aamukh katha

  • May 10 2017 12:46PM

पंथा में टीवी है पर स्वास्थ्य केंद्र व सड़क नहीं

पंथा में टीवी है पर स्वास्थ्य केंद्र व सड़क नहीं
कनक राज
सात गांवों के पांच हजार से अधिक आबादी वाला पंचायत है पंथा. गुमला जिले के बसिया प्रखंड स्थित है पंथा पंचायत. इस पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र तो बना, लेकिन गुणवत्तारहित. इसलिए ग्रामीणों ने उप स्वास्थ्य केंद्र को लेने से इनकार कर दिया है. बहरहाल, लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए पंथा पंचायत से सात किलोमीटर दूर लौवाकेरा गांव जाना पड़ता है. यहां पर भी उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत जर्जर है. खपड़ानुमा इस उप स्वास्थ्य केंद्र में संस्थागत प्रसव तो दूर, सर्दी-जुकाम के लिए भी इलाज की व्यवस्था नहीं है. उप स्वास्थ्य केंद्र के कंपाउंडर और पंथा पंचायत में कार्यकारिणी समिति के सदस्य संत कुमार भगत ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत एकदम खराब है. किराये के खपड़ानुमा केंद्र पर इलाज मुश्किल हो गया है. इस पंचायत के अंतर्गत पंथा, लोठवा, सोनमेर, सूरजपुर, लालपुर व तुरीबेरा गांव है.
 
नशा लील रही जिंदगी 
गांव में नशापान एक भयावह समस्या है. इससे निजात के लिए कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है. हड़िया और कच्ची शराब ने कई घरों को नुकसान पहुंचाया है. पंथा पंचायत के मुखिया बसंत गुड़िया ने बताया कि दो साल पहले नशापान की वजह से हमारे एक सदस्य की मौत हो गयी थी. इसके अलावा दो साल में करीब पांच से छह लोगों को नशापान की आदत ने लील लिया. सरकार की ओर से नशामुक्ति के लिए कोई ठोस पहल अभी तक नहीं हुई है. हालांकि, कुछ दिनों पहले यहां की महिलाओं ने नशामुक्ति के खिलाफ आवाज उठायी थीं, लेकिन बाद में यह अभियान मंद पड़ गया. अब महिलाएं ही शराब और हड़िया का व्यापार कर रही हैं. महिलाओं को यदि रोजगार की व्यवस्था की जाती, तो शायद इससे निबटा जा सकता था.
 
पंथा पंचायत की अच्छी बातें  
सात गांव की इस पंथा पंचायत में काफी कुछ काम हो रहा है. पंचायत सचिवालय में टेलीविजन लोगों के मनोरंजन का एक बड़ा साधन है. 14वें वित्त आयोग के फंड से मुखिया ने टीवी लगवाया है. यह अच्छी पहल है. जिस वजह से गांव के बुजुर्गों का यहां जमावड़ा रहता है. ग्रामीणों के लिए 100 से अधिक कुरसियां है और आधे दर्जन पंखे लगे हुए हैं. शौचालय और अन्य सुविधाएं भी हैं. प्रज्ञा केंद्र है. जेरोक्स मशीन है. सोलर लाइट है. और तो और, सभी चालित अवस्था में हैं. लोगों के ठहरने के लिए भी बेहतर इंतजाम हैं. सिर्फ नेट कनेक्टिविटी नहीं होने से इंटरनेट में थोड़ी परेशानी होती है. पंचायत को कंप्यूटर ऑपरेटर भी दिया गया है. पंचायत सचिवालय में ग्रामीणों की बैठकें भी होती हैं.

मनरेगा से हो रहा मोहभंग 
मुखिया बसंत गुड़िया ने बताया कि मनरेगा से ग्रामीणों का मोहभंग हो रहा है. पंथा पंचायत में 3000 जॉब कार्डधारी हैं, लेकिन करीब 300 लोग ही काम करते हैं. इसके पीछे कई कारण है. एक तो मनरेगा में हमेशा काम नहीं मिलता है. इसलिए मजदूर शहर चले जाते हैं. वहीं दूसरी ओर, मनरेगा में मजदूरी भी कम है. इस वजह से भी मजदूरों का मोहभंग हो गया है. जिन मजदूरों में काम करने की क्षमता व दक्षता है, वैसे लोग शहरों में ही काम करना पसंद करते हैं. एक और बड़ा कारण है कि अब फर्जीवाड़ा भी रुक गया है. इसलिए भी कई लोग ऐसे हैं, जो सिर्फ निकासी के लिए कार्ड तो बनाये थे, लेकिन अब मॉनिटरिंग कड़े होने के कारण इसमें भागीदारी नहीं करते हैं.
 
‘प्रदान’ बना रहा है आदर्श पंचायत 
पंथा पंचायत को आदर्श पंचायत बनाने का जिम्मा गैर सरकारी संस्था ‘प्रदान’ को मिला है. प्रदान बसिया प्रखंड क्षेत्र में करीब छह सालों से काम कर रही है. प्रदान को तीन जिलों की 15 पंचायतों को आदर्श बनाने का काम मिला है. गुमला जिले के बसिया, हजारीबाग के पदमा  व बरही और कोडरमा जिले के चंदवारा प्रखंड में शुरू किया गया है. प्रदान के स्टेट लीड गवर्नेंस प्रोग्राम कुमार संजय कुमार ने बताया कि नागरिक सहभागिता, पंचायत फैसिलिटेशन सेंटर, संस्था मैपिंग जैसे-स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, पेयजल, कृषि, पीडीएस, ग्रामसभा आदि को लेकर आदर्श पंचायत बनाने की कवायद शुरू की गयी है. इसके पहले बुनियादी और भौतिक आवश्यकता और समस्याओं पर जानकारी हासिल करते हैं. इसके बाद उसके निराकरण व समाधान पर ग्रामीणों के साथ मिल बैठ कर चर्चा करते हैं.
 
 
सड़क की हालत जर्जर
बसिया-गुमला मुख्य सड़क से पंथा पंचायत जानेवाली सड़क की हालत तो और भी खराब है. सड़क पर बड़े-बड़े रोड़े गति अवरोधक का काम करते हैं. चार पहिया गाड़ी से चलना तो दूर, बाइक भी चलाना दूभर है. सोनमेर गांव की महिलाओं ने बताया कि सड़क की हालत काफी खराब है. पंचायत में उप स्वास्थय केंद्र नहीं है. इससे सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवतियों को उस समय होती है, जब उन्हें प्रसव के लिए अस्तपाल ले जाना होता है. सड़क खराब होने से प्रसव पीड़ा के वक्त प्रसूता को समय पर अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होती है. सात किमी का सफर आधे घंटे में तय होता है. कई बार स्थिति गंभीर हो जाती है. इसके अलावा खराब सड़क पंचायत के विकास में बाधक है. बरसात के दिनों में सड़क पानी से भर जाता है. बारिश होने के बाद गांव का संपर्क मुख्य सड़क से लगभग कट-सा जाता है. ऑटो और दूसरे साधन भी कम ही हैं.