चों को सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त विद्यालयों में दोपहर का भोजन निःशुल्क मिलेगा. विद्यालय में अवकाश होने पर यह सुविधा नहीं मिलेगी. प्रत्येक विद्यालय तथा आंगनबाड़ी में भोजन पकाने, पेयजल और स्वच्छता की सुविधाएं होंगी. शहरी क्षेत्र में केंद्रीयकृत रसोइघर बनाये जा सकते हैं. आंगनबाड़ी में कुपोषित बालकों को निःशुल्क भोजन मिलेगा.