aamukh katha

  • Dec 23 2016 8:35AM

मनरेगा में तकनीकी सहयोग देता सीएफटी परियोजना

मनरेगा में तकनीकी सहयोग देता सीएफटी परियोजना
क लस्टर फेसिलिटेशन टीम यानी सीएफटी परियोजना, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर तकनीकी सहयोग प्रदान करता है, जिससे मनरेगा के माध्यम से चल रहे कार्यों का संचालन ठीक से हो सके. मनरेगा के कार्यों को कर रहे मजदूरों का भुगतान समय पर हो और मनरेगा से गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्ति का निर्माण हो. फलस्वरूप ग्रामीणों का जीवन-स्तर में सुधार हो. सीएफटी के सदस्य महिला स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन और एसएचजी फेडरेशन को मनरेगा में अधिक भूमिका निभाने में मदद करते हैं. इस परियोजना के जरिये ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों को मनरेगा में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. 
 
मनरेगा में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अधिनियम में ही प्रमुख रूप से रेखांकित है, लेकिन झारखंड में पंचायत प्रतिनिधियों की मनरेगा में भूमिका अभी तक सीमित रही है. जानकारी के अभाव में पंचायत प्रतिनिधि मनेरगा में अपनी भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं. इसे देखते हुए हाल ही में सभी सीएफटी प्रखंडों के मुखिया और वार्ड सदस्यों को मनरेगा पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों को मनरेगा, मनरेगा की विभिन्न प्रावधानों एवं संभावनाओं से अवगत कराया गया. 
 
जनप्रतिनिधियों समेत पंचायत प्रतिनिधियों के मनरेगा में भागीदारी बढ़ने से न केवल जन कल्याण होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर मनरेगा के क्रियान्वयन एवं निगरानी में सुधार आएगा. इस परियोजना को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय देश के 250 पिछड़े प्रखंडों में चला रहा है. हर सीएफटी प्रखंड में, उस प्रखंड के लिए चयनित सिविल सोसाइटी संगठन कम से कम नौ विशेषज्ञों को नियुक्त करती है, जिसमें सोशल मोबिलाइजर, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन विशेषज्ञ एवं तकनीकी सहायक शामिल होते हैं. यह टीम प्रखंड स्तर के प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर मनरेगा का लाभ आमलोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. झारखंड में सीएफटी परियोजना 21 जिलों के 76 प्रखंडों में 29 सिविल सोसाइटी संगठनों के सहयोग से चलायी जा रही है.
 
(लेखक प्रधानमंत्री ग्रामीण िवकास के फेलो हैं)
 
उद्देश्य
 
सीएफटी परियोजना का उद्देश्य मनरेगा और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के कार्यों का निगरानी करना है, ताकि सिविल सोसाइटी संगठनों की सहायता से मनरेगा में सृजित की जा रही परिसंपत्तियों की गुणवत्ता को बढ़ाते हुए ग्रामीण आजीविकाओं के मसले सुलझाये जा सके. 
 
मेट का चयन
 
मनरेगा से जुड़ी योजनाओं की निगरानी के लिए मेट का प्रावधान है. सभी सीएफटी प्रखंडों में महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों का मेट के रूप में चयन किया गया है. सरकार ने यह निर्णय लिया है कि राज्य के 76 सीएफटी प्रखंडों में केवल महिला एसएचजी ही मेट के रूप में काम करेंगी. मेट का चयन ग्रामसभा करता है. चयनित मेटों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है. चयनित मेटों को मनरेगा एवं इसके विभिन्न प्रावधानों तथा प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी जाती है. सभी प्रशिक्षित मेटों का नरेगासॉफ्ट में पंजीकरण किया जाता है, जिसके उपरांत उन्हें कार्य आवंटित किये जाते हैं. 
 
क्या है मेट किट
 
मेटों को किट उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें एक छोटा कैलकुलेटर, मापी करने का फीता, मेट दैनिक मापी प्रपत्र, कलम, पैड, मेट कोट आदि सामग्री रहते हैं. मेट के काम में काफी तकनीकी पहलु होता है, इसलिए प्रशिक्षण के बाद भी प्रखंड के सीएफटी सदस्य उनको निरंतर सहयोग देते हैं. 
 
कैसे होता है काम
 
कलस्टर फेसिलिटेशन टीम (सीएफटी) के सदस्य सैकड़ों परिवारों को मनेरगा जॉब कार्ड बनवाकर मनेरगा से जोड़ने का काम करते हैं. एसएचजी मेट मनेरगा के योजनाओं का बेहतर निगरानी कर रही हैं. मनेरगा में विलंब से मजदूरी मिलना एक बड़ी समस्या है. विशेष प्रकार के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल होने से इस समस्या में कमी आयी है. सीएफटी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों को मनरेगा से जोड़ने में रहा है. लोगों के बीच काम करके सीएफटी सदस्यों ने ग्रामसभा में जनभागीदारी (खासकर महिलाओं और वंचित वर्गों) को बढ़ाने का प्रयास किया है. 
 
मनरेगा में ग्राम पंचायतों की भूमिका
 
मनरेगा अधिनियम की परिकल्पना ग्राम पंचायत तथा पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को केंद्र में रखकर की गयी है. मनरेगा की नियोजन से लेकर क्रियान्वयन एवं निगरानी तक में ग्राम पंचायतों की ही महत्वपूर्ण भूमिका है. इसके अंतर्गत गांव-पंचायत में कौन-सी योजना चलेगी, यह निर्णय लेने का अधिकार केवल ग्रामसभा को ही है. ग्रामसभा द्वारा योजना के चयन के बाद, ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति के अनुमोदन के बाद प्रखंड द्वारा योजना की स्वीकृति दी जाती है.
 
झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ मनरेगा के क्रियान्वयन को बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा में ग्राम पंचायतों की भूमिका को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं. 
 
 ग्रामीण विकास विभाग द्वारा यह महसूस किया गया है कि मनरेगा के सफल कार्यान्वयन के लिए पंचायत समिति व जिला परिषद द्वारा भी नियमित निगरानी व समीक्षा की आवश्यकता है. इसी संदर्भ में विभाग द्वारा एक दिशा-निर्देश जारी किया गया है, जिसमे मनरेगा योजनाओं की निगरानी व अनुश्रवण में पंचायत समिति एवं जिला परिषद की भूमिका का उल्लेख किया गया है. पंचायत समिति द्वारा प्रखंड स्तर पर व जिला परिषद द्वारा जिला स्तर पर मनरेगा की मासिक समीक्षा की जानी है. इस समीक्षा के लिए प्रशासन द्वारा मनरेगा योजनाओं के कार्यान्वयन से संबंधित जानकारी प्रदान की जानी है. 
 
 सरकार की पहल तब ही सफल हो सकती है जब हमारे सभी जन-प्रतिनिधि सक्रिय रूप से मनरेगा में अपनी जिम्मेदारी निभायें. मनरेगा सभी जन प्रतिनिधियों को एक अवसर देता है कि जन कल्याणकारी योजनाओं को अपने क्षेत्र में पहुंचायें और जनता को किये वादे को पूरा करने में इस योजना का लाभ उठायें.
 
ग्राम पंचायतों को आवश्यक दिशा-निर्देश
 
वार्ड सदस्य, परिवारों को जॉब कार्ड की मांग एवं मजदूरों को काम की मांग करने में सहयोग कर सकते हैं.
वार्ड सदस्यों द्वारा उनके क्षेत्र में चल रही मनरेगा योजनाओं की निगरानी कर सकते हैं.
 
प्रत्येक सप्ताह पंचायत भवन में रोजगार दिवस का आयोजन होना अनिवार्य है. ग्राम पंचायत द्वारा प्रखंड प्रशासन के सहयोग से रोजगार दिवस का आयोजन किया जायेगा.
 
काम की मांग कर रहे मजदूरों में से किन मजदूरों को किस योजना में काम आवंटित करना है, यह निर्णय वार्ड सदस्य के सहमति से लिया जाना है.
 
प्रति कार्य सप्ताह के अंत में वार्ड सदस्य द्वारा मस्टर रोल व मेट मापी पुस्तिका का सत्यापन किया जाना है
ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति द्वारा मनरेगा की मासिक समीक्षा की जानी है.
 
मजदूरी एवं सामग्री भुगतान के लिए जारी हो रहे Fund Transfer Order (FTO) के लिए पंचायत सेवक प्रथम हस्ताक्षरी व मुखिया दूसरे हस्ताक्षरी हैं.
 
ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति द्वारा ग्राम पंचायत के सभी निबंधित सामग्री वेंडर द्वारा आपूर्ति की गई सामग्री की गुणवत्ता व नियमितता का मासिक मूल्यांकन किया जाना है. अगर किसी वेंडर का कार्य असंतोषजनक पाया गया, तो ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति द्वारा उनकी सेवा रद्द की जा सकती है.
 
ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति द्वारा रोजगार सेवक के काम का नियमित मूल्यांकन किया जाना है. अगर किसी रोजगार सेवक का कार्य असंतोषजनक पाया जाता है, तो ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी को मूल्यांकन के विषय में सूचित किया जाना है.