aamukh katha

  • May 10 2017 12:49PM

‘सर्ड’ में लगा चार दिवसीय 40 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण शिविर, महिला मुखिया को कराया शक्ति का एहसास

‘सर्ड’ में लगा चार दिवसीय 40 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण शिविर, महिला मुखिया को कराया शक्ति का एहसास
पंचायतनामा डेस्क
पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (सर्ड) में चार दिवसीय मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ. 17 से 20 अप्रैल तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में करीब 40 मास्टर ट्रेनर्स ने शिरकत की. इस अवसर पर केंद्रीय महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और केंद्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज के मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये झारखंड में ग्रामीण विकास का जायजा लिया. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने जहां महिला मुखियाओं को ग्रामीण विकास के गुरमंत्र सिखाये, वहीं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने महिला मुखिया को अपने अधिकार और शक्ति का एहसास कराया. प्रशिक्षण शिविर में पंचायती व्यवस्था के तहत योजनाओं के चयन से लेकर उसके क्रियान्वयन पर विस्तार से जानकारी दी गयी. साथ ही योजनाओं की गुणवत्ता और उसके जांच करने के तरीके के बारे में भी बताया गया. 
 
प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य 
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पाकुड़, चतरा और सिमडेगा जिले की पंचायतों की मुखिया और पंचायती राज संस्थान की ओर से चयनित वैसे 40 सक्षम लोगों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिन्हें गांव, पंचायत, प्रखंड और ग्रामीण विकास की बुनियादी समझ है. ये लोग गांवों-पंचायतों में जाकर अन्य मुखियाओं को प्रशिक्षित करेंगे. प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित महिला मुखियाओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह हर हाल में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारें. महिला मुखियाओं को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके गांवों में कौन-कौन-सी योजनाएं चल रही हैं. उसमें कितना पैसा आता है. पैसे को खर्च कैसे करना है. प्रशिक्षण शिविर में महिला मुखियाओं को कई उदाहरण देकर भी समझाया गया कि एक सड़क को बनवाने के लिए कितना पैसा आया है. उसमें तारकोल कितना डालना है. गिट्टी कितनी पड़नी है. नाली कैसे बनती है. शौचालय के लिए राशि कितनी है. उसका उपयोग हो रहा है या नहीं. गरीबों का घर कैसे बनेगा. तालाब, नलकूप, वाटर शेड कितना गहरा होना चाहिए. सीमेंट और बालू का अनुपात क्या होगा. सोलर एनर्जी सही जगह लग रही है या नहीं. कृषि विज्ञान केंद्र कहां है. मिट्टी की जांच कहां होगी और कैसे कराएंगे आदि. गांव में किसी लड़की को कोई बीमारी है और अगर उसके परिजन इलाज नहीं करा रहे हैं, तो इलाज की समुचित व्यवस्था कैसे करें. कोई गंभीर बीमारी है, तो कलक्टर से मिलकर उसका इलाज कैसे कराएं, इन सभी बातों की जानकारी दी गयी. 

गांव जायेगी टीम 
मास्टर ट्रेनर ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं इसकी जांच एक राज्य स्तरीय टीम करेगी. यदि काम संतोषप्रद नहीं हुआ, तो टीम को बाहर कर दिया जायेगा.
 
इनकी रही सहभागिता 
इस प्रशिक्षण शिविर में सर्ड की महानिदेशक मृदुला सिन्हा, पंचायती राज सचिव वंदना डाडेल, सर्ड की व्याख्याता जया रेचल मिंज, व्याख्याता प्रभाष दत्ता, प्रशिक्षण कार्यक्रम की नोडल ऑफिसर सह व्याख्याता गुंजन सिन्हा, नर्ड पंचायती राज संस्थान की प्रत्युषा पटनायक उपस्थित थे.
 
कुपोषणमुक्त पंचायत बनाने की कवायद : गुंजन
चतरा जिले की पहरा पंचायत की मुखिया हैं गुंजन कुमारी. गुंजन कहती हैं कि वह अपनी पंचायत में शौचालय निर्माण का काम पूरा करा चुकी हैं और इसीलिए पहरा पंचायत भी शौचमुक्त पंचायत की श्रेणी में आ गया. कुपोषण से मुक्त पंचायत के लिए जोर-शोर से काम हो रहा है. पंचायत में छह से 14 अप्रैल तक डिजिटल सप्ताह मनाया गया. गुंजन कहती हैं कि पंचायत के विकास में जहां प्रखंड विकास पदाधिकारी का भरपूर सहयोग मिलता है, वहीं प्रखंड के अन्य कर्मचारियों का सहयोग नहीं मिल पाता. मुखिया कहती हैं कि पंचायत सेवक, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति के सदस्यों की भी जिम्मेदारी और जवाबदेही बनती है कि गांव और पंचायत के विकास में काम करें. लेकिन, सारा काम मुखिया पर ही छोड़ दिया जाता है. यह गलत है. 

पंचायत का विकास करना पहली प्राथमिकता: चंदन
मुखिया चंदन कुमारी कहती हैं कि खुले में शौचमुक्त होने से काफी फायदा हुआ है. पहले गांव के पुरुष शौचालय के लिए खेतों में तो चले जाते थे, लेकिन महिलाओं व लड़कियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी. शौचालय निर्माण ने एक साथ कई समस्याओं का समाधान किया है. चंदन कहती हैं कि अपने पंचायत का विकास करना उनका मुख्य उद्देश्य है. कहती हैं कि जिस उद्देश्य से ग्रामीणों ने उन्हें जिम्मेवारी सौंपी है, उसका निर्वहन करना उनकी पहली प्राथमिकता है. 
 
सुरक्षा के भी सिखे गुर
महिला मुखियाओं ने प्रशिक्षण शिविर के दौरान सुरक्षा के भी गुर सिखें. अगर गांव में लड़कियों व महिलाओं के साथ कोई बदमाश बुरा बर्ताव करता है, तो उससे कैसे निबटें. थाने को कैसे सूचना दें. किसी महिला को उसका पति पीट रहा है, तो उससे कैसे निबटें, इन सबके लिए महिला जनप्रतिनिधि खुद को हमेशा तैयार रखें, ताकि गांव में महिलाएं सुरक्षित महसूस करें. मानव तस्करी पर भी रोकथाम के लिए महिला मुखियाओं को विशेष निगरानी रखने पर जोर दिया गया. 
 
पावर में है गांव की सरकार : मेनका गांधी
केंद्रीय महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि अब जरूरत है कि महिला मुखिया अपने-अपने क्षेत्रों के विकास के प्रति काफी गंभीर हों. आपके स्कूल में अगर समय पर शिक्षक नहीं आते, तो आप जरूर जानकारी लें. ऐसा करने से उक्त शिक्षक को पता चलेगा कि कोई हमारी निगरानी कर रहा है. इसके अलावा साफ-सफाई और गांवों में शौचालय निर्माण की गति और उसकी उपयोगिता अौर विकास योजनाओं पर विशेष ध्यान रखें, तभी आपकी पंचायत मजबूत हो पायेगी और इसके सहारे आप ग्रामीणों को मजबूत कर पायेंगे. मेनका गांधी कहती हैं कि अगर महिलाओं ने घर से बाहर कदम बढ़ा दिया है, तो उस कदम को विकास की ओर बढ़ाना अब जरूरी हो गया है. हमें ग्राउंड लेवल पर गांवों का विकास चाहिए, क्योंकि गांव की सरकार अब पावर में है. उन्होंने कहा कि 40 साल पहले महिला मुखिया को जो ताकत दी गयी थी, उसे अब दोगुना कर दिया गया है. महिला पंचायत प्रतिनिधियों के साथ एक समस्या यह है कि वे अनपढ़ हैं. घूंघट में हैं. चुनाव के वक्त मर्दों के दम पर मैदान तो जीत जाती हैं, लेकिन फिर से घूंघट में चली जाती हैं. उन्हें पता ही नहीं होता है कि क्या हो रहा है. कौन-सी योजनाएं हैं. 
 
महिलाओं की सहभागिता जरूरी : नरेंद्र सिंह तोमर
केंद्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज के मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि देशभर में 13 लाख से अधिक बहनें पंचायती राज व्यवस्था में चुन कर आयी हैं. जब तक देश की आधी आबादी का योगदान पंचायती राज को नहीं मिलेगा, तब तक सही मायने में विकास नहीं होगा. इसलिए महिलाएं अपना पूरा योगदान दें. आज कल बच्चों में दिल की बीमारी बढ़ रही है. बच्चे दिल में छेद की बीमारी से ग्रसित हैं. वैसे बच्चों की पहचान कर उन्हें डीएम से सहायता दिलाएं. सिर्फ नाली और सड़क से पंचायतों का विकास नहीं होगा, बल्कि गांवों में सामाजिक परिवर्तन लाना होगा. डिजिटल क्रांति के लिए ज्यादा-से-ज्यादा काम होना चाहिए. पंचायतों में स्वच्छता अभियान चले और तमाम तरह के सामाजिक उत्थान के काम भी होने चाहिए. पौधे लगाने और कुपोषण दूर करने की दिशा में भी काम होना चाहिए. शौचालय बने, तो उसकी उपयोगिता सुनिश्चित हो. टीकाकरण के काम हों. बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाये.
 
इन बातों का महिला मुखिया जरूर रखें ध्यान
चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न बातों की भी जानकारी दी गयी. इसके तहत मनरेगा के कार्यों की पड़ताल अब सेटेलाइट के जरिये होगी. कुआं, नलकूप का स्टेटस क्या है, यह अब सेटेलाइट बतायेगा. मनरेगा अकाउंट की भी जानकारी रखें. मनरेगा में कितना खर्च हुआ, कहां से मिट्टी आयी और कौन-कौन-से मजदूरों ने काम किया. इन सभी बातों की भी जानकारी जरूरी है. गांव में आवास किसको चाहिए. बीपीएल सूची सहित अन्य तरह की सूची तैयार करें. कागजी तौर पर खुद भी तैयार रखें और उसे भौतिकता में उतारें. पंचायती राज ‌विभाग महिला मुखियाओं का वॉट्सअप ग्रुप बनाये और जो पंचायत बेहतर कार्य कर रहा है, उसकी जानकारी दें, ताकि दूसरी पंचायत के लोग भी उससे सीख सकें. ज्यादातर बच्चों में विटामिन-सी की कमी पायी जाती है. इसलिए गांव में अधिक-से-अधिक फलदार पौधे लगाएं. एक मुखिया यह तय करे कि वह 500 फलदार पौधे लगायेगा और उसकी देखभाल करेगा.