aapne baat

  • Jul 4 2017 1:39PM

आगे आयें और हमसफर बनें

आगे आयें और हमसफर बनें
वक्त के जैसे पहिये लगे होते हैं, वह सरपट भागता है. एक साल पहले पंचायतनामा रिलांच किया गया था. साल बीतते पता ही नहीं चला. सरकारें भले ही साल के अंत में लेखा-जोखा न दें, लेकिन हमें अपनी जिम्मेदारी का एहसास है. आपके स्नेह के कारण पंचायतनामा यह सफर पूरा कर पाया है. पंचायतनामा के हमसफर बनने के लिए आपका हार्दिक आभार. मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं कि नये दौर की पत्रकारिता में हम सभी ग्रामीण भारत की अनदेखी करते हैं.

पत्रकारिता शहरों पर केंद्रित होकर रह गयी है. आसान भी है, चंद रिपोर्टर शहर को आसानी से कवर कर लेते हैं. यह आराम तलब पत्रकारिता का दौर है. दूसरे, इस दौर में सभी बाजार के आगे नतमस्तक हैं. बाजार ने एक नया जुमला दिया है, अपमार्केट प्रोडक्ट. इसमें बाजार यह बताता है कि आपको गरीब इलाकों पर ध्यान नहीं देना है, केवल शहरी इलाकों पर केंद्रित खबरें ही करनी है. ऐसे में ग्रामीण इलाके खबरों के केंद्र में नहीं रहते.
 
प्रभात खबर समूह को अपनी जिम्मेदारी का एहसास है. हम सभी जानते हैं कि देश की करीब 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है और पूरे देश में दो लाख 39 हजार ग्राम पंचायतें हैं. लेकिन, समस्या यह है कि ग्रामीण जनता को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होती. पंचायतनामा में हमारा केंद्र बिंदु यही ग्रामीण तबका है जिस तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचता है. पंचायतनामा के जरिये हम लोगों तक पंचायतों से जुड़ी सूचनाएं पहुंचाते हैं, उनकी जानकारी देते हैं. हमारा मानना है कि यदि ग्रामीण भारत और खासकर महिलाएं सशक्त होंगी, तो झारखंड की तसवीर बदल जायेगी. पंचायतनामा ने हाल के दिनों में आजीविका मिशन के साथ मिल कर महिलाओं के लिए पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया.
 
अगर गौर करें तो हम पायेंगे कि देश के कई स्थानों पर पंचायतों के माध्यम से अभिनव प्रयोग हो रहे हैं. मुझे लगता है कि हमें इन प्रयोगों का लाभ उठाना चाहिए. मसलन, केरल के कोट्टायम जिले का एक वार्ड देश का पहला डिजिटल पंचायत वार्ड बन गया. अयमानम ग्राम पंचायत की अपनी वेबसाइट है. इस वेबसाइट में वार्ड में रहनेवाले लोगों की टेलीफोन डायरेक्टरी समेत रक्त दान करनेवालों की जानकारी दर्ज है. इसी तरह लड़कियों की कमी से जूझ रहे हरियाणा में जींद की बीबीपुर पंचायत ने अनूठी पहल करते हुए लोगों से अपनी बेटी के साथ सेल्फी खींच कर उसे भेजने को कहा. ‘सेल्फी लो और इनाम पाओ’ नामक इस प्रतियोगिता में चयनित तसवीरों को पंचायत की ओर से इनाम दिया गया. बीबीपुर ग्राम पंचायत ने बेटी बचाने की यह अभिनव मुहिम शुरू की और सारे देश का ध्यान आकर्षित किया.
 
हमारा मानना है कि तकनीक के इस युग में सुनी सुनायी बातों का दौर गया. अब जमाना फर्स्ट हैंड का है. दुनिया आपकी जुबानी आपकी कहानी सुनना चाहती है. पंचायतनामा के माध्यम से हमने ऐसी महिलाओं को मंच प्रदान करने की पहल की है. सशक्तीकरण की इस मुहिम के तहत महिलाओं को उनके अधिकारों, समस्याओं और बदलाव के बारे जानकारी दी जाती है. सूचनाओं और अधिकारों से उन्हें लैस किया जाता है. अब वे ग्रामीण झारखंड की समस्याओं और बदलाव के बारे में रिपोर्ट भेजती है जिन्हें पंचायतनामा में स्थान दिया जाता है. आप सब से अनुरोध है कि आप भी आगे आयें और पंचायतनामा के इस सफर के हमसफर बनें, हमें बेहद प्रसन्नता होगी.
 
आशुतोष चतुर्वेदी
प्रधान संपादक
प्रभात खबर समूह