aamukh katha

  • Feb 18 2020 2:56PM

जैविक खेती देखनी है, तो गोला आइये

जैविक खेती देखनी है, तो गोला आइये

पवन कुमार
जिला: रामगढ़ 

रामगढ़ जिला अंतर्गत गोला प्रखंड के सरला कला और नवाडीह गांव के किसान जैविक खेती कर रहे हैं, हालांकि जैविक किसानों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे सभी किसान जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. यह एक अच्छा संकेत है. गोला क्षेत्र सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता है. सालोंभर यहां के खेत में मकई, खीरा, करैला, टमाटर, बैंगन समेत अन्य सब्जियां आसानी से मिल जाती हैं. महिला किसान अपने गांवों में जैविक खेती करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं. इसके साथ ही जैविक खेती के फायदे भी लोगों को बखूबी समझा रही हैं. बोकारो जिले से यहां के गांवों में मिनी ट्रक से गोबर बहुतायत में मंगाया जाता है. लगभग सभी किसान अपने खेत में गोबर का प्रयोग करते हैं. इसलिए मिट्टी की गुणवत्ता अभी भी अच्छी है.

केस स्टडी 1

सरलाकला गांव के 350 परिवार जैविक खेती से जुड़े

गोला प्रखंड का सरला कला गांव मकई उत्पादन के लिए मशहूर है. यहां सालोंभर खेत में मकई की फसल आपको दिख जायेगी. गांव में लगभग 350 परिवार रहते हैं, जो अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह खेती पर आश्रित हैं. इनमें से कई किसान हैं, जो जैविक खेती करते हैं. यहां मकई के अलावा फ्रेंचबीन, मटर, आलू, पत्तागोभी और फूलगोभी का उत्पादन होता है. किसान अपने उत्पादों को गोला बाजार में जाकर बेचते हैं. अधिक मात्रा में उत्पादन होने पर गांव के ही सभी किसान आपस में मिल कर सब्जियों को बाहर की मंडियों में भेजते हैं.

जैविक खेती में कम लागत में ज्यादा मुनाफा : जूही कुमारी

जूही कमारी कहती हैं कि बचपन से ही वे खेती-बारी घर में देख रही हैं. शादी भी किसान परिवार में हुई. जूही अपने परिवार के साथ मिल कर दो एकड़ जमीन में खेती करती हैं. फ्रेंचबीन, मटर, आलू, फूलगोभी और पत्तागोभी की खेती सबसे अधिक करती हैं. कहती हैं कि उत्पादक समूह से उन्हें जैविक खेती की जानकारी मिली. जैविक खेती का सबसे बड़ा फायदा है कि इससे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. जूही ने आलू और मकई की भी जैविक खेती की है. आलू में उन्हें अच्छी पैदावार हुई है. साथ ही खेत में मकई के पौधे लहलहा रहे हैं. उनकी जमीन रासायनिक उर्वरकों से ज्यादा संक्रमित नहीं है, इसलिए जैविक से ज्यादा उत्पादन होता है.

जैविक खेती को अपना रहे हैं किसान : आजाद कुमार महतो

कृषक मित्र आजाद कुमार महतो बताते हैं कि जैविक खेती के फायदे जानने के बाद किसानों का झुकाव जैविक खेती की ओर हो रहा है. जैविक खेती का सबसे बड़ा फायदा है कि कम लागत में अधिक पैदावार होती है. जैविक उत्पाद खाने से स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है और स्वाद भी बढ़िया रहता है.

केस स्टडी: 2

नवाडीह गांव में जैविक खेती से जुड़ रहे किसान

दुलमी डैम के किनारे बसे नवाडीह गांव के किसानों की आजीविका खेती-किसानी ही है. पहले किसानों के पास बड़ी जोत की जमीन थी, लेकिन गांव की 85 फीसदी कृषि जमीन डैम में चली गयी, तो किसानों के पास अब छोटी-छोटी जमीन बची है. औसतन एक किसान के पास 60 से 70 डिसमिल जमीन है. उसी जमीन को हमेशा के लिए उपजाऊ बनाये रखना किसानों के लिए एक चुनौती है. इसलिए सभी किसान अब धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. नवाडीह गांव में लगभग 120 घर है, जिनमें से 85 परिवार पूरी तरह खेती पर निर्भर हैं. इनमें से 60 फीसदी किसान जैविक खेती कर रहे हैं. इस गांव की खासियत यह है कि इस गांव में पूरे साल करैला, कद्दू और खीरा की खेती होती है. इसके अलावा गांव में मिर्चा, मटर, फ्रेंचबीन, आलू, तरबूज, नेनुआ, गाजर, फूलगोभी, पत्तागोभी और परवल की खेती भी खूब होती है. गर्मियों में भी गांव के खेत हरे-भरे दिखाई देते हैं. गांव के सभी किसान गोबर का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. गोबर बोकारो से मंगाया जाता है. इस लिहाज से कहें, तो गोबर के लिए गोला एक बढ़िया बाजार बनता जा रहा है.

जैविक खेती से झारखंड में आयेगी हरित क्रांति : सबिता देवी

सबिता देवी एक एकड़ जमीन में जैविक खेती करती हैं. अभी उनके खेत में जैविक आलू लगा है. खेत की तरफ इशारा करते हुए सबिता बताती हैं कि इस मौसम में जहां अधिकतर किसानों का आलू बर्बाद हो गया है, वहीं उनका आलू अच्छा है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ गोबर खाद का ही उपयोग किया है. इस कारण आलू मौसम की मार से बचा है. रासायनिक खाद के उपयोग के कारण ही पौधों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है. जैविक खाद के इस्तेमाल से बीमारी से बचा जा सकता है. जल्द ही राज्य में जैविक खेती के जरिये हरित क्रांति आयेगी. सबिता ने करैले की जैविक खेती के लिए खेत को तैयार कर लिया है. करैला का बिचड़ा भी तैयार है.

रोगमुक्त शरीर के लिए जरूरी है जैविक खेती : रानी सिंह

रानी सिंह कहती हैं कि रोगमुक्त शरीर के लिए जैविक खेती जरूरी है. जैविक उत्पाद खाने से शरीर स्वस्थ रहता है. इससे शरीर रोगमुक्त रहता है. इसके अलावा खाने में भी बेहद स्वादिष्ट रहता है. जहां एक ओर रासायनिक खाद के प्रयोग से धीरे-धीरे उत्पादकता घटती है, वहीं जैविक खाद के इस्तेमाल से उत्पादकता धीरे-धीरे बढ़ती है, जो लंबे समय तक बनी रहती है.

प्रकृति के अनुकूल है जैविक खेती : मालती देवी

नवाडीह की कृषक मित्र सह महिला किसान मालती देवी कहती हैं कि उन्होंने एक एकड़ जमीन में आलू, प्याज, बीन और मटर की खेती की है. खेत में गोबर खाद के अलावा केंचुआ खाद का भी इस्तेमाल करती हैं. जीवामृत, घनजीवामृत, द्रव्यजीवामृत बनाकर उसका उपयोग करती हैं और दूसरे किसानों को भी इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करती हैं. बीमारी होने पर वह नीमास्त्र का प्रयोग खेत में करती हैं.