aamukh katha

  • Jan 27 2017 8:58AM

गरीबों के कल्याण का साल है 2017

गरीबों के कल्याण का साल है 2017
योजनाओं की भरमार, लाभ उठाएं बारंबार
वर्ष 2017 के आगमन के साथ ही ग्रामीण परिवेश से जुड़े लोगों की आकांक्षाएं भी बढ़ गयी हैं. वर्ष 2016 में जिन योजनाओं को नहीं जान पाये, उन्हें नये साल में आत्मसात करने की कोशिश करें ताकि केंद्र व राज्य सरकार के उद्देश्य सही रूप में फलीभूत हो सके. ग्रामीण विकास के लिए सरकार की योजनाओं से हम सब आज भी अनजान हैं. खेती-किसानी से लेकर महिलाओं, किशोर-किशोरियों, युवाओं, वृद्ध महिला-पुरुषों व दिव्यांगों के लिए सरकार ने कई योजनाएं संचालित की हैं, ताकि आप इन योजनाओं का लाभ उठा सकें. नये साल के पहले अंक में पंचायतनामा ने ग्रामीण क्षेत्रों के हर तबके से जुड़ी योजनाओं को एक जगह पर लाने की कोशिश की है. पढ़िए समीर रंजन का यह आलेख. 
 
ग्रामीण महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना
 
गरीब परिवारों की महिलाओं के चेहरों पर खुशी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत की है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खाना पकाने के लिए उपयोग में आने वाले अशुद्ध जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना है. योजना का लाभ लेने के लिए वैसे बीपीएल परिवार आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास एलपीजी कनेक्शन नहीं है. ऐसे परिवार की महिला सदस्य निर्धारित आवेदन पत्र भरकर अपने नजदीकी एलपीजी वितरण केंद्र में जमा करा सकती है. 
 
इस योजना के तहत तीन साल में 6.60 लाख परिवार को मुफ्त गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसमें एक वर्ष में दो लाख 26 हजार और आगामी तीन साल में छह लाख गैस सिलेंडर और चूल्हा केंद्र सरकार की मदद से झारखंड सरकार राज्य की माताओं और बहनों को देगी. 
 
आवेदन के समय आवेदक दो सिलेंडर विकल्पों- 14.2 किलो और पांच किलो में से किसी एक का चुनाव कर सकती हैं. योजना में सिलेंडर का सिक्योरिटी डिपॉजिट, प्रेशर रेग्यूलेटर, डीजीसीसी, सुरक्षा होज और इंस्टालेशन व प्रबंधन चार्ज भी कवर किया गया है. इस योजना के तहज धुआं रहित ईंधन उपलब्ध होने से परिवारों की स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. साथ ही राज्य के जंगलों को होने वाली हानि पर भी अंकुश लग सकेगा.
 
जननी सुरक्षा योजना
 
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं को संस्थागत प्रसूति कराने के उद्देश्य से जननी सुरक्षा योजना की शुरुआत हुई. प्रसव अस्पताल अथवा प्रशिक्षित दाई द्वारा किया जाना चाहिए. प्रसूति के समय ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को 1400 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. शत प्रतिशत केंद्र प्रायोजित इस योजना का उद्देश्य गरीब गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संस्थागत सुविधा प्रदान करना है. योजना के अंतर्गत पंजीकृत प्रत्येक लाभार्थी के पास एमसीएच कार्ड के साथ-साथ जननी सुरक्षा योजना कार्ड भी होना जरूरी है. 
 
आशा अथवा कोई अन्य सुनिश्चित संपर्क कार्यकर्ता द्वारा एएनएम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में अनिवार्य रूप से प्रसव की व्यवस्था करना आवश्यक है. इससे गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जांच और प्रसव के बाद देखभाल और निगरानी करने में सहायता मिलती है. इसका लाभ सभी वर्ग की महिलाओं को सरकारी एवं चिन्हित गैर सरकारी संस्थान पर प्रसव कराने पर देय है.
 
अब इस योजना का लाभ मोबाइल पर
 
इस योजना के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है. इसके तहत अब सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले 1750 रुपये उन्हें मोबाइल के जरिये प्रसव के कुछ घंटों बाद ही उपलब्ध करा दिये जायेंगे. इसके तहत सरकारी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के लिए पहुंची गर्भवती महिला का मोबाइल नंबर केंद्र के प्रभारी हासिल करेंगे. प्रसव के तत्काल बाद केंद्र के प्रभारी एक अधिकृत ई-मेल आईडी से मेल करेंगे कि संबंधित महिला ने यहां प्रसव कराया है.
 
मेल में उसके द्वारा उपलब्ध कराये गये मोबाइल नंबर भी अंकित रहेगा. वोडाफोन कंपनी इसके बाद उस महिला के मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजेगी कि उसे कंपनी की ओर से जननी सुरक्षा योजना के तहत 1750 रुपये उपलब्ध कराया जायेगा. इस मैसेज के साथ मोबाइल लेकर वह महिला अथवा उसके परिजन वोडाफोन के किसी भी रिटेलर के पास जायेंगे और मैसेज व उसमें दिया गया विशेष कोड दिखाकर राशि हासिल कर सकते हैं. यह सारी प्रक्रिया प्रसव के कुछ ही घंटों के दौरान पूरी की जायेगी.
 
बेिटयों के िलए सुकन्या समृद्धि योजना
 
म हिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई है. लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत हुई है. सुकन्या समृद्धि योजना का उद्देश्य बेटियों की पढ़ाई और उनकी शादी पर आने वाले खर्च को आसानी से पूरा करना है. इसके तहत बेटी की पढ़ाई व शादी के लिए डाक विभाग के पास सुकन्या समृद्धि योजना का अकाउंट खुलवाया जा सकता है. इसके लिए बच्ची की उम्र दस साल से कम होनी चाहिए. 
 
 इस अकाउंट में बेटी के नाम से एक साल में एक हजार से लेकर एक लाख पचास हजार रुपए जमा करा सकते हैं. यह पैसा अकाउंट खुलने के 14 साल तक ही जमा करवाना होगा और यह खाता बेटी के 21 साल की होने पर ही परिपक्व होगा. इस योजना में बेटी के 18 साल के होने पर आधा पैसा निकलवा सकते हैं. वहीं अगर बेटी की 18 से 21 साल के बीच शादी हो जाती है तो अकांउट उसी वक्त बंद हो जायेगा. अकाउंट में अगर पेमेंट लेट हुई तो सिर्फ 50 रुपये की पैनल्टी लगाई जायेगी. 
 
इसके अलावा अगर एक साल तक न्यूनतम राशि एक हजार रुपये जमा नहीं होते हैं तो खात सक्रिय नहीं माना जायेगा. पोस्ट ऑफिस के अलावा कई सरकारी व निजी बैंक भी इस योजना के तहत खाता खोल रही हैं. सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खातों पर आयकर कानून की धारा 80-सी के तहत छूट मिलेगी. फिलहाल यह योजना पोस्ट ऑफिस में ही जारी है लेकिन अनुमान है कि जल्द ही यह योजना बैंक का भी हिस्सा बनेगी, जिनमें वे सभी बैंक आ सकती है जो पीपीएफ अकाउंट की सुविधा देती है.
 
मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना
 
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित या निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या या विधवा या परित्याक्ता के विवाह के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है. इस योजना के तहत विवाह के अवसर पर कन्याओं के गृहस्थ जीवन संबंधि आधारभूत सामग्रियां दी जाती है. यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है. इसकी शर्त यह है कि कन्या ने विवाह की निर्धारित आयु 18 वर्ष पूरी कर ली हो. वर्ष 2007 में इस योजना की शुरुआत हुई. इस योजना के तहत 15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता कन्या की गृहस्थी की व्यवस्था के लिये दी जाती है. 
 
गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले परिवारों के बच्चियों के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, यहां तक कि उसकी शादी तक के लिए धन राशि संरक्षित करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत हुई. 15 नवंबर 2010 के बाद जन्मी बच्चियों को इस योजना का लाभ मिलेगा. इस योजना के तहत बच्ची के जन्म से लेकर पांच वर्षों तक हर साल छह हजार रुपये बच्ची के खाते में सरकार निवेश करेगी. एक निश्चित राशि से डाकघर में बच्ची के नाम से अकाउंट खुलेगा. 
 
बालिका जब छठी कक्षा में प्रवेश करेगी, उसे दौ हजार रुपये और नौवीं में प्रवेश करने पर चार हजार रुपये का एकमुश्त भुगतान किया जायेगा. इसी तरह 11वीं में पहुंचने पर 7500 रुपये मिलेंगे. इतना ही नहीं, 11वीं और 12वीं कक्षा में इन बच्चियों को अन्य योजनाओं से प्राप्त होने वाली सुविधाओं के अलावा प्रतिमाह बतौर छात्रवृत्ति दो सौ रुपये मिलेंगे. बालिका की आयु 21 वर्ष होने और 12वीं की परीक्षा में सम्मिलित हो जाने पर उसे एकमुश्त एक लाख आठ हजार छह सौ रुपये दिए जायेंगे, बशर्ते उसकी शादी 18 वर्ष के बाद हुई हो.
 
किसको मिलेगा लाभ
 
जिनके माता-पिता गरीबी रेखा से नीचे अथवा वार्षिक आय 72 हजार रुपये से अधिक ना हो अधिकतम दो बच्चों के बाद दपंत्ति द्वारा परिवार नियोजन अपनायी गयी हो बालिका का जन्म 15 नवंबर 2010 या इसके बाद का हो यदि माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गयी हो, तो परिवार नियोजन की शर्त मान्य नहीं होगी, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र आवश्यक होगा
 
यदि अनाथ/गोद ली गयी बालिका है, तो प्रथम बालिका मानी जायेगी यदि जुड़वां दोनों बच्चियां होगी, तो दोनों को लाभ मिलेगा दूसरी पुत्री के मामले में माता या पिता के नसबंदी का प्रमाण-पत्र आवेदन के साथ संलग्न करना जरूरी होगा अनाथ बालिका होने पर जन्म के पांच साल तक किया गया पंजीकरण मान्य होगा
 
जन्म के एक वर्ष के अंदर आवेदन देना अनिवार्य होगा, एक वर्ष से अधिक पुराना जन्म का मामला मान्य नहीं होगा
प्रसव संस्थागत हो तथा जन्म प्रमाण-पत्र संबंधित अस्पताल तथा सक्षम पंचायत/नगर निकाय द्वारा निर्गत हो
बालिका के कक्षा छठी में पहुंचने पर होनेवाले प्रथम भुगतान के पूर्व संबंधित परियोजना पदाधिकारी प्रत्येक बालिका के लिए आधार पहचान पत्र बनाना सुनिश्चित करेंगे. किसी भी भुगतान के समय लाभार्थी एवं उनके परिजनों का आधार पहचान पत्र संख्या होना अनिवार्य होगा
आवेदन की प्रक्रिया
 
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आंगनबाड़ी केंदों में संबंधित सेविका से फार्म प्राप्त कर आंगनबाड़ी केंद्रों में आवेदन जमा कर सकते हैं. आवेदन के साथ जन्म व आय प्रमाण पत्र, बीपीएल प्रमाण पत्र भी संलग्न करेगें. अनाथ बालिका के मामले में अनाथालाय/संरक्षणालय के अधीक्षक द्वारा बालिका के अनाथालय में प्रवेश के एक वर्ष के अंदर एवं बालिका की आयु छह वर्ष होने के पूर्व तक संबंधित परियोजना के अधिकारी को आवेदन देना होगा. द्वितीय प्रसव से उत्पन्न बालिका के मामले में माता या पिता द्वारा बन्ध्याकरण/नसबंदी करा लेने संबंधित प्रमाण पत्र देना आवश्यक होगा. 
 
मुख्यमंत्री दाल- भात योजना
 
राज्य के गरीबों को भरपेट भोजन कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वर्ष 2011 में मात्र पांच रुपये में दाल- भात और सब्जी योजना की शुरुआत की. इस योजना का नाम मुख्यमंत्री दाल-भात योजना िदया गया है. शुरुआती समय में राज्य में एक सौ केंद्र ही खुले थे लेकिन वर्तमान में सभी जिलों में करीब चार सौ दाल-भात केंद्र चलाये जा रहे हैं. पांच रुपये में करीब दो सौ ग्राम दाल-भात और सब्जी दी जाती है. इस योजना को और कारगर बनाने के उद्देश्य राज्य सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए मोबाइल वैन के माध्यम से गरीबों को दाल-भात उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया.
 
स्वामी विवेकानंद निःशक्त स्वावलंबन प्रोत्साहन योजना
 
नि: शक्तों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत हुई. इस योजना के तहत पांच साल से अधिक बच्चे-बच्चियों या लोगों को इसका लाभ मिलेगा, हालांकि इस योजना के हकदार वह तभी होंगे तब वह केंद्र अथवा राज्य सरकार की योजना के अंतर्गत कोई पेंशन प्राप्त नहीं कर रहा हो. जिला चिकित्सा पर्षद द्वारा निःशक्त प्रमाण पत्र निर्गत वाले लाभांवितों को इस योजना का लाभ मिलेगा. इसमें उसके माता-पिता या अभिभावक की आय आयकर की निर्धारित सीमा से अधिक नहीं हो. साथ ही केंद्र व राज्य सरकार, केन्द्र एवं राज्य सरकारों के उपक्रमों, केंद्र एवं राज्य सरकार से सहायता प्राप्त संस्थाओं का सेवा कर्मी नहीं हो. 
 
लाभांवितों के चयन के लिए प्रत्येक जिले के अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है. इस समिति में एसडीओ अध्यक्ष, वरीय कार्यपालक दंडािधकारी- संयोजक, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी अनुमंडल मुख्यालय व प्रभारी चिकित्सा अनुमंडलीय अस्पताल इसके सदस्य होते हैं. इस योजना के तहत लाभांवितों को छह सौ रुपये प्रति नि:शक्त व्यक्ति को प्रतिमाह की दर से भुगतान किया जाता है. इस राशि का भुगतान बैंक या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से किया जाता है, जबकि नाबालिग तथा मानसिक रूप से निःशक्त व्यक्तियों के लिए राशि का भुगतान उन्हें किया जाता है जिन पर वे आश्रित हैं. 
 
किशोरी शक्ति योजना
 
गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की अविवाहित तथा स्कूली शिक्षा छोड़ चुकी किशोरियों में आत्मविश्वास, उत्साह एवं आत्मगौरव की भावना को बढ़ाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है. इन किशोरियों को स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्रों में छह माह तक शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यकलापों में शामिल किया जाता है.
 
साथ ही किशोरियों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से सेविकाएं अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर किशोरियों को शारीरिक विकास और गतिविधियों की जानकारी भी देगी. इसके तहत चौसठ सौ रुपये प्रति वर्ष से भी कम आय वाले परिवारों की 11-15 वर्ष के आयु वर्ग की किशोरियों को इसमें शामिल किया गया है. इसके अलावा सभी आय स्तरों के परिवारों की 11-18 वर्ष के आयु वर्ग की छोटी बालिकाओं को भी प्राथमिकता दी गयी है. प्रशिक्षण शिविर में किशोरियों का खानपान, शारीरिक परिवर्तन की सही सोच, मासिक धर्म की व्यवस्था, सही उम्र में विवाह, एड्स से बचाव एवं स्थानीय उपलब्ध संतुलित आहार, आइरन टेबलेट के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी जाती है. 
दिव्यांगों के लिए छात्रवृत्ति योजना
 
सरकारी स्कूलों या कॉलेजों में पढ़ने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलता है. इसके तहत वर्ग एक से आठ तक के दिव्यांग विद्यार्थियों को 50 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जाती है. 
 
वर्ग नौ से स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को 250 रुपये प्रतिमाह और स्नातक से ऊपर स्नातकोतर छात्रों को 260 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जाती है. साथ ही सरकारी आवासीय विद्यालयों में पढ़नेवाले वर्ग एक से आठ तक विद्यार्थियों को एक सौ रुपये प्रतिमाह प्रतिछात्र छात्रवृत्ति भुगतान किया जाता है. इसके अलावा अगर किसी पंजीकृत गैर सरकारी संस्था द्वारा विशेष रूप से केवल दिव्यांगों के लिए किसी स्कूल का संचालन किया जा रहा हो, तो उसमें पढ़नेवाले नेत्रहीन, मूकबधिर, मंदबुद्धि एवं अन्य कारणों से दिव्यांग छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाता है. इस योजना के तहत दिव्यांगों को ट्रायसाइकिल या बैसाखी एवं कृत्रिम अंग-प्रत्यंग के माध्यम से हाथ व पैर का निर्माण कराकर वितरण भी किया जाता है.
 
विधवाओं के लिए भीमराव आवास योजना
 
राज्य की विधवाओं को समाज में समानता और सदभाव बनायें रखना तथा सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भीमराव आवास योजना की शुरुआत हुई. इस योजना के तहत वर्ष 2016-17के दौरान 11 हजार मकानों का निर्माण किया जाना है. राज्य सरकार विधवाओं को पहाड़ी क्षेत्रों में मकान बनाने के लिए 75 हजार रुपये और मैदानी क्षेत्रों के लिए 70 हजार रुपये निर्धारित की है. यह राशि लाभार्थी को उसके बैंक खातों में तीन किश्तों में दी जायेगी. इसके अलावा विधवाओं को पेंशन देने की भी राज्य सरकार ने व्यवस्था की है. इस योजना के अंतर्गत सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना 2011 के आंकड़ों के आधार पर लाभुकों का चयन के लिए प्राथमिकता दी जायेगी. 
 
चयन की प्रक्रिया
 
30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की आवासविहिन विधवा मुखिया वाला परिवार
 
30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की विधवा मुखिया वाला परिवार, जिनका एक कमरे का कच्चा आवास एवं मासिक आय पांच हजार रुपये से कम हो
जिलावार लक्ष्य
 
जिला आवास निर्माण की संख्या
दुमका  1062
साहिबगंज902
पाकुड़894
गोड्डा658 
गिरिडीह 607
रांची 508
पूर्वी सिंहभूम689
धनबाद 484
पलामू 482
हजारीबाग  478
बोकारो 464
चतरा 397
गुमला 389
जामताड़ा 379
पश्चिमी सिंहभूम 376
सरायकेला-खरसावां 360
गढ़वा 344
खूंटी 316
देवघर 299
लातेहार 260 
रामगढ़ 196
सिमडेगा 188
कोडरमा170
लोहरदगा 100
 
झारखंड कौशल विकास योजना
 
इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में बेरोजगार युवाओं का कौशल विकास के माध्यम से सशक्तिकरण करना तथा उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. झारखंड सरकार के श्रम नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के तहत इस योजना की शुरुआत हुई है. इस योजना के पहले चरण में सभी 24 जिलों के करीब चार हजार लाभुकों को प्रशिक्षण देना है. यह गैर आवासीय प्रशिक्षण होगा. प्रशिक्षण के बाद मूल्यांकन और उसके बाद प्रमाण पत्र दिये जाते हैं. राज्य में कौशल विकास की गुणवत्ता और संख्या बढ़ाने में यह योजना महत्वपूर्ण है. 
 
योजना के प्रमुख बिंदु
 
ऐसे युवाओं के लिए यह योजना है, जो किसी रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से जुड़े हुए ना हों
राज्य के 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था
ऐसे युवा, जो औपचारिक शिक्षा छोड़ चुके हों
हुनर पोर्टल के माध्यम से युवाओं का पंजीकरण होगा, यह आधार नंबर से जुड़ा होगा
हुनर पोर्टल में पंजीयन कराने पर एक विशेष पहचान संख्या मिलेगी
इसके तहत युवाओं को न्यूनतम दो सौ घंटे का प्रशिक्षण मिलेगा
हर प्रशिक्षु की न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है
 
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना
 
रा ज्य में गरीबी रेखा से नीचे निवास करने वाले व आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्ग यात्रियों को तीर्थ दर्शन कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत की है.
 
इस योजना के तहत सरकारी सहयोग से अधिक उम्र के निर्धन, पिछड़े एवं वरिष्ठ नागरिक को दो बार तीर्थ यात्रा कर सकेंगे. इसमें यात्रा के दौरान रहने एवं खाने की सुविधा नि:शुल्क होगी. एक बार राज्य में स्थित चयनित तीर्थ स्थलों तथा एक बार राज्य के बाहर के चयनित तीर्थ स्थलों की यात्रा में सरकार सहायता प्रदान करेगी. तीर्थ यात्रा योजना का एक बार लाभ उठाने के बाद दूसरी बार दो वर्ष के अवधि के बाद ही योजना का लाभ मिलेगा. विभिन्न जिलों के लिए तीर्थ यात्रियों की संख्या का निर्धारण विभाग द्वारा किया जायेगा. इसी के तहत 12 नवंबर 2016 को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बीपीएल परिवार के 60 वर्षों से अधिक उम्र के एक हजार श्रद्धालुओं को पुरी के लिए रवाना किया. झारखंड इस तरह की योजना शुरू करने वाला पहला राज्य बना. इस योजना में शामिल होने के लिए बुजुर्ग अपने जिले में आवेदन दे सकते हैं.
 
तेजस्विनी योजना
 
क मजोर तबके की किशोरियों व महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार ने 17 जिलों में तेजस्विनी योजना की शुरुआत की है. इस योजना के तहत परित्यक्ता और कमजोर वर्ग की किशोरियों को जोड़ा गया है, जिनकी आर्थिक स्थित ठीक नहीं है. ऐसी चिह्नित महिलाओं को आर्थिक सहयोग दिया जायेगा. उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जायेगा. यह योजना राज्य की 11 से 17 साल तक की किशोरियों एवं 24 साल तक की आयु की युवा महिलाओं के कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार प्राप्ति के लिए विश्व बैंक की मदद से शुरू हुई है.
 
राज्य के सात जिलों रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, गुमला, साहिबगंज और पश्चिम सिंहभूम में सबला योजना पहले से ही चल रही है, इन जिलों को छोड़ शेष 17 जिलों में तेजस्विनी योजना चलायी जा रही है. राज्य सरकार करीब साढ़े 32 लाख युवतियों को कौशल विकास और अनौपचारिक शिक्षा से जोड़ने के लिए इन 17 जिलों में इस योजना की शुरुआत की है. पहले चरण में जहां रामगढ़, चतरा, खूंटी और दुमका जिले को रखा गया है, वहीं दूसरे चरण में देवघर, पलामू, बोकारो, धनबाद व गोड्डा अौर तीसरे चरण में लातेहार, कोडरमा, जामताड़ा, लोहरदगा, सरायकेला- खरसावां, सिमडेगा, पाकुड़ और पूर्वी सिंहभूम जिले को जोड़ा जायेगा. इस योजना में अनुसूचित जाति और जनजाति बालिकाओं को मुख्य लक्ष्य रखा गया है.
 
िसदो-कान्हू आवास योजना
 
ग्रा मीण क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले सभी वर्ग के परिवारों के लिए पूर्णतः अनुदान पर आधारित िसदो कान्हू आवास योजना की शुरुआत राज्य सरकार ने की है. इस योजना के तहत प्रति आवास 45 हजार रुपये की मानक दर पर राशि उपलब्ध करायी जाती है तथा लाभार्थियों के द्वारा आवास निर्माण स्वयं कराया जाता है. जिला स्तर पर इस योजना का क्रियान्वयन जिला ग्रामीण विकास अभिकरण तथा प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा लाभार्थियों के माध्यम से कराया जाता है. लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा के द्वारा किया जाता है तथा लाभार्थियों के चयन में जन प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाता है.
 
चयन का आधार :
 
चयनित गांवों में परिवारों की संख्या 50 से कम न हो तथा इसकी जनसंख्या 200 से कम न हो
अनुसूचित जाति एवं जनजाति की संख्या 50 प्रतिशत से कम न हो
 
इंदिरा आवास/दीनदयाल या किसी भी प्रकार की सरकारी आवास योजना का लाभ लेने वाले को इसका लाभ नहीं मिलेगा
इस योजना के तहत आवासों का निर्माण इंदिरा आवास योजना की मार्गदर्शिका के अनुरूप ही होता है. इसमें न्यूतम राशि सफाई की व्यवस्था मुख्य है.
 
ग्रामीण युवाओं के लिए आर्या योजना
 
राज्य के ग्रामीण युवकों को कृषि की ओर आकर्षित करने के लिए राज्य को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत हुई. एट्रैक्टिंग रूरल यूथ इन एग्रीकल्चर यानी आर्या के तहत एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट तथा प्रशिक्षण (आत्मा) जैसी संस्थाओं के माध्यम से प्रत्येक गांव के युवकों को जोड़ा जायेगा. प्रशिक्षण के बाद युवकों से गांव में ही कृषि को बढ़ावा देने के लिए सेवा ली जायेगी. आर्या कार्यक्रम के तहत प्रत्येक गांव से दो युवकों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जायेगा. गांव की परती भूमि को चिह्नित कर उसे कृषि योग्य बनाने तथा किसानों को दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित भी किया जायेगा. 
 
इस याेजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को कृषि व उससे संबंधित क्षेत्र से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि पलायन करने वाले युवाओं को उनके ही गांव में कृषि आधारित रोजगार एवं नियमित आय मिल सके. इस दौरान युवाओं का एक नेटवर्क स्थापित होगा, ताकि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), विपणन (मार्केटिंग) एवं मूल्य संवर्द्धन (वेल्यू एडिशन) जैसे कार्यों को गति दी जा सके. इसके तहत महिलाओं को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया. इसके तहत कृषि क्षेत्र से करीब 65 हजार युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित है. वहीं करीब आठ से दस लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि तैयार की जायगी. साथ ही दलहन की खेती को बढ़ावा देते हुए साल में दो फसलों से किसानों में खुशहाली लाने की योजना है. 
 
परंपरागत कृषि विकास योजना
 
जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कलस्टर आधारित कार्यक्रम परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत हुई. इस योजना के तहत जैविक खेती शुरू करने के लिए 50 या उससे अिधक िकसानों का एक क्लस्टर बनायेंगे, जिनके पास 50 एकड़ भूमि हो. 
 
इस तरह तीन वर्षों के दौरान जैविक खेती के तहत 10 हजार क्लस्टर बनाये जायेंगे, जो पांच लाख एकड़ के क्षेत्र को कवर करेंगे. वहीं फसलों की पैदावार के लिए बीज खरीदने और उपज को बाजार में पहुंचाने के लिए हर किसान को तीन वर्षों में प्रति एकड़ 20 हजार रुपये दिये जायेंगे. इस योजना के तहत जैविक खेती को क्लस्टर पद्धति और पीजीएस प्रमाणीकरण द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है. साथ ही जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और कर-विक्रय को प्रोत्साहन करना है. इसमें किसानों को जैविक खेती के बारे में जागरूक किया जाता है. इस योजना को अपनाकर किसान पर्यावरण संतुलन को कायम रखते हुए कम लागत वाली कृषि तकनीकी अपना कर खेती कर सकते हैं. इसके अलावा कृषि को लाभकारी बनाते हुए कृषकों के आर्थिक स्तर में सुधार कर खेती को सम्मानजनक बनाना है.
 
मुख्यमंत्री जीवन आशा योजना
 
राज्य में अति कुपोषित बच्चों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री जीवन आशा योजना की शुरुआत हुई. इस योजना के तहत अति गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर, इन बच्चों को समुदाय स्तर पर चिकित्सा, पोषण एवं प्रशिक्षण देना है ताकि राज्य में बच्चों की मृत्यु दर घट सके. इसके पहले चरण में सभी जिलों में अति गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें निकटतम एमटीसी या एमटीइसी में भर्ती करा कर उपचार की व्यवस्था करना और कम कुपोिषत बच्चों को समुदाियक केंद्र पर उपचार करने की व्यवस्था की है. साथ ही बच्चे कुपोषित नहीं हो इसके संबंध में समुदाय के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाये. ग्राम स्तर से लेकर समुदाय स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था है.
 
इस योजना के तहत सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाना, तािक वो कुपोिषत बच्चों या बीमार बच्चे की पहचान कर सके.  इस कार्य के लिए आंगनबाड़ी सेविका की तरह सहिया को पोषण मित्र के रूप में प्रचारित भी किया जायेगा. इस योजना के तहत पंचायत प्रतिनिधियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की गयी है. इन प्रतिनिधियों का सहयोग प्रत्येक स्तर पर होगा, जिसकी शुरुआत राज्य स्तर से होगी, फिर जिला, प्रखंड, संकुल एवं पंचायत स्तर तक होगी.