aamukh katha

  • Mar 16 2020 12:59PM

सोलर इंजीनियर हैं वृंदावती व बिरमुनी

सोलर इंजीनियर हैं वृंदावती व बिरमुनी

दुर्जय पासवान
जिला : गुमला

आठवीं कक्षा पास वृंदावती देवी व पांचवीं पास बिरमुनी देवी गांव की सोलर इंजीनियर हैं. गरीबी में पली बढ़ी और गरीबी में जी रही इन दोनों महिलाओं के संघर्ष व सोलर इंजीनियर बनकर गांव की तस्वीर बदलने की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है. इन दोनों महिलाओं ने गुमला जिला प्रशासन से मिली मदद के बाद 10 गांवों को सोलर लाइट से जगमग कर दिया है. गुमला से 45 किमी दूर घोर उग्रवाद प्रभावित रायडीह प्रखंड की सुरसांग पंचायत की इन महिलाओं ने घूप अंधेरे को चीर कर अपने हुनर से गांवों को रोशन कर दिया है.

आजादी के सात दशक बाद रोशन
आजादी के सात दशक बाद सुरसांग पंचायत के 10 गांव गिद्धखोता, करमटोली, पोढ़ोटोली, पढ़लडीपा, खूंटीटोली, पूर्णापानी, गड़गड़लोंगरा, बुकागढ़ा, तिलैहडाड़ व केराडाड़ गांव सोलर लाइट से रोशन हुए हैं.

ग्रामीण विद्युतीकरण योजना है फेल
सरकार की ग्रामीण विद्युतीकरण योजना इस गांव में फेल है. कई बार लोगों ने गांव में बिजली पोल व तार लगाकर बिजली की मांग की, लेकिन बीहड़ जंगल व दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण सरकार इस गांव तक बिजली नहीं पहुंचा सकी.

रंग लायी उपायुक्त की पहल
आखिरकार गुमला उपायुक्त ने गांव की दो महिलाएं वृंदावती देवी व बिरमुनी देवी को सोलर लाइट बनाने की ट्रेनिंग देने की व्यवस्था करायी. दोनों महिलाओं ने राजस्थान के बेयरफुट कॉलेज, तिलोनिया में सोलर लाइट बनाने का प्रशिक्षण लिया. छह माह के प्रशिक्षण के बाद वे गांव लौटीं. इसके बाद गांव में जिला प्रशासन की मदद से 10 गांव के 150 घरों में सोलर लाइट से बिजली पहुंचायी गयी.

अब 10 गांवों की महिलाएं लेंगी ट्रेनिंग
सोलर इंजीनियर वृंदावती देवी व बिरमुनी देवी अब गांव की महिलाओं को सोलर लाइट बनाने का प्रशिक्षण देंगी. गुमला जिला प्रशासन ने इसके लिए पहल की है. इन दोनों इंजीनियरों द्वारा 10 गांव की महिला समूहों को सोलर लाइट का प्रशिक्षण दिया जायेगा. इससे गांव की महिलाएं हुनरमंद बनेंगी और स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बनेंगी.

छह माह का मिला प्रशिक्षण
वृंदावती कहती हैं कि छह माह तक राजस्थान में ट्रेनिंग के दौरान विभिन्न राज्यों की महिलाएं सोलर लाइट बनाने का हुनर सीख रही थीं. अब वह गांव की महिलाओं को ट्रेनिंग देंगी. जिससे वे हुनर के साथ अपने द्वारा बनाये गये सोलर लाइट को बाजार में बेच सकें.

पहले करती थीं खेती बारी
वृंदावती व बिरमुनी कहती हैं कि पहले वे खेतीबारी करती थीं. गांव में ही मजदूरी कर जीविका चलाती थीं, लेकिन प्रशासन के सहयोग से अब वे सोलर लाइट बना रही हैं. इनके द्वारा बनायी गयी सोलर लाइट से गांव में बिजली जल रही है. प्रत्येक घर से चार बल्ब जलाने का उन्हें महीने में डेढ़ सौ रुपये मिलते हैं. इस राशि से सोलर लाइट का रख रखाव व मरम्मत का कार्य किया जाता है. इससे इन्हें आमदनी भी हो जाती है.

वृंदावती व बिरमुनी हैं सोलर इंजीनियर : रंजीत उरांव
सुरसांग पंचायत के मुखिया रंजीत उरांव कहते हैं कि के ये 10 गांव पहले विकास से अछूते थे. हमेशा नक्सली डर बना रहता था. धीरे-धीरे विकास के कार्य हो रहे हैं. महिलाएं खुद के बूते आगे बढ़ रही हैं. पहले बिजली नहीं थी. इन महिलाओं ने अपने हुनर से सोलर लाइट से बिजली ला दी है. वृंदावती व बिरमुनी हमारे गांव की सोलर इंजीनियर बन गयी हैं.