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  • Feb 1 2019 7:14PM

40 साल से ग्रामसभा में ही निबट रहे मामले

40 साल से ग्रामसभा में ही निबट रहे मामले

कुमार गौरव
प्रखंड: बगोदर
जिला: गिरिडीह

गिरिडीह जिला अंतर्गत बगोदर थाना क्षेत्र से सात किमी दूर स्थित है पूर्व विधायक स्व महेंद्र सिंह का पैतृक गांव खंभरा. यह गांव आज आदर्श गांव की श्रेणी में आता है. इस गांव की सबसे बड़ी खासियत है कि पिछले 40 सालों से यहां का कोई भी मामला थाना नहीं पहुंचा. गांव को महेंद्र सिंह ने जमींदारी प्रथा से मुक्त कराया था. एक समय गांव में सूदखोरों का आतंक था. लोग उनसे परेशान थे. उनकी जमीन लूटी जा रही थी. सूद के लेन-देन के आगे किसान लाचार थे. इसे लेकर महेंद्र सिंह ने जनवादी अग्र ग्रामीण मोर्चा का गठन कर गांव को सूदखोरों से मुक्त कराकर वर्ष 1978 में ग्रामसभा खंभरा का गठन किया था. उस ग्रामसभा के माध्यम से गांव के लड़ाई-झगड़े को सामाजिक पहल कर निबटाया जाता था. यही कारण है कि खंभरा गांव एक आदर्श गांव के रूप में उभरा है

ग्रामसभा की अनुमति के बगैर जंगल में नहीं कटती लकड़ी
पिछले 40 सालों से अबतक खंभरा और वनपुरा गांव से एक भी मामला थाना नहीं पहुंचा है. यह गांव सही मायने में एक आदर्श गांव की मिसाल पेश करता है. गांव में जंगल है, लेकिन जंगल में ग्रामसभा की अनुमति के बिना लकड़ी काटने पर प्रतिबंध है. ऐसे करते पकड़े जाने पर उन्हें सामाजिक दंड दिया जाता है. आज भी ग्रामसभा का संचालन बेहतर तरीके से किया जा रहा है. कोई भी लड़ाई, झगड़े, जमीन विवाद, चोरी जैसी घटना को गांव में ही सुलझाया जाता है. ग्रामसभा के माध्यम से ही दोषी को आर्थिक व सामाजिक तरीके से दंड दिया जाता है. दंड नहीं मानने पर उन्हें सामाजिक दबाव दिया जाता है.

ग्रामसभा मछली बेच कर चुकाती है ग्रामीणों का बिजली बिल
खंभरा गांव में पक्की सड़क बनी है. बिजली की सुविधा के लिए यहां बिजली बिल की भरपाई सामूहिक रूप से की जाती है. इसके लिए ग्रामसभा द्वारा गांव के एक तालाब में मछली पालन किया जाता है. इससे हुई आमदनी से बिजली बिल चुकाया जाता है और यह परंपरा आज भी जारी है. बताते हैं कि ग्रामीणों द्वारा अपनी-अपनी जमीन को दान में देकर तालाब और चेकडैम का निर्माण कराया गया है. मॉडल सामुदायिक भवन का भी निर्माण गांव में कराया गया है. गांव में महेंद्र सिंह द्वारा बनाये गये शेड भी हैं.

महेंद्र सिंह के बनाये नियमों का आज भी हो रहा अनुपालन : हरेंद्र सिंह
भाकपा माले के सक्रिय सदस्य सह महेंद्र सिंह के भतीजे हरेंद्र सिंह ने बताया कि महेंद्र सिंह की परंपरा और बनाये गये नियमों का अनुसरण आज भी गांव के लोग करते आ रहे हैं. ग्रामसभा में दंडित किये गये ऐसे कई लोग हैं, जो इसे प्रेरणास्रोत मानते हैं. उन्होंने कहा कि एक समय की बात है, जब वनपुरा गांव में एक दुकान में निमकी, बिस्कुट और सिलाई मशीन की चोरी तीन युवकों ने कर ली. चोरी की जानकारी जब महेंद्र सिंह को हुई, तो उन्होंने अपने सूत्रों के माध्यम से पता लगाया और तीनों पकड़े भी गये. उन्हें ग्रामसभा में शारीरिक दंड के रूप में लाठी से पिटाई की गयी और आगे ऐसा नहीं करने की सख्त हिदायत दी गयी. उस घटना के बाद इन युवकों में बदलाव आया और आज गांव के तीनों युवक ईमानदारी से सरकारी नौकरी कर रहे हैं