aamukh katha

  • Dec 1 2017 1:38PM

सेंवाती घाटी : 200 फुट ऊपर से गिरता है पानी

सेंवाती घाटी : 200 फुट ऊपर से गिरता है पानी
बोकारो जिले का कसमार प्रखंड अपनी मनमोहक वादियों के कारण लोगों को आकर्षित करता है. यहां धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ववाले कई स्थल हैं, जो लोगों को बरबस लुभाते हैं. पर्यटन के विकास की यहां असीम संभावनाएं हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गयी है. आश्वासनों का पिटारा बार-बार थमाया जाता है, लेकिन जनप्रतिनिधि बदलने के साथ ही घोषणाएं भी फिस्स हो जाती हैं. पर्यटन के विकास बातें अब तक हवा-हवाई साबित हुई हैं. प्रकृति ने इस क्षेत्र को करीने से सजाया है. खासकर कसमार प्रखंड का दक्षिणी क्षेत्र मनोरम वादियों से घिरा है. पर्यटन के विकास की संभावनाओं वाले अधिकतर स्थल दक्षिणी क्षेत्र में ही मौजूद हैं. पश्चिम बंगाल से सटे होने के कारण दो राज्यों के बीच पर्यटन केंद्र के रूप में यह क्षेत्र उभर सकता है.
 
दीपक सवाल
झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर मुरहलसूदी पंचायत में सेंवाती घाटी है. इसकी गिनती क्षेत्र के प्रमुख रमणीय स्थलों में होती है. यहां का झरना व प्राकृतिक छटा मनमोहक है. मकर संक्रांति के अवसर पर प्रत्येक साल 15 जनवरी को यहां टुसू मेला लगता है. सीमा पर होने के कारण दोनों राज्यों से महिला-पुरुषों की काफी भीड़ उमड़ती है. इस घाटी के साथ कई धार्मिक बातें भी जुड़़ी हुई हैं. घाटी में करीब 200 फुट की ऊंचाई से बहता झरना यहां की प्राकृतिक खूबसूरती में चार चांद लगाता है. सेंवाती घाटी त्रिभाषीय खोरठा, कुरमाली एवं पंचपरगनिया के साथ-साथ तीन जिले पुरुलिया, बोकारो एवं हजारीबाग जिले का सीमांकन करती है.
 
650 फीट ऊंची है दुर्गा पहाड़ी
दुर्गापुर पंचायत की दुर्गा पहाड़ी न सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी धार्मिक-सामाजिक मान्यताएं भी हैं. इस पहाड़ी के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की अपार संभावनाएं हैं. पहाड़ी की बनावट ऐसी है कि इसे हजारीबाग की प्रसिद्ध कनहरी पहाड़ी की तरह विकसित किया जा सकता है. पहाड़ी की चोटी पर पहुंचने के लिए एक पगडंडी है. करीब 650 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर पहुंचने के बाद लोगों को एक अजीब-सा सुकून मिलता है. कहा जाता है कि इस पहाड़ी के नीचे करीब साढ़े चार सौ साल पहले राजा दुर्गा प्रसाद देव का गढ़ हुआ करता था. किसी मामले को लेकर पद्मा राजा के साथ हुई लड़ाई में दुर्गा प्रसाद देव समेत उनका पूरा परिवार मारा गया था. इस दौरान सिर्फ उनकी रानी जीवित बची थीं, जो बाद में थोड़ी दूर स्थित दह में कूद कर जान दे दी थीं. उस दह को आज भी रानी दह के नाम से जाना जाता है. इस पहाड़ी का धार्मिक महत्व भी है. इसे लोग बडराव बाबा के नाम से भी पूजते हैं. यह वही पहाड़ी है, जिसकी तलहटी पर बसे दुर्गापुर गांव के लोग होली नहीं मनाते हैं.
 
प्रवेश पर रोक के बावजूद महिलाओं की होती है भीड़
बगियारी गांव के मंगल चंडी मंदिर को भी विकसित किया जा सकता है. वैसे तो मंदिर की बनावट काफी साधारण है, लेकिन यह मंदिर इसलिए चर्चित है कि यहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. देवी मंदिर होने के बावजूद महिलाएं यहां पूजा करने के लिए प्रवेश नहीं कर सकती हैं. इसके बावजूद यहां सबसे अधिक भीड़ महिलाओं की ही लगती है. महिलाओं को मंदिर से करीब 100 मीटर पहले ही रूक जाना पड़ता है. इन महिलाओं की पूजा की थाल को कोई पुरुष पुजारी ही मंदिर तक ले जाकर पूजा करवाता है.