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  • Dec 23 2019 1:13PM

एथलेटिक्स की नर्सरी है नवाटांड़

एथलेटिक्स की नर्सरी है नवाटांड़

पवन कुमार
जिला : रांची 

इन दिनों झारखंड से कई बड़े एथलीट निकल रहे हैं. एथलेटिक्स में प्रियंका केरकेट्टा ने हाल में रांची के खेलगांव में आयोजित 59वीं ओपन नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया. प्रियंका केरकेट्टा और फ्लोरेंस बारला का चयन भारतीय एथलेटिक्स टीम में हुआ है. इसके अलावा कई ऐसे नाम हैं, जिन्होंने एथलेटिक्स में झारखंड और देश का नाम रोशन किया है. इन सभी खिलाड़ियों का नाम और गांव अलग-अलग है, लेकिन इनको तैयार करने की नर्सरी एक है. रांची जिले का नवाटांड़ डे बोर्डिंग सेंटर, जहां पर बचपन से ही बच्चों की प्रतिभा को तराश कर उन्हें बेहतर एथलीट बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है. यह आदिवासी बहुल गांव से घिरा हुआ है. गांव के बाहर स्थित मैदान में हर रोज सुबह और शाम लगभग 50 बच्चे एथलेटिक्स की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए आपको मिल जायेंगे. इसी प्रशिक्षण की बदौलत बच्चे आज परचम लहरा रहे हैं.

2005 से हुई शुरुआत

नवाटांड़ में डे बोर्डिंग सेंटर शुरू करने का पूरा श्रेय ब्रदर कैलिप को जाता है. बताते हैं कि पहले वो कोनवीर नवाटोली बसिया में शिक्षक थे, पर खेल के प्रति लगाव के कारण उन्होंने बच्चों को प्रशिक्षित करना शुरू किया. उस वक्त वहां के डीएसओ सरवर इमाम थे. जब ब्रदर कैलिप का तबादला रांची हुआ, तब सरवर इमाम भी रांची आ गये. इस कारण नवाटांड़ में डे बोर्डिंग सेंटर शुरू करने में काफी सहयोग मिला. वर्ष 2005 में नवाटांड़ में एथलेटिक्स की नर्सरी की शुरुआत हुई. हालांकि, इससे पहले ब्रदर कैलिप निकोलस सुरीन, इसडोर मिंज जैसे राज्यस्तरीय खिलाड़ी बसिया से झारखंड को दे चुके थे. यहां भी उनका अनुभव काम आया.

छोटे मैदान में बड़ी होती उम्मीदें

नवाटांड़ में संत जॉन्स स्कूल के पास स्थित मैदान में ब्रदर कैलिप बच्चों को एथलीट बनने के गुर सिखाते हैं. स्कूल में लगभग 1600 बच्चे-बच्चियां पढ़ती हैं. इनमें से 50 बच्चे-बच्चियों का चयन डे बोर्डिंग के लिए होता है. इनमें 25 बच्चे और 25 बच्चियां होती हैं. चयन प्रकिया के दौरान बच्चों के लिए खेल प्रतियोगिता स्कूल में ही आयोजित होती है. यहीं से उनका चयन होता है और उन्हें बेहतर एथलीट बनाने के लिए तराशा जाता है.

इन विधाओं का प्रशिक्षण

नवाटांड़ के इस एथलेटिक्स की नर्सरी में 10,000 मीटर दौड़, 5,000 मीटर, 1600 मीटर, 800 मीटर, 400 मीटर, 200 मीटर और 100 मीटर रेस के अलावा हर्डल रेस, लॉन्ग जंप, हाइ जंप, ट्रीपल जंप और जेवलीन थ्रो आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है.

सरकार से मिला सहयोग

डे बोर्डिंग सेंटर खुलने के बाद सरकार का सहयोग मिला और सेंटर में आनेवाले बच्चों को ट्रैक सूट और जूते दिये गये. खेलने के लिए उपकरण दिये गये, पर अभी भी बच्चों के लिए रनिंग ट्रैक नहीं है. लॉन्ग जंप और हाइ जंप के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. इसके बावजूद यहां के बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.

नवाटांड़ डे बोर्डिंग सेंटर से निकले खिलाड़ी

1. सोफिया किस्पोट्टा : जेवलीन थ्रो के लिए श्रीलंका गयी. जैवलीन थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल की. फिलहाल झारखंड पुलिस में अपनी सेवा दे रही हूं.

2. रामदेव तिग्गा : ट्रीपल जंप के लिए चीन गये थे. इसके अलावा नेशनल में गोल्ड मेडल मिला था. फिलहाल इंडियन आर्मी में अपनी सेवा दे रहा हूं.

3. फ्लोरेंस बारला : 400 मीटर रेस के लिए मेरा चयन ओलंपिक 2020 के लिए भारतीय एथलीट टीम में हुआ है. वर्ष 2018 में रांची में आयोजित 34वीं जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ 56:09 सेकेंड में पूरा कर स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं.

4. प्रियंका केरकेट्टा : लॉन्ग जंप प्रतिस्पर्धा में 59वीं ओपन नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल की. खेल के लिए इटली और वियतनाम भी गई. 13वीं फेडरेशन जूनियर चैंपियनशिप में 6.30 मीटर लॉन्ग जंप का रिकॉर्ड मेरे नाम है. भारतीय एथलेटिक्स टीम में मेरा चयन हुआ है.

ग्रामीण बच्चों में बेहतर एथलीट बनने की क्षमता : ब्रदर कैलिप

डे बोर्डिंग सेंटर के कोच ब्रदर कैलिप बताते हैं कि ग्रामीण परिवेश के बच्चों में बेहतर एथलीट बनने की क्षमता होती है, क्योंकि विषम परिस्थितियों में भी वे कार्य करते हैं. खेत में काम करते हैं. दूर तक चलते हैं. खान-पान भले ही मानकों के अाधार पर न हो, पर भोजन शुद्ध होता है. इनके अंदर स्टेमिना बहुत होती है. इसलिए इनकी शारीरिक बनावट भी एथलीट की तरह होती है. इनमें से जो सबसे फिट होता है, उन्हें स्कूल स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता के दौरान चयन किया जाता है.

लंबी दौड़ के लिए खुद को तैयार कर रही हूं : नीता कुमारी

डे बोर्डिंग सेंटर में अभ्यास करनेवाली संत जॉन की नौवीं की छात्रा नीता कुमारी बताती हैं कि अब खेल के जरिये उन्हें अपनी मंजिल मिल गयी है. आगे वह खेल में अपना नाम रोशन करना चाहती हैं. अप्रैल 2019 में मोरहाबादी में आयोजित तीन किलोमीटर सद्भावना दौड़ में उन्होंने पहला स्थान प्राप्त किया था. इसके अलावा 5000 मीटर की दौड़ 23 मिनट में पूरा करती हैं. राज्य स्तरीय चार किलोमीटर दौड़ प्रतियाेगिता में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता है. वर्ष 2017 में उसका चयन डे बोर्डिंग सेंटर के लिए हुआ था.

खेलना और जीतना है : रोशनी उरांव व रोशनी तिग्गा

इन दोनों बच्चियों की उम्र एक है. दोनों कक्षा छह में पढ़ती हैं. डे बोर्डिंग सेंटर में इनका चयन हुआ है. ब्रदर कैलिप बताते हैं कि दोनों में लंबी रेस दौड़ने की क्षमता है. अभी दोनों बच्चियां तीन किलोमीटर बड़े आराम से दौड़ लेती हैं. हालांकि, अभी तक इन्होंने किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है, लेकिन इनकी प्रतिभा देख कर कहा जा सकता है कि दोनों बच्चियां भविष्य में बेहतरीन एथलीट बनेंगी.