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  • Apr 27 2019 5:26PM

नागपुरी लोकनर्तक दीनबंधु ठाकुर के नृत्य पर थिरक उठेंगे आपके पांव

नागपुरी लोकनर्तक दीनबंधु ठाकुर के नृत्य पर थिरक उठेंगे आपके पांव

पंचायतनामा डेस्क
रांची

झारखंड की लोक कला, नृत्य, भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण में अखड़ा की अहम भूमिका है. कई बड़े कलाकार इसकी देन हैं. अगर अखड़ा नहीं होता, तो वह भी नागपुरी लोकनर्तक नहीं बन पाते. बचपन से ही गांव के अखड़ा में पर्व-त्योहार के मौके पर सामूहिक नृत्य-गीत में शामिल होकर कब यह जुनून बन गया, उन्हें पता तक नहीं चला. आज इसी नागपुरी लोकनृत्य की बदौलत उनकी अपनी पहचान है. ये कहना है रांची जिला अंतर्गत कांके थाना क्षेत्र के मनातू गांव निवासी 67 वर्षीय नागपुरी लोकनर्तक दीनबंधु ठाकुर का. देश के कई राज्यों में वह अपनी नृत्य प्रतिभा का जलवा बिखेर चुके हैं. इनका नृत्य देखकर आपके पांव भी थिरक उठेंगे. डॉ रामदयाल मुंडा राजकीय कला भवन (झारखंड कला मंदिर), खेलगांव (रांची) में वह बतौर नागपुरी लोकनृत्य के प्रशिक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं.

लोकगीत-नृत्य के बिना एक पल भी नहीं रह सकते
सफेद धोती, पीला कुर्ता, हरी पगड़ी, लाल कमरपट्टी, पगड़ी में मोेर पंख, पैर में घुंघरू, गले में फुल की हार, हाथों में रंगीन कपड़े पहने मांदर की थाप पर थिरकते दीनबंधु ठाकुर के चेहरे की मुस्कान देखते ही बनती है. कलाप्रेमी दीनबंधु ठाकुर कहते हैं कि लोकनृत्य उनके लिए महज पेशा नहीं है, बल्कि उनकी जिंदगी है. दो वक्त रोटी नहीं भी मिले, लेकिन लोकगीत-नृत्य हो, तो वह विपरीत परिस्थितियों में भी सुकून से रह लेंगे. बचपन से ही अपने पिता स्व. विराज ठाकुर के साथ वह गांव के अखड़ा में पर्व-त्योहार के अवसर पर जाकर गीत गाते व नृत्य करते थे. समय के साथ यही उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया. इसी में रच-बस गये. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मंडली बनाई और आस-पास के क्षेत्र में गीत-नृत्य करने लगे.

अपने गांव मनातू से मुुंबई तक का सफर
गरीबी के कारण आठवीं कक्षा तक ही दीनबंधु पढ़ाई कर सके. इसके बाद नागपुरी लोकगीत-नृत्य का दौर शुरू हुआ. वर्ष 1985 में उन्होंने अपनी मंडली के साथ आकाशवाणी रांची में कार्यक्रम पेश किया. इनके लिए यह बड़ा मंच था. बंदहु सिरी सरोसती, ए माय दया करूं... सरस्वती वंदना से उन्होंने लोकगीत कार्यक्रम की शुरुआत की थी. वर्ष 1987 में उन्होंने दूरदर्शन में प्रस्तुति दी. 1987 में ही बड़ी छलांग लगाते हुए वह मुंबई पहुंच गये. आक्रांत फिल्म में उन्होंने छऊ नृत्य, मर्दाना झूमर और पुलिस समेत कई किरदार निभाये थे.

लोक कलाकारों की बेहतरी का हो प्रयास
पद्मश्री मुकुंद नायक की टीम से जुड़ कर भी दीनबंधु ठाकुर ने देश के कई राज्यों में प्रस्तुति दी है. इसके बाद उन्होंने वर्ष 2002 में कलाकुंज का गठन किया और कार्यक्रम की प्रस्तुति देने लगे. वर्ष 2011 में झारखंड सरकार ने उन्हें सम्मानित किया था. वर्ष 2008 से वह झारखंड कला मंदिर, खेलगांव, रांची में नागपुरी नृत्य का प्रशिक्षण दे रहे हैं. झारखंड के प्रसिद्ध लोकनर्तक शिवशंकर महली को अपना रोल मॉडल मानने वाले दीनबंधु कहते हैं कि झारखंडी लोककला को बढ़ावा देने की हर संभव कोशिश हो रही है. लोककला को समर्पित कलाकारों की जिंदगी बेहतर बनाने का भी प्रयास हो.