aapne baat

  • Apr 22 2017 1:47PM

अपनी बात

पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) की अग्रिम शुभकामनाएं. पंचायत और पूरी पंचायती राज व्यवस्था को लेकर आज भी गांवों में निगेटिव चर्चा ही होती है. लेकिन, यह वह व्यवस्था है, जिससे हमें अपने गांव की तसवीर बदलने के मौके और अधिकार दोनों मिलते हैं. जैसे, गांव में कहां स्कूल बनना चाहिए, कहां कुआं बनना चाहिए, बच्चों के लिए खेल का मैदान कहां और कैसे बनेगा, यह सभी बातें तय करने का अधिकार पंचायतों को हैं. पंचायती राज व्यवस्था में गांवों का समग्र और समुचित विकास कैसे हो, इसकी तमाम तरह की व्यवस्थाएं दी गयी हैं.

फिर भी पंचायत, मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति के सदस्यों, जिला परिषद के सदस्यों के खिलाफ गांव के लोग क्यों हैं, इस सवाल पर पंचायती राज दिवस पर पंचायती राज से जुड़े सभी प्रतिनिधियों को विचार करना चाहिए. आखिर क्या कारण है कि मुखिया से लेकर जिला परिषद के चेयरमैन तक को गांव के लोगों ने बेईमान घोषित कर रखा है.

दूसरी ओर, यही लोग जरूरत पड़ने पर अपना काम कराने के लिए उसी मुखिया और जिला परिषद के चेयरमैन के पास जाते हैं. एक ओर आम लोगों में यह धारणा घर कर गयी है कि उनके मुखिया या जिला परिषद अध्यक्ष ने लूट मचा रखी है. दूसरी ओर, ये लोग उसी मुखिया और जिला परिषद अध्यक्ष से विकास की उम्मीद भी रखते हैं. ये कुछ बुनियादी सवाल हैं, जिनके जवाब पंचायत प्रतिनिधियों को ढूंढ़ने होंगे. लोगों में ऐसी धारणा क्यों बनी, उन पर विचार करना होगा. उन्हें आत्ममंथन करना होगा कि जिन लोगों ने उन्हें वोट दे कर अपना जनप्रतिनिधि चुना, वही लोग आज उन्हें सम्मान क्यों नहीं दे रहे?

पंचायती राज के प्रतिनिधि इस बात से परेशान हैं कि सरकार उन्हें फंड नहीं देती. सरकार ने उन्हें अधिकार नहीं दिये हैं. सरकारी अधिकारी पंचायत राज प्रतिनिधियों का सम्मान नहीं करते. पंचायतनामा, इस अंक में पंचायती राज के पास क्या-क्या अधिकार हैं, कैसे पंचायती राज व्यवस्था मजबूत हो रही है, कैसे तमाम परेशानियों के बावजूद चुनिंदा पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्र में विकास का काम करवा रहे हैं, कैसे तसवीर बदल रही है जैसे सवालों का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की है. इस अंक में आपको पंचायती राज के बारे में विशेष तौर पर जानकारी देने की कोशिश की गयी है. यह भी बताने का प्रयास किया गया है कि अगर कोई परेशानी या अड़चन है, तो उसे कैसे दूर सकते हैं.  पंचायतनामा की हर बार यही कोशिश होती है कि पंचायत प्रतिनिधियों को वैसे मुद्दों के बारे में जागरूक किया जाये, जिससे गांव और पंचायत मजबूत हों. सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों को आसानी से हासिल हो सके. अगर, किसी पंचायत ने बेहतर काम किया है, कुछ अच्छी पहल की है, तो उसे आप तक पहुंचाने की भी कोशिश होती है, ताकि उनके काम से दूसरे भी प्रेरणा ले सकें. पंचायतनामा का यह अंक आपको कैसा लगा, हमें जरूर बताइयेगा. हमें आप ई-मेल, मोबाइल, व्हाट्सएप पर भी अपनी प्रतिक्रिया या सुझाव भेज सकते हैं. आप मोबाइलवाणी के नंबर पर मिस्ड कॉल करके भी अपनी समस्या, सुझाव या किसी भी प्रकार की सार्वजनिक समस्या को दर्ज करा सकते हैं. आपकी आवाज को हम संबंधित अधिकारियों या विभाग तक पहुंचायेंगे.

नमस्कार,

संजय मिश्र

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