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  • Nov 2 2018 12:37PM

सक्रिय हुए राजनीतिक दल

सक्रिय हुए राजनीतिक दल

अनुज कुमार सिन्हा

झारखंड में विधानसभा चुनाव अगर समय पर हुए, ताे लगभग एक साल का वक्त बचा है. लाेकसभा में लगभग छह माह बाकी है. लेकिन झारखंड में राजनीतिक गतिविधियां तेज हाे गयी हैं. झारखंड मुक्ति माेरचा आैर आजसू के शीर्ष नेताआें (हेमंत साेरेन आैर सुदेश महताे) ने गांव-गांव की यात्रा आरंभ कर दी है. अमित शाह समेत भारतीय जनता पार्टी के कई शीर्ष नेता झारखंड का दाैरा कर सीधे मतदाताआें तक पहुंचने के लिए संदेश भी दे दिया है. चाहे सत्ता पार्टी हाे या विपक्ष, दाेनाें का सक्रिय हाेना स्वाभाविक है. कांग्रेस आैर जेवीएम भी पीछे नहीं है. सत्ता आैर विपक्ष दाेनाें यह अच्छी तरह जानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्राें के मतदाता उनका भविष्य तय करेंगे.

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इसलिए आदिवासियाें आैर मूलवासियाें की संख्या निर्णायक हाेगी. यही कारण है कि सत्ता आैर विपक्ष दाेनाें के लिए प्राथमिकताएं ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता हैं. 2014 के लाेकसभा आैर विधानसभा दाेनाें चुनावाें में भाजपा (एनडीए) काे पूर्ण बहुमत मिला था. इस बात काे विपक्ष भी याद रखे हुए है. विपक्ष काे पता है कि बगैर साथ लड़े एनडीए से लड़ने से नुकसान हाेगा. इसलिए सारी ताकत विपक्ष काे एक करने में लगायी जा रही है. चुनाव के दाे माह पहले तक हर दल यह बताने का प्रयास करेगा कि उसकी ताकत कम नहीं है. ऐसा इसलिए ताकि गठबंधन के वक्त उसे अधिक से अधिक सीटें मिल सके.

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झारखंड में झारखंड मुक्ति माेरचा मुख्य विपक्षी दल है. उसके साथ कांग्रेस आैर राजद ताे हैं ही, जेवीएम काे लाने का प्रयास आगे बढ़ा है. यानी चाराे मिल कर चुनाव लड़ना चाहते हैं. सीटाें का बंटवारा आसान नहीं हाेगा, क्याेंकि कई सीटें ऐसी हैं जिन पर दाे-दाे दलाें का मुख्य दावा बनता है. यह संकट सिर्फ विपक्ष का नहीं है. एनडीए के साथ भी यही समस्या है. यहां आजसू उसके साथ है. भले ही कई मुद्दाें पर सरकार के साथ वैचारिक मतभेद हाे, लेकिन सरकार में वह ताे है ही. आजसू पार्टी भी यही संदेश देना चाह रही है कि उसका अपना जनाधार है आैर वह अकेले भी चुनाव लड़ने की हिम्मत रखती है. झामुमाे ने अपनी यात्रा का दूसरा चरण बिरसा मुंडा के जन्म स्थान उलिहातू से आरंभ किया, जबकि आजसू ने शहीद स्थल (खरसावां) से. संदेश साफ है.

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रांची में बिरसा मुंडा की साै फीट ऊंची प्रतिमा बनने जा रही है. वहां ट्राइबल म्यूजिम भी हाेगा. यह सारा काम चुनाव के पहले तक पूरा हाे जायेगा. यानी चुनाव में सभी दल यही दावा करने जा रहे हैं कि बिरसा के सपनाें का झारखंड उन्हीं का दल बना सकता है या बना रहा है. पक्ष आैर विपक्ष अपने-अपने हिसाब से इसी मुद्दे काे लेकर जनता के बीच जानेवाले हैं. डर इस बात का है कि कहीं असली मुद्दे गाैण न हाे जायें. वक्त अा गया है जब जनता सीधे अपने जनप्रतिनिधियाें से पूछे कि आपने इन पांच सालाें में हमारे लिए, क्षेत्र के लिए क्या किया, चाहे ये प्रतिनिधि सत्ता पक्ष के हाें या विपक्ष के. जनता हिसाब मांगे ताकि ये सांसद-विधायक अपनी जिम्मेवारी समझ सकें.