aapne baat

  • Sep 20 2017 2:01PM

अपनी बात

मुख्यमंत्री रघुवर दास इन दिनों अपनी जनसभाओं में, गांवों के विकास के कार्यक्रम में पंचायत स्वशासन परिषद का जिक्र जरूर करते हैं. आखिर में पंचायत स्वशासन परिषद क्या है. इससे क्या सचमुच पंचायती राज व्यवस्था को कुछ लाभ होनेवाला है. क्या पंचायतों को स्वशासन देने का सपना इस परिषद के बैनर तले ही पूरा होगा. तमाम सवाल उठ रहे हैं.

ज्यादातर पंचायती राज प्रतिनिधियों को पंचायत स्वशासन परिषद के बारे में ठीक-ठीक कोई जानकारी भी नहीं है. कुछ ने इसका नाम तो सुना है, लेकिन इसके बारे में थोड़ी जानकारी भी नहीं है. परिषद के नाम के साथ स्वशासन जुड़ा है, तो कुछ पंचायती राज प्रतिनिधि यह बता देते हैं कि पंचायती राज व्यवस्था को स्वशासन देने का काम यह परिषद करेगी. सवाल यह भी उठ रहा है कि पंचायती राज व्यवस्था क्या अब नवगठित पंचायत स्वशासन परिषद के हाथों होगी. क्या पंचायती राज विभाग की भूमिका कम हो जायेगी.

बहुत सारे सवाल हैं, जिनका जवाब न तो विभाग दे रहा है और न ही कोई ऐसी एजेंसी है, जिसके पास इस संबंध में पुख्ता जानकारी है. पंचायतनामा की टीम ने पंचायत स्वशासन परिषद को लेकर इसके विशेषज्ञों से जानकारी लेने की कोशिश की है. पंचायत प्रतिनिधियों के मन में जो सवाल हैं, उसका जवाब ढूंढ़ने का प्रयास किया है. यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या पंचायत स्वशासन परिषद से पंचायती राज प्रतिनिधियों का काम आसान होगा या इस परिषद से पंचायती राज के कामकाज में एक और पेंच फंस जायेगा. विशेषज्ञों ने जो बताया है उसके मुताबिक स्वशासन परिषद के गठन की पहल तो अच्छी बात है लेकिन सरकार की मंशा को लेकर उनके मन में भी बहुत सारी आशंकाएं हैं.

पहले से ही पंचायती राज प्रतिनिधियों को अधिकार नहीं दिया गया है. कुछ अधिकार मिले भी हैं, तो वे अधिकारियों की फाइलों में कैद हैं. अधिकारी न तो पंचायती राज प्रतिनिधियों को सम्मान देना चाहते हैं और न ही गांवों के विकास कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी को लेकर खुश हैं.

स्वशासन परिषद से यह हो सकता है कि पंचायती राज प्रतिनिधियों की शिकायत सुनने वाली एक संस्था अस्तित्व में आ जायेगी लेकिन अगर, इस संस्था की कमान भी नौकरशाहों के हाथ में रहीं, तो इसका लाभ कम और नुकसान ज्यादा होगा. पंचायत प्रतिनिधि मुख्यमंत्री रघुवर दास की नेक नीयती पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन वे साफ तौर पर कहते हैं कि मुख्यमंत्री को उनके अधिकारी गलत जानकारी देते रहते हैं. इसका नतीजा यह हुआ है कि पंचायती राज व्यवस्था का पूरा लाभ राज्य को नहीं मिल रहा है. पंचायतनामा ने इस अंक में पंचायत स्वशासन परिषद की परिकल्पना को लेकर जो तथ्य हैं, उन्हें आप पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश की है. हमारी हमेशा यह कोशिश रहती है कि पंचायतनामा का हर अंक आपके लिए सूचनाओं के ख्याल से संग्रहणीय हो. आप पंचायतनामा के माध्यम से और कौऩ सी जानकारी चाहते हैं, हमें जरूर बताइए. आपको यह अंक कैसा लगा, हमें जरूर बताइएगा. आप टेलीफोन, मोबाइल, ई मेल और व्हाट्सएप पर हमसे संपर्क कर सकते हैं.

नमस्कार,

संजय मिश्र

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