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  • Sep 18 2018 4:11PM

निरक्षर हुए साक्षर, साक्षरता से बढ़ रहा है आत्मविश्वास

निरक्षर हुए साक्षर, साक्षरता से बढ़ रहा है आत्मविश्वास

अशोक सिंह

जिला : दुमका 

दुमका जिले में साक्षरता कार्यक्रम का स्वर्णिम इतिहास रहा है. 90 के दशक में शुरू हुआ साक्षरता अभियान संपूर्ण साक्षरता से वर्ष 2009-10 में अपने नये स्वरूप में साक्षर भारत कार्यक्रम के रूप में सामने आया, तो साक्षरता कर्मियों में एक बार फिर उत्साह आ गया. वे नयी ऊर्जा के साथ इस कार्यक्रम से जुड़ गये और उपलब्धियों का ग्राफ ऊंचा किया, लेकिन मार्च 2018 तक आते-आते यह कार्यक्रम एक बार फिर बंद हो गया. लंबे समय तक चले साक्षरता कार्यक्रम का सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.

साक्षरता अभियान से सामाजिक बदलाव
वर्ष 1991-92 से वर्ष 1995-96 तक चले पूर्व के साक्षरता अभियान की वजह से जिले में बड़ा सामाजिक बदलाव आया है. जागो बहना के माध्यम से जागरूक होकर महिलाएं घर से बाहर आयीं. विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़ कर अपने हक व अधिकारों की मांग करने लगीं, वहीं दूसरी ओर इस अभियान से बड़े पैमाने पर सामुदायिक नेतृत्व भी उभर कर सामने आया. आर्थिक दृष्टि से महिलाएं समृद्धि, दीदी बैंक तथा अन्य योजनाओं से जुड़ कर स्वावलंबी बनीं और उनमें आत्मनिर्भरता बढ़ी. इस अभियान के माध्यम से एक ओर दो लाख निरक्षर लोग साक्षर हुए, वहीं दूसरी ओर जिले में बड़ी संख्या में स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना हुई.

जिला साक्षरता समिति की वर्तमान उपलब्धि
वर्ष 2010 में झारखंड समेत पूरे देश में साक्षर भारत कार्यक्रम शुरू हुआ, तो तत्कालीन सर्वेक्षण के अनुसार दुमका जिले में 4 लाख 18 हजार 05 लोग निरक्षर पाये गये. वर्ष 2010-11 से वर्ष 2017-18 तक साक्षरता कार्यक्रम चला, जिसके बाद प्रखंडवार साक्षर व्यक्तियों की संख्या में वृद्धि होने लगी

साक्षरता का बढ़ता ग्राफ
(वर्ष 2010-11 से वर्ष 2017-18 तक साक्षरता कार्यक्रम)
प्रखंड               असाक्षर                     साक्षर
दुमका                 50,898                    45,875
जामा                  52,864                    46,650
जरमुंडी               59,318                    44,867
रामगढ़                58,222                    34,856
सरैयाहाट            48,649                    41,753
मसलिया             42,310                    31,289
शिकारीपाड़ा         39,949                   31,819
रानीश्वर              31,914                   30,806
काठीकुंड             21,303                  19,103
गोपीकांदर           12,578                   10,577

कुल मिलाकर देखा जाये, तो 4 लाख 18 हजार निरक्षरों में से वर्ष 2017-18 तक कुल 3 लाख 37 हजार 595 निरक्षरों को साक्षर किया जा चुका है.

साक्षरता दर में पुरुषों से आगे हैं महिलाएं
राज्य में महिला साक्षरता का प्रतिशत भले ही अभी पुरुष साक्षरता से काफी पीछे हो, लेकिन जिले में साक्षरता दर में सुधार के कारण साक्षर महिलाओं का प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा है. झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण, 2016 में यह बात उभर कर सामने आयी है. सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की वार्षिक साक्षरता में वृद्धि की दर पुरुषों से अधिक है. वर्ष 2001 से 2011 के बीच महिला साक्षरता में वार्षिक विकास दर 4.26 फीसदी रही है. इसी तरह 2011 से 14 के बीच यह वार्षिक दर 2.69 फीसदी रही, वहीं पुरुष साक्षरता की बात करें, तो दोनों अवधि में इनकी साक्षरता में वार्षिक विकास दर क्रमश: 1.42 फीसदी तथा 1.02 फीसदी रही. महिला साक्षरता में रांची सबसे आगे हैं, जहां 60 फीसदी से अधिक महिलाएं साक्षर हैं. सबसे पीछे पाकुड़ जिला है, जो कुल साक्षरता में भी सबसे पीछे है.

31वें स्थान पर है झारखंड
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, साक्षरता में राज्य का दूसरा पहलू यह है कि इसमें झारखंड सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में 31वें स्थान पर है. केवल उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, बिहार तथा आंध्र प्रदेश ही इसमें झारखंड से पीछे है. रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड की साक्षरता दर में 2.62 फीसदी की दशकीय वृद्धि दर्ज की गयी है. वर्ष 2014 में राज्य की साक्षरता दर 70.30 फीसदी थी, इसमें पुरुष साक्षरता दर 70.60 फीसदी तथा महिला साक्षरता दर 50.09 फीसदी है. दुमका जिले में महिला साक्षरता दर वर्ष 2001 में 32.35 फीसदी थी, जो 2011 में बढ़ कर 49.60 फीसदी हो गयी. इस तरह जिले की महिला साक्षरता दर में 17.25 फीसदी की दशकीय वृद्धि हुई है.

तीन चरण में 38 लाख लोग हुए साक्षर
वर्ष 2010 में जब राज्य में साक्षर भारत कार्यक्रम शुरू हुआ, तो पहले चरण में चार जिलों को चयनित किया गया. इसमें दुमका भी शामिल था. दूसरे चरण में 15 जिले और तीसरे चरण में एक जिले को शामिल किया गया. इस प्रकार राज्य के 20 जिलों में मार्च 2018 तक यह कार्यक्रम चला, जिसमें राज्य स्तर पर प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल 38 लाख निरक्षरों को साक्षर किया गया. इसकी शुरुआत के समय राज्य की साक्षरता दर 67 फीसदी थी, जो बढ़ कर लगभग 75- 80 फीसदी हो गयी है. साक्षरता कार्यक्रम से समाज में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई छोटे-छोटे और महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं.