aapne baat

  • Aug 23 2019 5:08PM

उपराष्ट्रपति आैर पंचायतनामा

उपराष्ट्रपति आैर पंचायतनामा

अनुज कुमार सिन्हा

किसी भी अखबार-पत्रिका के लिए यह गर्व का क्षण हाे सकता है, जब वह अखबार-पत्रिका देश के उपराष्ट्रपति के हाथ में हाे आैर वे उसे पढ़ रहे हाें. उसके बारे में जानकारी हासिल कर रहे हाें. ऐसा ही एक दृश्य देखने काे मिला, जब प्रभात खबर की 35वीं वर्षगांठ पर आयाेजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू 10 अगस्त काे रांची आये थे. पंचायतनामा प्रभात खबर का सहयाेगी पाक्षिक अखबार है आैर इस नाते प्रभात खबर की 35वीं वर्षगांठ समाराेह का हिस्सा भी था. स्वभाविक था कि उपराष्ट्रपति काे फाइल में प्रभात खबर के साथ-साथ पंचायतनामा भी दिया गया था. मंच पर उपराष्ट्रपति के ठीक बगल में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास बैठे थे. उनके हाथ में पंचायतनामा था. उपराष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री से पंचायतनामा के बारे में पूछा. उसे अपने हाथ में लिया आैर देखा. दरअसल उपराष्ट्रपति काे पहले से यह जानकारी नहीं थी कि प्रभात खबर समूह ग्रामीण क्षेत्राें के लिए पंचायतनामा नामक पाक्षिक अखबार कई साल से निकाल रहा है. खुद मुख्यमंत्री ने उन्हें पंचायतनामा के बारे में बताया कि कैसे यह पाक्षिक अखबार पंचायतनामा आज झारखंड के गांव-गांव में पहुंच चुका है. कैसे यह अखबार पूरे झारखंड काे राज्य में हाे रहे विकास आैर बदलाव के बारे में बताता है. यह गांवाें की उन खबराें काे प्रमुखता देता है जिसे आमताैर पर दैनिक अखबाराें में जगह मिल नहीं पाती. उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का अधिकांश समय गांवाें में बीता है. जब वे सक्रिय राजनीति में थे, तभी से झारखंड क्षेत्र में वे आते रहे हैं. इसका उन्हाेंने जिक्र भी किया आैर कहा कि 20-25 साल पहले जब वे इस क्षेत्र में आते थे, ताे उन्हें सुबह-सुबह प्रभात खबर ही मिलता था. इसलिए जब उन्हें पंचायतनामा के बारे में बताया गया ताे काफी रुचि ली. उन्हें बताया गया कि कैसे पंचायतनामा द्वारा गांव की दीदियाें काे पत्रकारिता का प्रशिक्षण दिया गया आैर अब वे पत्रकारिता कर रही हैं. अखबाराें में लगातार लिख रही है. प्रभात खबर की 35वीं वर्षगांठ के अवसर पर पत्रकारिता से उम्मीदें विषय पर दूसरे दिन संगाेष्ठी का आयाेजन किया गया. देश के चार प्रमुख पत्रकार माैजूद थे. उन्हें भी पंचायतनामा के बारे में जानकारी दी गयी. प्रसिद्ध पत्रकार पद्मश्री आलाेक मेहता ताे काफी प्रभावित हुए आैर उन्हाेंने इस बात का जिक्र किया कि कैसे ग्रामीण क्षेत्राें के लिए अखबार निकालने का उनका सपना था. लेकिन, वे नहीं निकाल पाये. चाहे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू हाें या वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलाेक मेहता, दाेनाें जानते हैं कि आज के युग में ग्रामीण क्षेत्राें के लिए अलग से अखबार निकालना कितना आवश्यक है. साथ में कितनी कठिनाइयां भी इसमें हैं. देश की आय का बड़ा हिस्सा कृषि से आता है. सरकार की अधिकांश याेजनाएं ग्रामीण क्षेत्राें के लिए हाेती हैं, क्याेंकि बड़ी आबादी गांवाें में बसती है. ग्रामीण क्षेत्राें तक जानकारी देने के लिए अखबार आवश्यक है, लेकिन बड़े अखबाराें में इसके लिए जगह नहीं मिलती. इसलिए पंचायतनामा जैसे अखबार की जिम्मेवारी बढ़ जाती है.