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  • Dec 1 2017 2:00PM

झारखंड आैर पर्यटन

झारखंड आैर पर्यटन

वर्ल्ड ट्रेवेल एंड टूरिज्म काउंसिल की रिपाेर्ट आयी है. वर्ल्ड टूरिज्म में अर्थव्यवस्था के हिसाब से भारत सातवीं सबसे बड़ी ताकत बन कर उभरा है. 14.1 ट्रिलियन (रुपये) का भारतीय पर्यटन उद्याेग है. जीडीपी में 9.6 फीसदी पर्यटन का याेगदान. पर इसमें झारखंड अबतक पीछे. सबसे ज्यादा पर्यटक तमिलनाडु में जाते हैं. इसके बाद यूपी, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक का स्थान आता है.

गुजरात आैर राजस्थान जैसे नीचे हैं. नाैंवा आैर दसवां स्थान. शीर्ष दस में झारखंड नहीं. ऐसे में प्राकृतिक साैंदर्य से भरपूर झारखंड के लिए अवसर है. साथ में चुनाैती भी. यह सही है कि झारखंड की पहचान खनिजाें से है. लेकिन प्रकृति ने झारखंड काे अाैर भी बहुत कुछ दिया है. झारखंड में सबसे ज्यादा पर्यटक पश्चिम बंगाल से आते हैं. प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार विभूति भूषण के कारण बंगाल से पर्यटक घाटशिला-गालूडीह अाते रहे हैं. बेहतरीन जलवायु के कारण रांची आैर हजारीबाग भी पसंद की जगह रही है.

रवींद्र नाथ टैगाेर अपनी अस्वस्थ बेटी के स्वास्थ्य लाभ के लिए हजारीबाग में अाकर रहे थे. पश्चिम सिंहभूम में सारंडा है. कभी इसे एशिया का सबसे घना जंगल माना जाता था. अभी भी हेल्थ टूरिज्म के लिए बेहतरीन स्थान. इसी सारंडा के बीच बसा है किरीबुरू-मेघाहातुबुरु. बादल के ऊपर का आनंद यहां मिलता है. ऐसे दृश्य काे देखने के लिए लाेग सिक्किम-हिमाचल जाते हैं. यहां पहाड़ियाें के बीच से सूर्याेदय-सूर्यास्त का बेहतरीन दृश्य दिखता है, लेकिन आम पर्यटकाें के ठहरने की व्यवस्था नहीं है.

यह सुविधा देनी हाेगी. नेतरहाट ताे सूर्याेदय के लिए प्रसिद्ध है ही. तमिलनाडु के नंबर वन हाेने के पीछे समुद्री तट (मेरीनी बीच) आैर राज्य में प्रसिद्ध मंदिराें का हाेना है. झारखंड में समुद्री तट ताे नहीं लाया जा सकता लेकिन यहां भी प्राचीन काल के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं. बाबा मंदिर (देवघर), बासुकिनाथ, रजरप्पा, देऊड़ी, इटखाेरी, नगर ऊंटारी अादि. देवघर की पूरी अर्थव्यवस्था ताे बाबा मंदिर पर ही टिकी है. मुख्यमंत्री रघुवर दास रजरप्पा मंदिर के विकास पर 200 कराेड़ आैर राज्य में पर्यटन पर 2000 कराेड़ खर्च करना चाहते हैं. ऐसे प्रयासाें से झारखंड में पर्यटन उद्याेग बढ़ेगा ही. झारखंड में सैकड़ाें जलप्रताप हैं. इन जलप्रपाताें की खूबसूरती देखने के लिए पर्यटकाें काे झारखंड लाना हाेगा. लाेध, हुंडरू, जाेन्हा, पेशरार, दशम, हिरणी ताे चंद उदाहरण हैं.

बेतला नेशनल पार्क हाथी, जंगली भैंसा के लिए प्रसिद्ध है. कभी-कभार बाघ दिखता है. कई बार पर्यटक निराश हाे जाते हैं. बेतला के बीच में गांव बसे हैं. बीच से चाैड़ी सड़कें बन रही हैं. बड़े-बड़े वाहन गुजरेंगे ताे ऐसे में जानवर कहां दिखेंगे. हजारीबाग अभ्यारण्य बेकार पड़ा है. पाैराणिक कथाआें में जिन स्थानाें का वर्णन मिलता है, उनमें से कई झारखंड में हैं. लाेगाें काे इनके बारे में बताना हाेगा. इस अंक में हमने प्रयास किया है कि जिन ग्रामीण पर्यटन स्थलाें के बारे में लाेगाें काे जानकारी नहीं है या कम जानकारी है, उसके बारे में अधिक से अधिक सामग्री दी जाये.

साथ ही प्रसिद्ध पर्यटन स्थलाें के बारे में बताया जाये. उद्देश्य है दूसरे राज्याें से भी झारखंड में पर्यटकाें काे लाया जा सके. साथ ही अपने बीच में छिपे स्थलाें के बारे में सभी जान सकें. विदेशी पर्यटक बाेधगया आते हैं, उन्हें झारखंड में बुद्ध से जुड़े स्थलाें तक लाने का प्रयास हाेना चाहिए. जैनियाें की अास्था का प्रमुख केंद्र पारसनाथ काे आैर विकसित करना हाेगा. बिरसा मुंडा से जुड़े स्थलाें (उलिहातू, डाेम्बारी, रांची जेल, समाधिस्थल) के बारे में लाेग जानना चाहते हैं. झारखंड की प्राथमिकता में अब पर्यटन दिख रही है. उम्मीदें बढ़ी हैं. इसका असर ग्रामीण क्षेत्राें में भी दिखेगा. स्थानीय लाेगाें काे राेजगार भी मिलेगा आैर राज्य की आय भी बढ़ेगी.

अनुज कुमार सिन्हा

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