aamukh katha

  • Aug 7 2017 12:44PM

अब जाकर गांव को मिली बिजली की रोशनी

अब जाकर गांव को  मिली बिजली की रोशनी
पंचायत : बरवादाग
प्रखंड : अनगड़ा
जिला : रांची

रांची जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर खूबसूरत वादियों और पहाड़ियों के बीच बसा है अनगड़ा प्रखंड का बरवादाग पंचायत. अनगड़ा प्रखंड की अपनी पहचान है. प्रकृति ने इस प्रखंड को खूबसूरती से नवाजा है. बरवादाग पंचायत के गांव भी इन्हीं खूबसूरत वादियों का हिस्सा है. घने जंगलों से परिपूर्ण इस पंचायत के अंतर्गत सात राजस्व गांव हैं, जिसमें मुसंगू, काशीडीह, डुमरगढ़ी, आसरी, सीताडीह, बरावादाग और पहाड़सिंह है. भौगोलिक दृष्टि से देखें, तो पूरा इलाका पहाड़ी है. यहां गांव दूर-दूर में बसे हैं. इस कारण सभी गांवों को विकास की दौड़ में एक साथ शामिल करने में मुश्किलें आ रही हैं. आदिवासी बहुल इस इलाके में कई समस्याएं हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे तसवीर बदल रही है.

मूलभूत सुविधाओं में आया बदलाव
पांच हजार की आबादी वाले इस पंचायत में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. आबादी का फैलाव भी सही तरीके से नहीं हुआ है. हर एक घर तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पायी है. पहाड़ी इलाका होने के बावजूद पीने के लिए स्वच्छ पानी का घोर अभाव है. बिजली की स्थिति भी कमोबेश ऐसे ही थी, लेकिन वर्तमान मुखिया सीताराम पातर और ग्रामीणों के सहयोग से पंचायत के कई इलाकों में बिजली पहुंची. पंचायत क्षेत्र के हापरदाग, मुर्गीडीह, चीतीडीह व सुकुड़ूबांध में आजादी के बाद से बिजली नहीं पहुंची थी, लेकिन अब उन गांवों में बिजली पहुंच गयी है. इसके अलावा भसंगू, काशीडीह, डुमरगढ़ी, आसरी, सीताडीह, बरावादाग और पहाड़सिंह गांव में बिजली पहुंची है. हालांकि बनटोली, बलांग, सीमागिरी, बिरहोर टोली, सरइबोन, गंझूटोली और जोबला में बिजली अब तक नहीं पहुंच पायी है. वहीं बेलटोली, आसरी, आमटोली और डुमरगढ़ी में बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है. पंचायत के गांवों में चापाकल तो लगे हैं, लेकिन कई खराब पड़े हैं. बनटोली निवासी सुरेश सिंह मुंडा कहते हैं कि बनटोली पहाड़ी पर बसा हुआ टोला है, जिसके चलते पानी के लिए परेशानी होती है. सड़कों की बात करें, तो सात पीसीसी पथ पहाड़सिंह, बरवादाग ऊपरटोली, आराहंगा टोली, आसरी, मुसंगो और काशीडीह में बनाये गये हैं. वहीं बरवाडीह और डुमरगढ़ा खास में पथ निर्माण कार्य चल रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब 91 लाभुकों को आवास के लिए स्वीकृत मिली है, इसमें 88 लाभुकों का अावास निर्माण जारी है. 

कृषि और सिंचाई के साधन
बरवादाग पंचायत का अधिकतर क्षेत्र वनों से ढका हुआ है. सात गांव के ग्रामीण आजीविका के लिए मुख्य रूप से खेती और जंगलों पर निर्भर करते हैं. यहां के ग्रामीण सिंचाई के लिए आज भी पारंपरिक तरीकों पर ही निर्भर हैं. भौगोलिक स्थिति के कारण भी यह परेशानी होती है. मुखिया की माने, तो सिंचाई के लिए 14वें वित्त आयोग की राशि से डाड़ी और कुआं का निर्माण किया गया है, लेकिन वो नाकाफी है. खेती-बारी के लिए किसान बरसात के पानी पर ही निर्भर हैं. सिंचाई और कृषि में कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला है. हां, इतना जरूर है कि जंगलों में लाह उत्पादन से भी इलाके की तसवीर बदली जा सकती है, लेकिन ऐसा प्रयोग अभी तक नहीं हुआ है. 
 
शौचालय निर्माण और साफ-सफाई
बरवादाग ओडीएफ पंचायत बनने की दिशा में अग्रसर है. अब तक लगभग 90 फीसदी शौचालयों का निर्माण हो चुका है. मुखिया भी मानते हैं कि शौचालय निर्माण के प्रति लोग जागरूक हुए हैं. इलाके में साफ-सफाई सिर्फ 50 फीसदी ही हो पायी है. जागरूकता अभियान चला कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है.
 
शिक्षा और स्वास्थ्य
पंचायत में शिक्षा और स्वास्थ्य की हालत की अगर बात करें, तो इलाके में इन दोनों ही सुविधाओं का घोर अभाव है. पूरे पंचायत में एक भी हाइस्कूल नहीं है. प्राथमिक स्कूलों की हालत भी बहुत जर्जर है. सभी स्कूल भवन पुराने हो चुके हैं. शिक्षकों का भी अभाव है. पढ़ाई के लिए बच्चों को कई किलाेमीटर दूर तक का सफर तय करना पड़ता है. हाइस्कूल नहीं होने के कारण कई बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं और प्राथमिक स्तर के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं. बच्चों को पढ़ने के लिए रेलवे लाइन पार करना पड़ता है. स्वास्थ्य की बात करें, तो पूरे पंचायत में एक भी उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. इलाज के लिए जोन्हा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जो नाकाफी है.  

पंचायत जनप्रतिनिधियों की नजर में बदलाव
पंचायत में बदलाव की हुई शुरुआत : सीताराम पातर
बरवादाग पंचायत के मुखिया सीताराम पातर कहते हैं कि अपने पंचायत क्षेत्र में जितना विकास होना चाहिए था, उतना नहीं हुआ है. इसका उन्हें भी मलाल है. शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी सुविधाओं को इलाके में बहाल करना होगा, तभी जाकर पंचायत क्षेत्र में बदलाव नजर आयेगा. हां, इतना जरूर है कि बदलाव की शुरुआत इस पंचायत क्षेत्र में हो चुकी है.
 
पलायन क्षेत्र की एक बड़ी समस्या : बुधराम बेदिया
पंचायत के पूर्व पार्षद बुधराम बेदिया बताते हैं कि पलायन इस पंचायत  में एक बड़ी समस्या है. वन क्षेत्र होने के कारण ज्यादातर आबादी वनों पर निर्भर है. वन उत्पाद जैसे दातुन, पत्ता और जंगली फलों को बेच कर यहां के लोग जीवन यापन करते हैं. बहुत ऐसे लोग हैं, जिन्हें लाल कार्ड और पीला कार्ड की सुविधाएं भी नहीं मिल पायी है.