aamukh katha

  • Nov 3 2017 1:41PM

अंतिम विकल्प हो कीटनाशक

अंतिम विकल्प हो कीटनाशक
कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग हमेशा हानिकारक रहा है, लेकिन कीटनाशक कंपनियों की तगड़ी मार्केटिंग पॉलिसी ने किसानों के लिए इसे इतना सुलभ बना दिया है कि बिना सोचे-समझे ही किसान इसका धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं. फल या सब्जियों में किसी प्रकार का रोग लगता है, तो किसान सीधे बाजार जाकर कीटनाशक खरीद कर ले आते हैं और खेतों में छिड़काव कर देते हैं. किसान कीटनाशक का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन उन्हें सही तरीके से कीटनाशक के इस्तेमाल करने की उचित जानकारी नहीं होती है. किसान अधिक फायदा पाने के चक्कर में तय मानक से अधिक कीटनाशक का प्रयोग फसलों में करते हैं, जिससे खेतों की मिट्टी को भी नुकसान पहुंचता है. खेती के लिए उपयोगी मित्र कीट भी कीटनाशकों के प्रभाव में आकर खत्म हो जाते हैं, जिससे खेत की उर्वरक क्षमता कम हो जाती है. इसके साथ-साथ इंसानों और खेत के आस-पास मौजूद जलीय जीवों पर भी कीटनाशकों का बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. कीटनाशकों का प्रयोग अंतिम विकल्प के तौर पर करना चाहिए. कीटनाशकों का प्रयोग करते समय किन चीजों का विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए. कीटनाशकों का प्रयोग किये बगैर कैसे फसलों की बीमारियों को दूर भगा सकते हैं. किसान अगर थोड़ी-सी मेहनत करके जैविक कीटनाशक बना लेते हैं, तो इसका काफी फायदा होगा. इन मसलों पर पेश है भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, प्लांडू (रांची) स्थित अनुसंधान परिषद के कृषि कीट वैज्ञानिक जयपाल सिंह चौधरी से पवन कुमार की विशेष बातचीत. 
 
सवाल : कीटनाशक क्या है.
जवाब : जैविक या अजैविक पदार्थ, जो उन कीटों को नियंत्रित करते हैं, मनुष्य के लिए नुकसानदायक हैं. फल, फसल और सब्जियों के लिए भी हानिकारक हैं. उन कीटों को नियंत्रित करने व मारने के लिए, जिन रासायनिक या जैविक दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है, उसे कीटनाशक कहते हैं. यहां एक बात सभी को जानना जरूरी है कि कीटनाशकों के प्रयोग से पैदावार नहीं बढ़ती है. अगर कोई दुकानदार किसान को यह कहता है कि इस दवा के इस्तेमाल से उपज बढ़ेगी, तो किसान भाई-बहनों को उसके झांसे में नहीं आना चाहिए.
 
सवाल : कीटनाशक का इस्तेमाल कैसे करें
जवाब : कीटनाशकों का इस्तेमाल तब तक अच्छा है, जब तक यह किसानों, फसलों और खेत की मिट्टी को नुकसान नहीं पहुंचाए. किसानों को कीटनाशक का इस्तेमाल अपने विवेक के अनुसार करना चाहिए और तब ही करना चाहिए, जब आर्थिक स्तर पर नुकसान हो रहा हो. यहां आर्थिक स्तर कहने का मतलब है कि अक्सर ऐसा होता है कि खेत में एक-दो कीट देखते ही किसान बाजार से लाकर कीटनाशक का छिड़काव कर देते हैं. पर, ऐसा नहीं करना चाहिए. किसानों को कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचना चाहिए. इसलिए अगर आधे से अधिक खेत में कीट का प्रभाव हो गया है, तब ही कीटनाशक का उपयोग करना लाभदायक है. कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए सबसे पहले रोग की पहचान करना जरूरी है. इसलिए सबसे पहले किसान रोग और कीट की पहचान करें. यह देखें कि खेत में जो कीट लगा है, वो रसचूसक है या काटने वाला है या फिर दूसरे खेत में लगी फसल की बीमारी यहां आकर फसल में लग गयी है.
 
सवाल : किसान कीट नियंत्रण कैसे कर सकते हैं.
जवाब : देखिए, कीट नियंत्रण के लिए हमें समेकित कीट नियंत्रण को समझना होगा. किसी भी कीट के नियंत्रण के लिए उपलब्ध कीट नियंत्रण विधियों का ऐसा समायोजन करना है, जिसमें आय अधिक हो और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कम नुकसानदायक हो या नुकसान नहीं हो. सुरक्षा ही बचाव है. कीट प्रबंधन इसी प्रणाली पर कार्य करता है. किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए. इससे कीट व रोग पनप नहीं पाते हैं और दवाइयों का इस्तेमाल नहीं करना होता है. रोग रोधी और कीट रोधी किस्म के उन्नत बीजों का प्रयोग करना चाहिए. कीट और बीमारी से फसल को बचाने के लिए बुवाई के समय में हेर-फेर करना चाहिए. इससे कीट और रोग सही समय पर पनप नहीं पाते हैं. किसान मिश्रित खेती के प्रचलन को अपनाएं. इसके जरिये बहुत हद तक कीट पर नियंत्रण पाया जा सकता है, जैसे-टमाटर और मिर्च की खेती के साथ गेंदे का फूल लगाने से कीट टमाटर और मिर्च को नुकसान नहीं पहुंचा पाता है. पत्तागोभी, फूलगोभी जैसे गोभीवर्गीय सब्जियों के साथ सरसों की खेती करने से सब्जियों में नुकसान कम होता है. इसी तरह किसान बैंगन के साथ मकई व धनिया की खेती करें, तो बैंगन में नुकसान कम होता है.
 
सवाल : किसानों को किस प्रकार से कीटनाशक का उपयोग व कब छिड़काव या भुरकाव करनी चाहिए.
जवाब : सबसे पहले यह कहना चाहूंगा कि जब तक क्षति का स्तर आर्थिक नुकसान से ज्यादा नहीं हो जाये, तब तक कीटनाशक का छिड़काव या भुरकाव नहीं करना चाहिए. कीटनाशक का उपयोग करने से पहले किसान कीटनाशक के इस्तेमाल करने के निर्देशों को अवश्य पढ़ें. दवा की तारीख और एक्सपायरी की तारीख भी किसान जरूर देखें. कई बार ऐसा होता है कि किसान इस्तेमाल करने के बाद आधे बचे हुए कीटनाशक के डिब्बे को रख देते हैं और कई महीने बाद उसका इस्तेमाल करते हैं, जो बिल्कुल गलत है. सील खुलने के बाद दवा को इस्तेमाल कर खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि कीटनाशकों का उचित भंडारण नहीं करने पर वो खराब हो जाते हैं. कीटनाशकों का छिड़काव सुबह नहीं करना चाहिए, क्योंकि सुबह के समय पौधों में नमी होती है, जिससे कीटनाशक मिल कर जमीन तक पहुंच जाते हैं और नुकसान पहुंचाते हैं. इसके साथ ही मित्र कीटों पर भी कीटनाशकों का नकारात्मक असर होता है. इसलिए कीटनाशकों का छिड़काव शाम के समय ही करना चाहिए. अक्सर ऐसा होता है कि किसानों को लगता है कि अगर अधिक मात्रा में कीटनाशक का इस्तेमाल करेंगे, तो ज्यादा फायदा होगा. लेकिन, ज्यादा लाभ लेने के चक्कर में किसानों का नुकसान हो जाता है. अधिक मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल करने से मिट्टी पर भी इसका बुरा असर पड़ता है और मित्र कीटों को भी नुकसान पहुंचता है. पैसे की बर्बादी होती है और पौधों को भी नुकसान होता है. हमेशा किसानों को निर्देशित मात्रा में ही कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए. अब बात करते हैं भुरकाव करने के तरीकों की. भुरकाव हमेशा सुबह के समय करना चाहिए, क्योंकि सुबह के समय पौधों में नमी रहती है, जिससे उसके पाउडर पत्तों में चिपक जाते हैं. जिस वक्त हवा चल रही हो, उस समय कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर हवा चल रही हो, तो नब्बे फीसदी कीटनाशक हवा में उड़ जाते हैं और दूसरों के खेतों में चले जाते हैं. पर्यावरण में फैल कर नुकसान भी पहुंचाते हैं. कई बार ऐसा देखा जाता है कि किसान दो-तीन दवाओं का मिश्रण करके खेतों में डालते हैं, जो बिल्कुल गलत है. ऐसा कभी नहीं करना चाहिए. इससे खेत में दवा डाल रहे किसान के स्वास्थ्य पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है और पौधों के लिए भी. किसानों को बताना चाहता हूं कि बाजार में दवाओं का उचित मिश्रण मिलता है. इसलिए किसानों को खुद से मिश्रण नहीं बनाना चाहिए और अगर बना रहे हैं तो विशेषज्ञों से राय अवश्य लेनी चाहिए. 

किसान को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि जिस इलाके में मछली पालन होता है, वहां कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए या ऐसे कीटनाशको का इस्तेमाल करें, जो मछली के लिए नुकसानदायक नहीं हो. आधुनिक छिड़काव मशीनों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. आधुनिक मशीनें ड्रिफ्ट से बचाती हैं. आधुनिक मशीनों की खास तकनीक के जरिये कीटनाशक सीधे जाकर पत्तों में चिपक जाती है. बीमारी की जानकारी नहीं होने पर किसान कृषि मित्र, कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक से संपर्क करें या फिर किसान कॉल सेंटर में फोन करके भी किसान अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं.  अगर फसल की तुड़ाई करनी है, तो दवाओं का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि दवा के अवशेष मिट्टी में रह जाते हैं, जो नुकसानदायक होते हैं.
 
सवाल : किसान कीटनाशकों की खरीददारी कहां से और कैसे करें.
जवाब : किसानों को यह जानना बेहद जरूरी है. किसान हमेशा प्रतिष्ठित कंपनियों के कीटनाशक खरीदें. फसलों के हर रोग के लिए उचित कीटनाशक होता है. किसान उसे अच्छे तरीके से देख कर ही खरीदें. अक्सर दुकानदार ज्यादा कमीशन के चक्कर में उन्हीं कंपनियों के कीटनाशक किसानों को देते हैं, जिनमें उन्हें अच्छा कमीशन मिलता है. अगर संभव हो तो लाइसेंसी दुकान से ही कीटनाशक खरीदें. सभी कीटनाशक के डिब्बों में लाल, हरा, नीला और पीले रंग के निशान बने होते हैं. किसानों को चाहिए कि लाल निशान वाले डिब्बों को लेने से बचें. यह निशान दवाओं के असर के मानक के अनुरूप होता है. किसान हरा निशान वाले डिब्बों का ही प्रयोग करने की कोशिश करें.
 
सवाल : बचाव के क्या तरीके हैं.
जवाब : जैविक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग बुवाई से पहले करना चाहिए. अगर बचाव के बावजूद कीड़ा लग गया, तब किसान को देखना चाहिए कि पूरे खेत में कीड़े लगे हैं या सिर्फ कुछ पौधों तक ही सीमित है. अगर कुछ पौधों तक ही कीड़े सीमित हैं, तो उस पौधे को जड़ से उखाड़ कर खेत से निकाल कर जला देना चाहिए. बैंगन, लहसुन, प्याज, बीन में राख का छिड़काव करना चाहिए. राख के इस्तेमाल से कीड़े नहीं लगते हैं. जैविक विधि से बीजों का उपचार भी करना चाहिए.