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  • Jul 17 2018 1:21PM

पिंक आर्मी ने बदल दी बालीजोर गांव की सूरत

पिंक आर्मी ने बदल दी बालीजोर गांव की सूरत

 वरुण वर्मा

प्रखंड : शिकारीपाड़ा

जिला : दुमका

दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड की मुड़ायाम पंचायत आज देश की पहली फुटवियर पंचायत बनने की राह पर अग्रसर है. यहां जल्द ही 1000 महिलाएं जूते बनातीं नजर आयेंगी. अभी इस पंचायत के बालीजोर गांव में महिलाएं बड़े पैमाने पर हवाई चप्पल तैयार कर रही हैं और उसे स्थानीय हाट-बाजारों में बेच कर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. अब कई बड़ी कंपनियां भी इनसे संपर्क कर रही हैं. चप्पल बनानेवाली महिलाओं को हाल ही में 4000 जोड़ी चप्पल का ऑर्डर मिला था, जिसमें से काफी हद तक ऑर्डर की आपूर्ति भी इन महिलाओं ने कर दी है.

डीसी ने गांव को गोद लिया और बदल गयी फिजा
चप्पल बनानेवाली ये आदिवासी महिलाएं पहले घरों में देसी हड़िया-दारू बना कर हाट-बाजारों में उसे बेचने का काम करती थीं, लेकिन उपायुक्त मुकेश कुमार ने जब इस गांव को गोद लिया, तो उन्होंने शराब बनाने-बेचने वाली महिलाओं को ही लक्ष्य कर गांव की तस्वीर बदलने का खाका तैयार किया. चंद दिनों में ही गांव में परिवर्तन नजर आने लगे. शराब बेचने वाली महिलाएं खुद स्वीकार करने लगीं कि जो धंधा वे कर रही हैं, उससे उनके ही गांव-परिवार और समाज प्रभावित हो रहा है. उपायुक्त ने जब अपनी परिकल्पना से उन्हें अवगत कराया, तो वे अपने गांव में फुटवियर इंडस्ट्री स्थापित कराने में जी-जान से जुट गयीं, हालांकि यह अभियान अभी मुकाम तक नहीं पहुंचा है, लेकिन इसके लिए सभी प्रयासरत हैं.

एक हजार महिलाएं पिंक आर्मी में पा रहीं प्रशिक्षण
मुड़ायाम पंचायत की जिन 1000 महिलाओं को फुटवियर निर्माण से जोड़ कर प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है, उन्हें पिंक आर्मी नाम दिया गया है. महिलाओं की यह फौज पंचायत में बदलाव का बीज बो चुकी है और उसका असर भी दिखने लगा है. प्रशिक्षण के बाद ये जूते बनाने का काम आधुनिक मशीनों से बड़े पैमाने पर कर पायेंगी. मुड़ायाम देश की ऐसी पहली पंचायत होगी, जो फुटवियर पंचायत के नाम से जानी जायेगी. यहां बननेवाले चप्पल-जूते का नाम बालीजोर गांव से बाली फुटवियर रखा गया है.

आजीविका मिशन और इंसाफ द्वारा दी जा रही ट्रेनिंग
बाली फुटवियर से जुड़ी महिलाओं को शराब के धंधे से बाहर निकालने, उन्हें प्रेरित करने, दक्ष बनाने और आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आजीविका मिशन ट्रेनिंग दे रही है. ट्रेनिंग पार्टनर के रूप में इंसाफ नामक संस्था अहम भूमिका निभा रही है. मिल रही कामयाबी तथा जीवन स्तर में आ रहे बदलाव से महिलाओं में उत्साह है. खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास और राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने इन महिलाओं द्वारा बनाये गये चप्पल की खरीदारी कर सराहना की है.

ऐसे पार्क व आंगनबाड़ी केंद्र दूसरे किसी गांव में नहीं
प्रशासन की पहल पर सामाजिक बदलाव के लिए जब महिलाओं ने कदम बढ़ाया, तो प्रशासन ने भी खूब प्रोत्साहित किया. आज इस गांव की जिस तरह की तस्वीर बनी है, वैसी तस्वीर आसपास के दूसरे गांवों में नहीं दिखती. बच्चों के लिए शानदार पार्क, मनोरंजन के लिए कई आकर्षक झूले, आंगनबाड़ी केंद्र में रंग-बिरंगे बेंच-डेस्क और खेलने के सामान, गांव की चकाचक सड़कें, हर घर के बाहर डस्टबीन, चापाकलों के बेकार जल के लिए शॉकपीट निर्माण, सड़क के किनारे बेंच निर्माण, किशोर-किशोरियों के लिए कला केंद्र व खेल मैदान तथा यूथ स्पोर्टिंग क्लब व मंच का निर्माण किया गया है. हर दिन स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की अच्छी संख्या दिखती है. रात में भी गांव स्ट्रीट लाइट से चकाचौंध रहता है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 123 आवास का निर्माण कराया जा रहा है.

ग्रामीणों की बदली मानसिकता : मुकेश कुमार, उपायुक्त
दुमका के उपायुक्त मुकेश कुमार ने बताया कि लोगों की मानसिकता में बदलाव से गांव बदल गया है. एक हजार महिलाओं को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है. कला-संस्कृति भवन के अलावा बाली फुटवियर का अपना मुख्यालय बनाया जा रहा है. इन प्रस्तावित भवनों के अलावा लोक शिक्षा केंद्र जैसे भवनों का भी इसके लिए इस्तेमाल किया जायेगा, ताकि मशीनें सुरक्षित रह सकें. जल्द ही इन महिलाओं को सरकार की उद्योग नीति और इन्सेंटिव पॉलिसी से लाभान्वित कर प्रोत्साहित किया जायेगा. पैरागॉन जैसी बड़ी कंपनियों से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि वे इन चप्पलों की खरीदारी कर सकें. चंद महीनों में बाली फुटवियर दुमका से बाहर के बाजारों में दिखेगी.