aapne baat

  • Oct 19 2016 1:43PM

अपनी बात : विकास को संजोता हिंदी पाक्षिक

अपनी बात : विकास को संजोता हिंदी पाक्षिक

सबको भरपेट खाना मिलना चाहिए. सबको भरपेट खाना मिले, इसे सुनिश्चित करने का काम सरकारों का होता है. झारखंड में ही खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू है. मतलब झारखंड के हर एक आदमी को भरपेट खाना मिलेगा. इसकी गारंटी सरकार लेती है. क्या इस गारंटी के बाद भी सभी झारखंडियों को दो जून की रोटी नसीब होती है. बिल्कुल नहीं. गरीबों के हिस्सों का अनाज कालाबाजारी में बेचकर अपने लिए ऐश की जिंदगी का बंदोबस्त करने वाले अधिकारियों व व्यापारियों के गंठजोड़ ने व्यवस्था को ही भ्रष्ट बना दिया है. 

झारखंड के एक बड़े अधिकारी अनौपचारिक बातचीत में यह बताते हैं कि व्यवस्था को किस तरह भ्रष्ट किया गया है. इसे समझने के लिए हमें या किसी को भी कोई विशेष कष्ट करने की जरूरत नहीं है. गांव के सरकारी अनाज (जन वितरण प्रणाली) की दुकान पर खड़े हो जाइए, पता चल जायेगा कि गरीब को अनाज देने के नाम पर क्या लूट मची हुई है. सरकारी अनाज (जन वितरण प्रणाली) के दुकानदारों से बात कीजियेगा, तो वे खुल कर बताते हैं कि कैसे उन्हें गोदाम से ही घटतौली करके अनाज कम दिया जाता है. फिर हर महीने कैसे उन्हें मार्केटिंग अफसर से लेकर जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को नजराना देना पड़ता है. कभी-कभी नापतौल विभाग के इंस्पेक्टर को भी घूस देनी पड़ती है. इन सबके बाद उन्हें अपना और अपने पूरे परिवार का पेट पालना है, तो बेईमानी करनी ही पड़ती है.

इसी तरह खाद्य सुरक्षा तय करने की तमाम योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है. अब इस भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए कंप्यूटराइज्ड इंतजाम किये जा रहे हैं, तो सबसे अधिक दर्द उस वंचित समुदाय को हो रहा है, जिसे खाद्य सुरक्षा की सबसे अधिक जरूरत है.

झारखंड में खाद्य सुरक्षा तय करने के लिए जो सबसे जरूरी काम होना चाहिए, वह काम नहीं हो पा रहा है. अफसोस कि उस पर सरकार की दृष्टि भी नहीं है. झारखंड में मोटे अनाज की उपज न के बराबर हो गयी है. 

कृषि विभाग किसानों के बीच गेहूं व धान के अलावा अन्य फसलों की खेती को बढ़ावा देने का कोई सार्थक प्रयास नहीं कर रहा है. अगर झारखंड में कृषि उपज में इजाफा नहीं होगा, तो खाद्य सुरक्षा का सपना कभी भी सच नहीं हो सकता है. मछली पालन के क्षेत्र में जरूर झारखंड में स्थितियां बदली हैं.

सरकारी प्रयास से मछली पालन के क्षेत्र में झारखंड आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है. यह बहुत सुकून देने वाली स्थिति है. लेकिन खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में यह कुछ भी नहीं है.

सरकार को कृषि क्षेत्र में, दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में तुरंत ध्यान देना चाहिए. नहीं तो जन वितरण प्रणाली के गेहूं, चावल, चीनी, आंगनबाड़ी के पूरक पौष्टिक आहार, स्कूलों के मिड डे मील से स्थिति नहीं बदलने वाली है. साथ ही इस क्षेत्र में सबकी भागीदारी तय करनी होगी एवं खेती-किसानी पर सरकार को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

पंचायतनामा का यह अंक आपको कैसा लगा, हमें जरूर बताइएगा. आप हमें अपने सुझाव से भी अवगत करा सकते हैं कि पंचायतनामा आपके लिए और उपयोगी कैसे बने.

नमस्कार