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  • Jan 17 2019 2:14PM

गर्व करें अपनी बेटियाें पर

गर्व करें अपनी बेटियाें पर

अनुज कुमार सिन्हा

गांवाें के स्कूल में जब छुट्टी हाेती है, ताे स्कूल के सामने खड़ा हाे जाइए. छाेटी-छाेटी लड़कियां पैदल आैर कुछ बड़ी लड़कियां साइकिल से बड़ी संख्या में जब निकलती है, गर्व हाेता है. ये बेटियां पढ़ रही हैं आैर इन्हें माैका भी मिल रहा है. एक समय था जब घटिया साेच के कारण कई परिवार अपने बेटाें काे ताे पढ़ाते थे, लेकिन बेटियाें काे नहीं. घराें में दाेहरी नीति अपनायी जाती थी.

अब स्थिति बदल रही है. हर क्षेत्र में इन लड़कियाें ने बेहतर प्रदर्शन किया है. इसे देखना है ताे देखिए 10वीं, 12वीं का रिजल्ट जब निकलता है. अधिकांश में लड़कियां शीर्ष पर हाेती हैं. आगे की पढ़ाई में भी ये पीछे नहीं रहतीं. सिविल सर्विस की परीक्षा हाे या मेडिकल की, ये लड़कियां आगे ही रहती हैं. इन बेटियाें में पढ़ाई का जुनून है, कुछ करने का जुनून है. यह सब अब दिख रहा है. यह सही है कि अभी भी दूर-दराज के इलाकाें में थाेड़ी परेशानियां हैं. कम उम्र में शादी कर देने की घटनाएं घटती हैं आैर ये सब इन बेटियाें के जीवन काे प्रभावित करती हैं. अनेक उदाहरण ऐसे मिल सकते हैं जब इन बेटियाें ने कम उम्र में शादी करने के निर्णय का खुल कर विराेध किया आैर प्रशासन-सरकार ने उनकी आगे की पढ़ाई की व्यवस्था की.

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देश में किसी भी क्षेत्र काे देख लीजिए, लड़कियां बेहतर करते हुए मिलेंगी. पढ़ाई में ताे है ही, खेल में इन लड़कियाें ने देश का नाम रोशन किया है. आेलिंपिक में जितना बेहतर प्रदर्शन हाल के वर्षाें में लड़कियाें ने किया है, उतना लड़काें ने नहीं किया है. जितना मेडल इन लड़कियाें ने देश के लिए जीता है, लड़काें ने नहीं जीता है. बैडमिंटन, टेनिस, निशानेबाजी के साथ-साथ कुश्ती आैर मुक्केबाजी में शानदार प्रदर्शन किया है. क्रिकेट बहुत लाेकप्रिय खेल है. इसमें लड़काें की टीम का ही महत्व हुआ करता था. आज भारतीय महिला क्रिकेट की टीम वर्ल्ड कप जीतते-जीतते रह गयी. फाइनल तक पहुंचना क्या कम गाैरव की बात है. भारतीय महिला हॉकी टीम बेहतर कर रही है. दिल्ली में इस बार गणतंत्र दिवस के परेड में लड़कियां सलामी देंगी. ये लड़कियां अब युद्धक विमान उड़ा रही हैं. अंतरिक्ष में जा चुकी हैं. ट्रेन भी चलाती है. कंप्यूटर, सेवा आैर शिक्षा के क्षेत्र में ताे पहले से ही हैं.

अब ताे दुनिया का काेई ऐसा क्षेत्र बचा नहीं है जिसमें लड़कियाें ने अपना कमाल नहीं दिखाया हाे. इसलिए अब वह धारणा खत्म हाे गयी कि यह काम सिर्फ लड़के ही कर सकते हैं. ताे गर्व करिए अपनी बेटियाें पर. वे परिवार पर भार नहीं हैं. ठीक है जाे गरीब परिवार है, उसके समक्ष आर्थिक परेशानियां रहती हैं. सरकार ने इस समस्या का भी निदान निकाल लिया है. बेटी के जन्म से लेकर शादी तक के लिए सरकार ने याेजना चला रखी है.देश के विभिन्न राज्याें में बेटियाें के लिए अलग-अलग कल्याणकारी याेजनाएं चल रही हैं.

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जरूरत है इनसे लाभ उठाने की. समय आ गया है इन याेजनाआें का अधिक से अधिक लाभ उठाते हुए बेटियाें काे अधिक से अधिक पढ़ायें, उसे अपने पैराें पर खड़ा करें, आत्मनिर्भर बनायें ताकि जीवन में कभी उसे किसी के सामने हाथ पसारने की नाैबत नहीं आये. उनके अंदर प्रतिभा है. उसे पहचानिए. उसका मनाेबल बढ़ाइए, उसे अवसर दीजिए. ये बेटियां कभी आपकाे शिकायत का माैका नहीं देंगी.