aapne baat

  • Oct 25 2017 2:06PM

अपनी बात

अपनी बात

16 अक्तूबर को जब पंचायतनामा का यह अंक आपके हाथों में होगा. उस दिन हम खाद्य सुरक्षा दिवस मना रहे होंगे. राजधानी रांची से लेकर प्रखंड स्तर तक खाद्य सुरक्षा पर गोष्ठियां व सेमिनार होंगे, लेकिन हकीकत यह है कि साल दर साल खाद्य सुरक्षा दिवस मनाये जाने के बावजूद झारखंड में कुपोषण का कलंक नहीं मिट पा रहा है. दूसरे शब्दों में कहें, तो कलंक का यह टीका हर साल और गहरा होता जा रहा है. कुपोषण के कारण झारखंड में बच्चों की मृत्यदर अधिक है. बच्चों का विकास ठीक से नहीं हो पा रहा है.

इस साल राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा के जो आंकड़े आए थे, उन आंकड़ों से झारखंड की भयावह तसवीर उभर कर सामने आती है. यह तब है, जब देश के उन चुनिंदा राज्यों में झारखंड शुमार है, जहां पोषण मिशन चलाया जा रहा है. झारखंड में यह स्थिति क्यों हैं. इसे जानना व समझना बहुत ही जरूरी है. राज्य के कई शहरों में आजकल रोटी बैंक नाम से कई स्वयंसेवी संस्थाएं सक्रिय हैं. ये संस्थाएं भूखों को रोटी मुहैया कराने का काम कर रही है. सरकार की एक दर्जन से अधिक योजनाएं हैं, जिसमें हर व्यक्ति को अनाज मुहैया हो सकता है. फिर भी झारखंड में खाद्य सुरक्षा और कुपोषण की स्थिति बेहद खराब है. क्यों. 

पंचायतनामा ने इन सवालों को लेकर सरकार के खाद्य व आपूर्ति मंत्री सरयू राय और राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष सुधीर प्रसाद से बात करने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लेखा-जोखा तैयार किया है. इस अंक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी खाद्य सुरक्षा समिति के सलाहकार व अन्य विशेषज्ञों से यह जानने की कोशिश की गयी है कि आखिर मर्ज क्या है, जिसका इलाज नहीं हो पा रहा है. खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों को क्यों नहीं मिल पा रहा है. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में क्या पेच है, इसे समझने के लिए पंचायतों के लोगों से भी बातचीत की गयी है. पंचायतनामा की टीम ने पूरी कोशिश की है कि यह अंक आपके लिए संग्रहणीय बने. अगर आप पंचायत में रहते हैं, तो पंचायतों को खाद्य सुरक्षा के लिए क्या करना है, इसकी जानकारी राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष सुधीर प्रसाद ने दी है. झारखंड की क्या हालत है. इस पर बलराम ने बहुत ही सहज व सरल शब्दों में बताया है. झारखंड कैसे खाद्य सुरक्षा पा सकता है, इस पर हलधर महतो के सुझाव हैं. हर पन्ने के नीचे खाद्य सुरक्षा के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी देने की कोशिश की गयी है, जो आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं. 

...और आपके सुझाव- पंचायतनामा को लेकर आपने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये हैं. देवघर के मोहनपुर, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम से पाठकों ने सुझाव दिये हैं कि कीटनाशकों का इस्तेमाल कैसे और कितना करें. इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट होनी चाहिए. यह भी बताया जाना चाहिए कि कीटनाशकों के प्रयोग से क्या खतरे हैं. कीटनाशकों का क्या विकल्प हो सकता है. कीटनाशकों का विकल्प कहां से उपलब्ध हो सकता है. यह सुझाव देने वाले आप सभी पाठकों का धन्यवाद. अगले अंक में इस पर हम पूरी रिपोर्ट देने की कोशिश करेंगे. 

आपको यह अंक कैसा लगा, हमें जरूर बताइएगा. आप टेलीफोन, मोबाइल, ई-मेल और व्हाट्सएप पर हमसे संपर्क कर सकते हैं.

नमस्कार,

संजय मिश्र

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