aamukh katha

  • Sep 13 2017 1:19PM

आपकी मुट्ठी में है बीमारियों का इलाज

आपकी मुट्ठी में है बीमारियों का इलाज
मौसमी बीमारी की चपेट में कोई भी आ सकता है. छोटी-छोटी बातों की अनदेखी बीमारियों को दावत दे सकती है. अगर आप थोड़ी सावधानी बरतें, तो आप कई बीमारियों खासकर मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं. मौसम के बदलाव के साथ हमारे शरीर पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. बरसात के मौसम में अधिक नमी होने के कारण कई तरह के बैक्टीरिया और मच्छर पनपते हैं. मच्छरों से होनेवाली बीमारियों का समय पर इलाज ना हो, तो ये जानलेवा साबित हो सकती है. आज भी अधिकतर लोग समझते हैं कि इस मौसम में मच्छर के काटने से सिर्फ मलेरिया या डेंगू जैसी बीमारियां होती हैं, जबकि कई और बीमारी भी मच्छरों के काटने से होती है. अगर थोड़ी-सी सावधानी बरती जाये तो आप इन बीमारियों से बच सकते हैं. बस जरूरत है थोड़ी-बहुत सावधानी बरतने की, ताकि आप निरोग रह सके. आमुख कथा के इस अंक में बदलते मौसम में होनेवाली बीमारी, उसके लक्षण और बचाव के बारे में बताया गया है, ताकि आप सावधानी बरत कर निरोग रह सके. पढ़िए समीर रंजन का यह आलेख.
 

मलेरिया
मलेरिया का मच्छर अधिकतर ठहरे हुए पानी में पनपता है. इसलिए आपको चाहिए कि आप अपने आसपास पानी का जमाव नहीं होने दें. मादा एनाफिलीज के काटने पर संक्रमित व्यक्ति के खून में इसके रोगाणु फैल जाते हैं. 
 
उपचार
मलेरिया के उपचार के लिए 10 ग्राम तुलसी के पत्ते और सात-आठ मिर्च को पानी में पीस कर सुबह और शा‍म लेने से बुखार ठीक हो जाता है. इसमें आप शहद भी मिला सकते हैं 
 
थोड़ी-सी अदरक व किशमिश पानी में डाल कर उबालें. जब तक पानी आधा नहीं रह जाता इसे उबालते रहें. थोड़ा ठंडा होने पर इसे दिन में दो बार लें. इसके अलावा हरसिंगार के पत्ते का सेवन अदरक के रस के साथ शक्कर मिला कर किया जाये, तो मलेरिया में लाभ होता है
नीम के हरे पत्ते और चार काली मिर्च एक साथ पीस लें. फिर इसे थोड़े से पानी में मिला कर उबाल लें. इस पानी को छान कर पीने से लाभ होता है. इसके अलावा नीम तेल में नारियल या सरसों का तेल मिला कर शरीर पर मालिश करने से भी मच्छरों के कारण उत्पन्न मलेरिया का बुखार उतर जाता है.
 
गिलोय के काढ़े या रस में शहद मिला कर 40 से 70 मिलीलीटर की मात्रा में नियमित सेवन करे. 40 ग्राम गिलोय को कूचकर मिट्टी के बर्तन में पानी मिला कर रात भर ढंक कर रख दें. सुबह इसे मसल कर छानें और 80 ग्राम की मात्रा में दिन में तीन बार पीने से बुखार दूर हो जाता है
किसी को मलेरिया हो जाये, तो उसे रोज दिन में तीन बार अमरूद अवश्य खिलाये. अमरूद के मुकाबले इसके छिलके में विटामिन-सी बहुत अधिक होता है. इसलिए अमरूद को छिलका हटा कर कभी न खायें
 
लक्षण
मच्छर के काटने के 10वें दिन से शुरू होकर चार सप्ताह तक बने रहते हैं. इसकी चपेट में आने पर रोगी को बुखार, कंपकंपी, खांसी-जुकाम, भूख ना लगना, उल्टियां आना, पेट में दर्द होना, हाइपोथर्मिया और तेज सांस चलने जैसे लक्षण नजर आते हैं. बुखार आना मलेरिया का मुख्य लक्षण माना जाता है. 
 
बचाव
  • मलेरिया बुखार के लक्षण अगर आपके शरीर में नजर आने लगे, तो अपने नजदीकी डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें और ब्लड टेस्ट करवायें
  • रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें
  • अपने घरों की खिड़कियों व दरवाजों में मच्छरप्रूफ जालियां लगवायें
  • नारियल व सरसो तेल में नीम का तेल मिला कर या मच्छर को भगानेवाली क्रीम शरीर के खुले हिस्सों पर लगायें
  • शाम को नीम की पत्तियों का धुअां करें
  • मच्छर अगरबत्ती का उपयोग करें
  • शरीर पर कपड़ा ऐसा पहने, जिससे पूरा शरीर ढंका रहे
 
खतरा
  • ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर हैंडपंप व नाले के आसपास रूका हुआ पानी 
  • वैसे कुएं जिसका उपयोग नहीं हो रहा हो
  • नहरों का रूका हुआ पानी
  • छत पर रखी पानी की खुली टंकियां
  • बेकार फेंके हुए टायर में जमा पानी 
  • कूलर व किचन गार्डेन में जमा पानी
  • पशुओं के पानी पीने के टंकी
  • बारिश में पेड़ों के खोखले और छेद में जमा पानी
  • सजावट के लिए बने फव्वारे, गमले व फूलदान, टूटे बर्तन, मटके, बिना ढंके बर्तन और
  • ऐसी हर जगह, जहां पर पानी ठहरा हुआ होता है, वहां मच्छरों के पैदा होने की पूरी संभावना होती है.
 
डेंगू
बरसात होते ही डेंगू के मच्छर भी पनपते लगते हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है इन मच्छरों से अपने आपको बचाना. डेंगू बुखार एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है, जो साफ पानी में पनपता है. यह मच्छर माॅनसून के पानी से पनपता है. इसका एक संक्रमित मच्छर सैकड़ों लोगों को बीमार कर सकता है. अपने घरों के आसपास या घर में पानी बिल्कुल ही रूकने न दें. टूटे बर्तन या पुराने टायर वगैरह नष्ट कर देने चाहिए, ताकि उनमें पानी ना रुक सके. हफ्ते में एक दिन कूलरों का पानी बदल कर उसे सुखा दें. डेंगू फैलानेवाले मच्छर दिन के समय काटते हैं और रूके साफ पानी पर पैदा होते हैं. इसलिए मच्छर भगाने का उपाय दिन में भी करें.
 
 
सेवन
  • मसालेदार चटपटी चीजों का परहेज करते हुए सादा भोजन खायें, जिसमें नमक स्वाद से अधिक न हो
  • अनार, ज्वार और गेहूं के घास का रस पीयें
  • ताजा मौसमी फलों का सेवन करें
  • नारियल पानी और साफ पानी अधिक-से-अधिक पीयें
  • नींबू, संतरे, मौसंबी, अंगूर, स्ट्राॅबेरी और जामुन में पर्याप्त मात्रा में िवटािमन सी पाया जाता है. इस कारण इसका अधिक-से-अधिक सेवन करें
  • पपीते की तरह गिलोय की बेल का सत्व भी शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या नियमित रखने में सहायक होता है
 
 
लक्षण
डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में अधिक दर्द होना, सिरदर्द, उल्टी, दस्त, त्वचा पर लाल रंग का दाना होना, प्लेटलेट्स की संख्या कम होने पर रोगियों के नाक, कान और मुंह से खून आने के अलावा ब्लड प्रेशर कम होना भी इस बीमारी की गंभीरता की ओर संकेत देता है. रोगियों में इस बीमारी का लक्षण दिखते ही तत्काल डॉक्टरों को दिखायें. डेंगू की गंभीरता बढ़ने पर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है. डेंगू के लक्षण तीन से 14 दिन बाद दिखने लगते हैं.
 
बचाव
 
डेंगू से बचने के लिए आप किसी जगह पानी को एकत्रित होने नहीं दें और पूरे शरीर को ढंक कर रखें. रोग ग्रसित मरीज का तुरंत उपचार शुरू करें. तेज बुखार की स्थिति में पारासिटामाॅल की गोली दें. खुली हवा में मरीज को रहने दें.  पर्याप्त मात्रा में भोजन व पानी दें, जिससे मरीज को कमजोरी न लगे. फ्लू हवा में फैलता है. इसलिए मरीज से 10 फुट की दूरी बनाये रखें, तो फैलने का खतरा कम रहता है. जहां बीमारी अधिक मात्रा में हो, वहां फेस मॉस्क पहनना चाहिए.
 
 
उपाय
 
  • धनिया पत्ती के जूस को टॉनिक के रूप में सेवन करने से बुखार कम होता है 
  • तुलसी के पत्तों को गरम पानी में उबाल कर छान ले और फिर उसे रोगी को पीने को दें. तुलसी की यह चाय डेंगू रोगी को बेहद आराम पहुंचाती है. दिनभर में तीन से चार बार इसका सेवन करें
  • बकरी का कच्चा दूध थोड़ा-थोड़ा करके रोगी को पिलायें, इससे प्लेटलेट‍्स की संख्या में बढोतरी होगी और जोड़ों के दर्द में भी आराम मिलेगा
  • चिरायता के सेवन से बुखार ठीक होने लगेंगे 
  • पपीते की पत्तियों का जूस निकाल कर एक-एक चम्मच करके रोगी को दें. इस जूस से प्लेटलेटस की मात्रा तेजी से बढ़ती है
  • मेथी के पत्तों को पानी में उबाल कर हर्बल चाय के रूप में इसका उपयोग करने से डेंगू के वायरस खत्म होने लगेंगे
 
चिकनगुनिया
डेंगू की तरह चिकनगुनिया भी एक खतरनाक मच्छर जनित बीमारी है. चिकनगुनिया संक्रमित एडीस अल्बोफिक्टस मच्छरों के काटने से फैलता है. इस तरह के मच्छर रुके हुए पानी में अधिक पनपते हैं और दिन में काटते हैं. 
 
चिकनगुनिया व डेंगू
 
चिकनगुनिया में हाथ और पैर के जोड़ों में अधिक दर्द होता है. ज्वाइंट जकड़ जाते हैं. सूजन आती है और सुबह दर्द ज्यादा होता है. जबकि, डेंगू में पूरे शरीर में दर्द होता है. खासकर पीठ, हाथ और पैर की मांसपेशियों में अधिक दर्द होता है. घुटने और कंधे के जोड़ों में दर्द होता है. चिकनगुनिया में एक दिन छोड़ कर बुखार हो सकता है, वहीं डेंगू में लगातार बुखार बना रहता है. चिकनगुनिया में रैशेज चेहरे, छाती, पेट, हाथ, पैर, हथेली और तालुओं में हो सकते हैं, जबकि डेंगू में रैशेज अधिकतर हाथ, पैर और चेहरे तक ही सीमित होते हैं. चिकनगुनिया से ज्यादा खतरा नहीं होता है. जोड़ों में लंबे समय तक दर्द परेशान कर सकता है. लेकिन, डेंगू में खतरे अधिक होते हैं, जिसमें सांस लेने में परेशानी, रक्त स्राव और शॉक की समस्या हो सकती है.
 
उपचार
  • बुखार होने से शरीर में प्लेटलेटस तेजी से कम होने लगते हैं. पपीते के पत्तों के उपयोग से प्लेटलेटस की संख्या में बढ़ाेतरी होती है. पपीते के पत्तों से उसकी डंठल को अलग कर दें. पत्तों को पीस कर उसका जूस निकाल लें. दिनभर में तीन बार दो से तीन चम्मच सेवन करने से काफी राहत मिलती है
  • जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए लहसुन और अजवाइन की फली को तेल में अच्छी तरह से मिला कर गर्म कर ले. अब इस तेल से जोड़ों पर हल्के हाथों से मालिश करने से जोड़ों के दर्द से छुटकारा मिलेगा
  • नीम की सुखी हुई पत्तियों, तुलसी, किशमिश और अजवाइन को एक गिलास पानी में उबाल कर दिन में दो से तीन बार सेवन करें
  • लौंग के तेल में लहसुन को पीस कर डालें. इसके बाद किसी कपड़े में बांध कर जोड़ों में बांध दें. ऐसा करने से दर्द में राहत मिलेगी और बुखार भी कम होने लगेगा
     
लक्षण
इस बीमारी के रोगियों को तेज बुखार, जोड़ों में तेज दर्द और जकड़न, सिर दर्द, थकान, घबराहट और स्किन रेशेज हो सकते हैं. इसमें रोगियों को बुखार की अचानक शुरुआत होती है, जो जोड़ों में दर्द के साथ होती है. मच्छर के काटने के चार से सात दिन के अंदर इसका असर दिखना शुरू हो जाता है. इसके लक्षण बहुत कुछ डेंगू जैसे ही होते हैं. चिकनगुनिया डेंगू जितना खतरनाक और घातक नहीं होता है. चिकनगुनिया और डेंगू दोनों साथ में भी हो सकते हैं. एक बार चिकनगुनिया होने के बाद सामान्यतया दोबारा नहीं होता.
 
बचाव
इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है मच्छरों से बचा जाये. मच्छर की रोकथाम करने से ही चिकनगुनिया पर काबू पाया जा सकता है. अगर थोड़ा-सा भी पानी कहीं इकट्ठा है, तो वहां मच्छर पनप सकता है. इसलिए बारिश के बाद आसपास पानी जमा नहीं होने देने पर विशेष ध्यान रखें. पानी सुखा ना सकें, तो वहां थोड़ा मिट्टी का तेल डाल दें, इससे मच्छर पैदा नहीं होंगे. इसके अलावा मच्छरदानी, मच्छर वाली क्रीम आदि का उपयोग मच्छरों से बचने के लिए करना चाहिए. जहां तक संभव हो पूरा शरीर ढका रहे. होमियोपैथ में eupatperf200 नाम की एक दवा है. ये दवा चिकनगुनिया होने की आशंका को कम करती है. चिकनगुनिया के लिए कोई वैक्सीन या टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन दवाइयों के जरिये इसके लक्षणों को खत्म किया जा सकता है. आरटी पीसीआर टेस्ट, वायरस आइसोलेशन टेस्ट और सीरोलॉजिकल डायग्नोसि‍स टेस्ट के जरिये पता किया जाता है कि रोगी को चिकनगुनिया हुआ है या नहीं. साथ ही मरीज को डिस्प्रिन या एस्प्रिन की गोली सावधानी के तौर पर बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए. जितना हो सके तरल पदार्थ लें. इसके अलावा डॉक्टर की सलाह भी आवश्यक है.
 
 
 
डायरिया
सामान्य रूप से बार-बार मल आना अतिसार, दस्त या डायरिया रोग कहलाता है. यह एक संक्रामक रोग है. यह सबसे अधिक बच्चों में पाया जाता है. इस रोग का संक्रमण किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति में हो सकता है, लेकिन बच्चों में, खासतौर पर छह माह से दो वर्ष की आयु वर्गवाले बच्चों में यह सबसे अधिक होता है. जिन बच्चों को बोतल से दूध पिलाया जाता है, उसमें इस रोग की होने की संभावना और भी ज्यादा बढ़ जाती है. गरीबी, स्वच्छता की कमी, एक स्थान पर ज्यादा लोगों का निवास करना आदि रोग के फैलने में अहम भूमिका निभाते हैं. मौसम के अचानक बदलाव होने से लोग डायरिया की चपेट में आ जाते हैं. फूड प्वाइजनिंग से भी दस्त होने लगता है. गर्मियों में तेज मिर्च-मसाले वाला भोजन करने, सर्दियों और बारिश के मौसम में वायरल इंफेक्शन से सबसे ज्यादा डायरिया होता है.
 
 
घरेलु उपाय
  • डायरिया में दो कटोरी दही खाने से बेहद आराम 
  • मिलता है. सादा चावल में दही मिला कर भी खाया जा सकता है
  • अदरक को कद्दूकस करके उसमें शहद मिला कर खायें. इसके तुंरत बाद पानी न पीये. अदरक की चाय (बिना दूध की) भी काफी आराम देती है
  • एक छोटा चम्मच मेथी दाना को चबा कर, एक बड़ा चम्मच दही खाने से डायरिया से निजात मिलती है. इसके अलावा एक चम्मच मेथी दाना और जीरा को भून कर उसका पाउडर बना लें और दो बड़ा चम्मच दही में मिला कर दिनभर में तीन बार खाने से आराम मिलता है
  • एक गिलास पानी में एक चम्मच सिरका मिलायें और उसे पी लें. इसे दिन में दो से तीन बार तब तक पीयें, जब तक डायरिया ठीक न हो जाये
  • डायरिया होने पर दो से तीन पके हुए केले रोज खायें
  • सादा व सफेद गीला चावल भी डायरिया के दौरान खाने की सलाह दी जाती है. इस तरह के चावल खाने से दस्त कम आते हैं. 
  • गाजर को काट कर उबाल लें और जब गाजर उबल कर पानी में घुल जाये, तब पानी को छान कर अलग कर लें. इसमें स्वादानुसार नमक, भुना जीरा और काली मिर्च पाउडर मिला कर उसका सेवन करें
 
लक्षण
दस्त आने के पहले हल्का, मीठा पेट दर्द होना, कभी थोड़ा गाढ़ा, तो कभी पानी की तरह तेजी के साथ मल निकलना, शारीरिक दुर्बलता, पेट दबाने पर पीड़ा होना, जीभ सूखने के अलावा हाथ-पैर ठंडे पड़ना, शरीर में बेचैनी, थकान आदि लक्षण देखने को मिलते हैं. दस्त के साथ-साथ रोगी को बुखार आना, उल्टी होना, सिर दर्द, भूख न लगना और कमजोरी की शिकायतें भी हो सकती है. ऐसी अवस्था तीन से सात दिन के लिए होती है. अगर ठीक ढंग से उपचार न किया जाये, तो दस्त तथा उल्टी के कारण रोगी के शरीर में पानी और लवणों की कमी हो जाती है. 
 
बचाव
 
 
कुछ मामूली-सी सावधानियां बरत कर हम इस रोग से बचाव कर सकते हैं
बच्चों को कभी भी बोतल से दूध न पिलाएं. जहां तक संभव हो कटोरी या चम्मच से ही दूध पिलायें. मां का दूध बच्चे को हमेशा देना चाहिए. यह देखा गया है कि जो बच्चे मां का दूध पीते हैं, उनमें अतिसार होने की संभावना अन्य बच्चों के मुकाबले बहुत कम होती है. इसका कारण यह है कि मां के दूध में रोग रक्षक तत्व होता है. दस्त के दौरान भी मां का दूध बच्चे को देते रहना चाहिए. जो बच्चा खाना खा सकता है, उन्हें दस्त के दौरान भोजन का सेवन करते रहना चाहिए. इसके बावजूद अगर डायरिया का प्रकोप किसी को हो जाये, तो तुरंत जीवनरक्षक घोल यानी ओआरएस घोल या एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और चुटकी भर नमक मिला कर थोड़ी-थोड़ी देर में लेते रहें, इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी. इसके अलावा भोजन के रूप में दही-चावल या खिचड़ी खायें. चावल का धोवन (चावल उबलने के बाद बचा हुआ गाढ़ा सूप), मूंग या मसूर की दाल का सूप, साबूदाना की खीर, छाछ या दही इच्छानुसार सेवन करें. सेब का मुरब्बा, या केले और चावल भी खा सकते हैं. एक कप दही में एक केला मिलाकर सुबह, दोपहर व शाम सेवन करें. नीबू, मौसमी, संतरे, अनार का जूस लें. कच्चा, पका पपीता, गन्ने का रस, मीठा सेब खायें. रोगी बेल का मुरब्बा भी खा सकते हैं. डायरिया होने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, इसलिए गाजर का सूप पीये.