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  • Sep 5 2018 9:35AM

खेती से रुका पलायन, महावीर का परिवार हुआ आत्मनिर्भर

खेती से रुका पलायन, महावीर का परिवार हुआ आत्मनिर्भर

मनोज वर्णवाल

पंचायत : चिरूडीह

प्रखंड : नावाडीह
जिला : बोकारो

बोकारो जिला अंतर्गत नावाडीह प्रखंड स्थित चिरूडीह पंचायत के बजरंग नगर निवासी महावीर महतो के पुत्र प्रमोद कुमार और दीपक कुमार अब रोजगार के लिए परदेस नहीं जायेंगे. किसान महावीर महतो ने अपनी कड़ी मेहनत से एक एकड़ खेत में मिर्च और बोदी के पौधे लगाये हैं, जो अब लहलहा रहे हैं. उम्मीद है कमाई भी अच्छी होगी. रोजगार के लिए पलायन करनेवाले ग्रामीण युवाओं के लिए यह प्रेरणा का स्रोत है.

परिवार के सहयोग खेती की, आज लहलहा रही है
किसान महावीर महतो कहते हैं कि गांव के कई युवक रोजगार के लिए हर साल अन्य प्रदेशों में जाते हैं. दीपक और प्रमोद भी इसमें शामिल होते थे. पिछले साल बाहर काम करने गये गांव के एक युवक की वहां मौत हो गयी थी. इस घटना से मन में काफी पीड़ा हुई. तब मैंने निश्चय किया अब बेटों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाने देंगे. गांव की जमीन में खेती कर दोनों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करेंगे. इस साल पत्नी देवंती देवी और पुत्रों के साथ योजना बनायी और पूर्वजों की एक एकड़ जमीन पर मिर्च और बोदी की खेती की. परिवार के सभी लोगों की मेहनत रंग लायी. आज इसकी चर्चा पूरे प्रखंड में हो रही है.

पपीता के एक हजार पौधे लगाने की है योजना : दीपक कुमार
महावीर के बेटे दीपक कुमार कहते हैं कि रोजगार की तलाश में गांव से बाहर जाना पड़ता था. वहां टावर लाइन या कपड़ा मिल में काम करते थे. 10-12 घंटे कड़ी मेहनत करायी जाती थी. इसके बाद भी कमाई से ज्यादा बचत नहीं होती थी. अब यहीं रह कर खेती से आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य है. मिर्च और बोदी के अलावा इस साल खेतों की मेढ़ पर एक हजार पपीता के पौधा लगाने की योजना है.

सिंचाई की नहीं है समुचित सुविधा : महावीर महतो
महावीर महतो के दूसरे बेटे प्रमोद कुमार कहते हैं कि खेत की हरियाली देख कर अब रोजगार के लिए अन्य प्रदेश में जाने से तौबा कर लिया. पिता व भाई के साथ यही खेती करूंगा. उन्होंने कहा कि खेती में सबसे बड़ी असुविधा सिंचाई को लेकर हो रही है. हालांकि सांसद मद से सिंचाई कूप तो मिला है, लेकिन पानी सूख जाने के कारण गर्मी में खेती नहीं कर पाते हैं. उस समय बेकार बैठ जाते हैं. यदि सोलर सिस्टम से डीप बोरिंग द्वारा सिंचाई की सुविधा मिल जाये तो एक साल में तीन-चार फसलों की खेती कर सकते हैं.

मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ : बीटीएम
बीटीएम मोतीलाल रजक ने कहा कि किसानों में पलायन न कर खेती कर आत्मनिर्भर बनने की जागरूकता आयी है, तो यह अच्छी बात है. जल्द ही उनके खेत का निरीक्षण कर उन्हें विभाग की ओर से सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जायेगा.