aapne baat

  • Dec 19 2017 2:07PM

नाम कमाइए, बदनामी नहीं

 झारखंड की बड़ी आबादी (लगभग 76 फीसदी) ग्रामीण क्षेत्राें में रहती है, गांव-पंचायत में बसती है, इसलिए सिर्फ शहरी क्षेत्र काे विकसित करने से राज्य का विकास या भला नहीं हाे सकता है. सरकार पंचायताें पर (ग्रामीण इलाकाें) बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करती है. पंचायताें काे निर्णय करने का बड़ा अधिकार भी दिया गया है. पंचायताें, मुखिया, पंचायत प्रतिनिधियाें काे तय करना है कि उनका गांव-पंचायत कैसे विकास करेगा, प्राथमिकताएं क्या हाेंगी. लेकिन झारखंड की हकीकत कुछ आैर दिखती है. जहां के मुखिया, पंचायत प्रतिनिधि सतर्क हैं, ईमानदार हैं, जुनूनी हैं, सकारात्मक साेच के हैं, जागरूक हैं, वहां अच्छे काम हाे रहे हैं, बाकी जगह नहीं.
13वें वित्त आयाेग के तहत  आधारभूत संरचनाओं पर 1567 कराेड़ रुपये खर्च किये गये. 14वें वित्त आयाेग ने यह राशि बढ़ा कर 6000 कराेड़ कर दी है. यह राशि पांच वर्षाें (2015-20) में मिलेगी. स्पष्ट है कि पैसे की कमी नहीं है. महालेखाकार की रिपाेर्ट में पंचायताें में गड़बड़ी का जिक्र है. पंचायत भवन आैर दुकानाें के लिए जाे राशि दी गयी, उसमें से 9.79 कराेड़ बैंकाें में ही पड़े रह गये. 2011-16 के दाैरान 799.89 कराेड़ रुपये बगैर स्वीकृति के खर्च कर दिये गये. कहीं आधा पुल बना कर छाेड़ दिया गया, कहीं पुल बन गया आैर संपर्क सड़क नहीं बनी. ऐसे में पुल बेकार. पंचायत भवन अधूरा, विद्यालय भवन आधा बना कर छाेड़ दिया गया. आधा तालाब खाेद कर छाेड़ दिया गया. पैसा निकाल लिया गया. यह बगैर मुखिया-पंचायत सेवक की सांठगांठ के नहीं हाे सकता. कम से कम 60 कराेड़ रुपये ऐसे निर्माण पर खर्च किये गये, जाे उपयाेग के लायक ही नहीं है. यह पैसा बर्बाद ही गया है.
खूंटी में अनियमितता करनेवाले 14 अभियंताआें के खिलाफ एफआइआर की गयी है. अन्य जगहाें पर भी ऐसी ही कार्रवाई हाेगी, दाेषी दंडित हाेंगे, तभी सरकारी पैसे काे लूटने की आदत खत्म हाेगी. कुछ मुखिया ही गड़बड़ निकल गये हैं. चास के दाे मुखिया आैर जरमुंडी के एक मुखिया हटेंगे. इन पर वित्तीय अनियमितता का आराेप है. जिसे जहां माैका मिला, लगे लूटने. पंचायताें में भ्रष्टाचार चिंता का विषय है. मुखिया, पंचायत सेवक आैर सप्लायर की मिलीभगत से 17 हजार की साेलर लाइट 31.5 हजार में खरीदी गयी. कराेड़ाें की गड़बड़ी. सरकार पैसा दे सकती है, लेकिन चाैकस ताे गांव के लाेगाें काे हाेना हाेगा. पैसा ताे उनका ही है, उनके लिए है. गांवाें के लाेगाें काे जागना हाेगा. इन तमाम कमियाें के बावजूद इसी झारखंड की कई पंचायताें में अदभुत काम हाे रहे हैं. खास कर आेरमांझी के आरा-केरम गांव में. मत भूलिए झारखंड के पाेटका (पूर्वी सिंहभूम) की एक पंचायत काे. पूरे गांव में हर घर का नामकरण बेटियाें के नाम पर किया गया है. अदभुत आैर सराहनीय फैसला. इस पंचायत के हर व्यक्ति का अभिनंदन. कहीं लाेग अपने घर काे साफ नहीं रखते हैं, लेकिन सिमडेगा में शाैचालय की दीवार पर सुंदर पेंटिंग दिखेगी. कहीं गांव की महिलाएं मिनी एटीएम चला रही है, ताे कहीं शराब के खिलाफ जागरूकता अभियान. इसलिए निराश हाेने की जरूरत नहीं है. सिर्फ इतना ध्यान देना हाेगा कि सरकारी पैसे का उपयाेग हाे.
आपके पैसे से काम हाे, काेई लूट कर खा नहीं जाये. यही ताे आपकाे देखना है. याद रखिए, जाे भी गड़बड़ी करेगा, आज नहीं ताे कल पकड़ा जायेगा ही, जेल जायेगा ही. इसे मुखिया भी समझ लें. बेहतर करेंगे, इतिहास याद करेगा. बेईमानी करेंगे ताे फिर वे जेल-जेलर काे याद करेंगे. इस अंक में हमने पूरे झारखंड की पंचायताें का लेखा-जाेखा दिया है. उम्मीद है आपकाे पसंद आयेगा.

अनुज कुमार सिन्हा

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