aamukh katha

  • Aug 7 2017 1:01PM

कौन कहता है पंचायतों में नहीं हो रहा बदलाव

राज्य में पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने का उद्देश्य गांव व पंचायतों में विकास योजनाओं को सही रूप में उतारना है. जब तक गांव के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाएं नहीं पहुंचेगी, तब तक गांवों व पंचायतों में विकास नहीं दिखेगा. इसके लिए अधिकारियों के साथ-साथ पंचायत जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण होती है. राज्य के कई पंचायत जनप्रतिनिधि ऐसे मिले, जिसने अपने पंचायत की दशा और दिशा दोनों बदल दी. कल तक गांव व पंचायतों में गंदगी का अंबार दिखता था, अब वहां सुव्यवस्थित तरीके से नालियां बनी है, सड़कें बनी और क्षेत्र साफ-सुथरा दिखने लगा है. इसके अलावा कई जनप्रतिनिधियों ने अपने ही गांव व पंचायत में रोजगार के उपाय ढूंढ निकाले हैं. हालांकि, आज भी कई ऐसे पंचायत हैं, जहां विकास की रफ्तार तेज करने की जरूरत है. आमुख कथा के इस अंक में राज्य के पंचायतों का हाल दिखाने की कोशिश की गयी है, ताकि धीमी रफ्तार पकड़े अन्य पंचायतों में भी विकास की रफ्तार तेज हो सके. पंचायतों के बदलाव और जरूरतों पर पढ़िए समीर रंजन और पवन कुमार का यह अालेख.
 
मंगरोडीह के शौचालय में लगे हैं थ्री-डी टाइल्स
गि रिडीह जिला के मंगरोडीह पंचायत शहर से नजदीक की पंचायत है. पंचायत में दो गांव हैं, मंगरोडीह और झरियागादी. पंचायत की कुल आबादी आठ से दस हजार की है और वार्ड 12 है. मंगरोडीह पंचायत में बदलाव दिख रहा है. गांव के लोग कुछ हद तक खुशहाल दिख रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में जो सुविधाएं उन्हें मिलनी चाहिए, वो सुविधा गांव के लोगों को मिल रही है. गांव में विकास कार्य हो रहा है और लोगों को इसका लाभ भी मिल रहा है. सबसे बड़ी बात इस पंचायत का चयन श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत किया गया है, जिसके कारण ग्रामीणों में एक और उम्मीद बढ़ी है. एक नयी आशा की किरण जगी है कि जल्द ही उनके गांव का विकास होगा. सारी सुविधाएं मिलेगी. जल्द ही उनके गांव को एक पहचान मिलेगी. विकास की दौड़ में वो भी शामिल हो जायेंगे. 
 
स्वच्छ भारत मिशन का असर
पंचायत के दोनों गांवों में स्वच्छ भारत मिशन की झलक आपको साफ देखने को मिल जायेगी. दोनों गांवों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है. इस काम में ग्रामीणों का भी काफी सहयोग देखने को मिलता है. समय-समय पर स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए पूरे पंचायत में जागरूकता अभियान चलाया जाता है. यही वजह है कि स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है. ग्रामीणों को बताया जाता है कि गंदगी से किस प्रकार की बीमारियां होती है. ग्रामीणों को गंदगी से दूर रहने के लिए कहा जाता है. नाली का निर्माण भी कराया गया है, ताकि गंदे और दूषित पानी सड़कों पर नहीं बहे. 
 
ओडीएफ पंचायत की ओर बढ़ते कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुले में शौच से मुक्त करने की मुहिम को मंगरोडीह पंचायत की जनता ने गंभीरता से लिया है. ग्रामीण इस पंचायत को खुले में शौच मुक्त पंचायत बनाने की ओर लगातार अग्रसर हैं. पंचायत के दोनों ही गांवों में शौचालय बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है. मंगरोडीह पंचायत के मुखिया कृष्ण लाल ठाकुर भी इस कार्य में लगे हुए हैं. ग्रामीणों को समझाते हैं कि शौचालय निर्माण को लेकर सरकार की ओर से 12 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर दी जा रही है. सभी ग्रामीण खुद से भी पैसा जमा करके अच्छा और मजबूत शौचालय बनवा रहे हैं. मुखिया कहते हैं कि जिन लोगों के पास शौचालय बनाने के पैसे नहीं हैं, वो उनलोगों को आर्थिक मदद भी कर रहे हैं. सबसे बड़ी बात है कि इस पंचायत के गांवों में शौचालय निर्माण की बनावट जो चर्चा का विषय बना हुआ है, सभी शौचालय मजबूत और टिकाऊ हो, इसका खास ख्याल रखा गया है. सभी शौचालयों की छत पक्की और थ्री-डी टाइल्स-मार्बल लगा कर खूबसूरत बनाया जा रहा है. इससे लोगों में शौचालय निर्माण को लेकर जिज्ञासा बढ़ी है. 
 
पानी और बिजली की सुविधा
मंगरोडीह पंचायत का चयन श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन के तहत हुआ है. इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को कौशल विकास से जोड़ कर रोजगार के साधन मुहैया कराये जायेंगे. इसके तहत मंगरोडीह पंचायत का विकास हो रहा है. पेयजलापूर्ति को लेकर डीपीआर तैयार किया गया है. गुणवत्तापूर्ण सड़कों का निर्माण पूरे पंचायत में होगा व आधारभूत संरचना विकसित की जायेगी. वर्तमान में पीने के पानी के लिए लोग पारंपरिक संसाधनों पर ही निर्भर हैं.
 
शिक्षा और स्वास्थ्य
लगभग 10 हजार की आबादी वाले मंगरोडीह पंचायत में एक भी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. हालांकि पंचायत के मुखिया कृष्ण लाल ठाकुर बताते हैं कि शहर गांव के नजदीक है और जिला सदर अस्पताल पास में है, तो ग्रामीणों को स्वास्थ्य को लेकर कोई परेशानी नहीं होती है.
 
और काम करने की जरूरत
पंचायत क्षेत्र में काम हुआ है, लेकिन जितना काम होना चाहिए था, उतना नहीं हो पा रहा है. पूर्णरूपेण शौचालय निर्माण को लेकर जल्द ही पंचायत को ओडीएफ घोषित किया जायेगा. जल संरक्षण को लेकर पंचायत क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया गया. इसका नतीजा भी देखने को मिल रहा है. लोग अपने घरों में वाटर हार्वेस्टिंग लगाने पर भी जोर दे रहे हैं. 
कृष्ण लाल ठाकुर, मुखिया
 
 
 
पंचायत मंगरोडीह
प्रखंड गिरिडीह 
जिला गिरिडीह
 
 
कृषि से बदली इलाके की तसवीर
साल 2015 झारखंड में पड़े सुखाड़ और हलकान होती किसानों की स्थिति के उलट बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड अंतर्गत बुंडू पंचायत में इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला. कारण है यहां के किसान खेती को लेकर जागरूक और आत्मनिर्भर हो चुके थे. और, यह सब हुआ है बुंडू पंचायत के मुखिया अजय कुमार के अथक प्रयास से. उस समय भी धान की फसल के उत्पादन में कोई कमी नहीं आयी थी. बुंडू पंचायत में पिछले तीन वर्षों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए. इनमें दो काफी महत्व रखते हैं. एक कृषि के क्षेत्र में और दूसरा शिक्षा के क्षेत्र में. मुखिया अजय कुमार बताते हैं कि साल 2010 में जब पहली बार मुखिया चुन कर आये, तो इलाके में कई समस्याएं थी. किसान मेहनती थे, लेकिन किसानों में खेती-किसानी को लेकर जानकारी का अभाव था. कृषि करने के लिए संसाधन मौजूद नहीं थे. सिंचाई के साधनों का अभाव था. मवेशी भी खुले में छोड़ दिये जाते थे. इन्हीं समस्याओं को प्राथमिकता मानते हुए मुखिया अजय कुमार ने ग्रामीणों से मुलाकात करना शुरू किया. उनसे उनकी समस्याएं पूछी जाने लगी. रात्रि चौपाल के माध्यम से किसानों से जुड़ कर उनकी समस्याओं को जाना और समाधान के बारे में भी किसानों और ग्रामीणों से बातचीत की. पहले किसान सिर्फ धान की खेती करते थे, लेकिन सिंचाई के साधन उपलब्ध होने और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसान सब्जियों का भी उत्पादन करने लगे. सब्जी उत्पादन के बाद बाजार का नहीं होना भी एक बड़ी समस्या थी. मुखिया अजय कुमार ने पहल करते हुए व्यापारियों से मुलाकात की और पेटरवार के गागी हाट में आने का निमंत्रण दिया. धीरे-धीरे किसान और व्यापारियों का हौसला बढ़ा. साल 2010 से 2014 के बीच जहां बाजार में 10 से 15 हजार रुपये की खरीद-बिक्री होती थी, वहीं साल 2014 में एक से डेढ़ लाख तक की खरीद-बिक्री प्रतिदिन शुरू हो गयी. आज यह बाजार किसानों के लिए वरदान साबित हो 
रहा है. अजय अब यह उम्मीद जता रहे हैं कि आनेवाले दिनों में बुंडू पंचायत की पहचान कृषि के लिए होगी और इस बाजार में प्रतिदिन 10 लाख रुपये का कारोबार होगा. भविष्य में बुंडू का कृषि उद्योग का पूर्ण रूप प्राप्त करेगा और किसान उद्योगपति कहलायेंगे.   q

पंचायत : बुंडू
प्रखंड : पेटरवार
जिला : बोकारो