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  • Jan 27 2017 8:30AM

अपने हाथों बनाये खादी वस्त्र ही पहनेंगे टाना भगत

अपने हाथों बनाये खादी वस्त्र ही पहनेंगे टाना भगत
एमपी कुरैशी
आप कभी पंचायत भवन, ब्लॉक या समाहरणालय जाते होंगे तो आपको कभी न कभी इन जगहों पर परेशान और हताश अपनी समस्याओं को लेकर बड़े बाबूओं के दफ्तर के चक्कर लगाते हुए पुराने सफेद खादी के धोती, कुर्ता और गांधीनुमा सिर पर टोपी लगाये हुए व्यक्ति नजर आते होंगे. ये कोई और नहीं बल्कि महात्मा गांधी और भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायी माने जाने वाले टाना भगत समुदाय हैं, जिन्हें बिरसाइत कहा जाता है. इतिहास बताता है कि यह लोग सादा जीवन जीते हैं और सादा ही खाना खाते हैं यानी शुद्ध शाकाहारी. कृषि इनका मुख्य पेशा रहा है. ईमानदार और कर्मठ मेहनतकश तो होती ही हैं. 
 
जहां जाते हैं झुंड बनाकर ही जाते हैं. इस झुंड में कम-से-कम पांच से अधिक लोग शामिल होते हैं. महिलाएं व बच्चे भी साथ रहते हैं. अपने साथ पीतल की घंटी, वाद्य यंत्र भेर भी रखते हैं. यह आपको गुमला, लोहरदगा, बेड़ों, बुंडू, नेतरहाट, चाईबासा सहित कई जिलों में मिल ही जायेंगे. रांची के मोरहबादी मैदान स्थित महात्मा गांधी के प्रतिमा के पास भी इन्हें देखा जा सकता है.
 
 खैर! आपको यह बताते चले कि टाना भगत समुदाय अब बाबूओं के दफ्तर की चक्कर नहीं काटेंगे क्योंकि यह लोग अब रोजगार के लिए कौशल विकास से जुड़ रहे हैं. खुद के हाथों से बने वस्त्र ही पहनेंगे, इसके लिए सूत कातने से लेकर वस्त्र बनाने तक का बकायदा प्रशिक्षण भी ले रहे हैं टाना भगत. यह संभव हो पाया है राजधानी रांची शहर के बीचों-बीच स्थित झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के नवनिर्मित अध्यक्ष संजय सेठ के द्वारा. टाना भगत सुबह दस बजे मोरहाबादी मैदान से पैदल ही खादी बोर्ड पहुंचते हैं और अपने कामों में लग जाते हैं. 
 
आपको बता दें कि टाना भगत के लोग दिन भर किसी दूसरे घरों के, होटलों आदि के बनाये गये पकवान को खाने से परहेज करते हैं. हां, अगर फल मिल जाये वह भी किसी भरोसेमंद व्यक्ति के हाथों से तो उसे स्वीकार करते हैं वरना दूसरों के दिये हुए पानी को भी नहीं पीते हैं. धागा बनाने से लेकर चादर, तौलिया, गमछा, टोपी, धोती, कुर्ता व शर्ट बनाने का प्रशिक्षण ले रहे हैं टाना भगत. 
 
प्रशिक्षण में कौन-कौन शामिल : शहर के सबसे भीड़-भाड़ वाले रातु रोड के समीप झारक्राफट व खादी बोर्ड स्थित इमारत में आप पहुंचेंगे तो देखेंगे कि कई टाना भगत समुदाय के लोग जिनमें महेश्वर टाना भगत, पंची टाना भगत, शांति टाना भगत, रतनजीत टाना भगत, सुगरा टाना भगत, गंगा टाना भगत, कृष्णा टाना भगत, यशोदा टाना भगत, राजपति टाना भगत सहित कई टाना भगतों ने मिलकर सूत कात रहे हैं. 
टाना भगतों को बोर्ड का हमेशा मिलेगा सहयोग : संजय सेठ
 
झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग के अध्यक्ष संजय सेठ कहते हैं कि 14 अगस्त 2016 को विभाग द्वारा लोहरदगा, गुमला, रांची आदि के कई टाना भगतों को सम्मानित करने के लिए कार्यालय में बुलाये थे. इन लोगों को बोर्ड ने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया था. उसी दौरान इन टाना भगतों ने कहा कि हम लोग किसी का दिया हुआ वस्त्र ग्रहण नहीं करते हैं. 
 
यह सुनते ही मैं चौक गया, लेकिन इन टाना भगतों ने खुद ही सूत कात कर वस्त्र बनाने को कही. टाना भगतों के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए कार्यालय के ऊपर के तल्ले में उन्हें प्रशिक्षण दिलाने का कार्य शुरू कराया. संजय सेठ कहते हैं कि यह लोग काफी मेहनती हैं और इनके बने हुए कई खादी के सामग्रियों को गांधी जयंती के अवसर पर कार्यालय परिसर में लगे तीन दिवसीय मेले में काफी सराहा गया और बिक्री भी हुई. वहीं इन लोगों को रोजाना मेहनताना के रूप में पचास रुपये भी दिये जा रहे हैं. आगे बताते हैं कि हमलोगों की सोच है कि इनके बनाये वस्त्रों को जिलों में खुलने वाले खादी स्टॉलों में प्राथमिकता दी जाये. सजंय सेठ कहते हैं कि 17 दिसंबर से सरस मेला आयोजित होने वाला है. 
 
इस मेले में भी टाना भगतों के हाथों से बने वस्त्र स्टॉल में लगाये जायेंगे. वहीं लगभग 40 टाना भगतों के बीच रेडियो का वितरण किया गया ताकि यह लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात सुन सके. साथ ही कृषि सहित कई जानकारियों से भी अवगत हो सके.
क्या कहते हैं टाना भगत
 
महेश्वर टाना भगत कहते हैं कि यहां प्रशिक्षण लेने में काफी खुशी हो रही है. पहली बार किसी ने हमलोगों को रोजगार से जोड़ने को सोची है. पंची टाना भगत कहती हैं कि हमलोग अभी तक बहुत कुछ सीख चुके हैं. शिक्षा के साथ-साथ रोजगार भी बहुत जरूरी है.
उजाले के पहरेदार हम सच के रिश्तेदार हम 
 
सोशल ऑडिट प्रखंड स्रोत व्यक्तियों का एक माह का प्रशिक्षण
 
ग्रामीण विकास संस्थान, हेहेल, रांची में सामाजिक अंकेक्षण यानी सोशल ऑडिट से संबंधित प्रखंड स्रोत व्यक्तियों के एक माह के प्रशिक्षण कोर्स का समापन समारोह संपन्न हुआ. केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान और टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया में कार्यरत राज्य/जिला/प्रखंड स्तर के स्रोत व्यक्तियों को एक माह का कोर्स कराया जा रहा है. 
 
इस कोर्स को संचालित करने के लिए मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षित किया गया है, जो स्थानीय प्रशिक्षक के सहयोग से इसे संचालित कर रहे हैं. झारखंड में कुल 297 लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जो सात बैच में मार्च तक पूरा किया जायेगा. सर्ड के अलावा केजीवीके, रूक्का में भी यह कोर्स चलाया जा रहा है. 
 
तीस दिन के प्रशिक्षण में संविधान, अधिकार, ग्रामीण विकास, सामाजिक जवाबदेही, प्रक्रिया, पंचायत जैसे विषय पर सघन 23 दिनों का क्लास रूम प्रशिक्षण और सात दिनों का क्षेत्र गतिविधि शामिल है. प्रतिभागियों में से ललिता देवी और थॉमस ने अपने अनुभव सुनाये और इस प्रशिक्षण से उनकी जानकारी और दक्षता में हुए सकारात्मक बदलाव की चर्चा की. वहीं मुख्य कोर्स समन्वयक विश्वनाथ ने अपने विचार रखते हुए प्रतिभागियों के साथ जुड़े अपने संस्मरण सुनाये. इस अवसर पर सर्ड की सहायक निदेशक जया मिंज, सर्ड के अनिल यादव और प्रशिक्षकों का अहम योगदान रहा. 
 
प्रतिभागियों के अनुभव ने प्रभावित किया : डॉ एक्का
 
असम राज्य के ग्रामीण विकास और पंचायती राज्य सचिव डाॅ बी एक्का ने कहा कि मैं छुट्टियों में घर आया तो इच्छा हुई कि झारखंड में सामाजिक अंकेक्षण के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों को देखकर कुछ सीख सकूं. उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों के अनुभव और उनकी प्रस्तुति ने मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया है और उनके उत्साह का मैं कायल हो गया हूं. 
553 पंचायतों में प्रक्रिया 
 
होगी पूरी : गुरजीत सिंह
 
सोशल ऑडिट यूनिट, झारखंड के राज्य समन्वयक गुरजीत सिंह ने कहा कि छह जनवरी 2017 से पूरे राज्य में सोशल ऑडिट का काम शुरू होगा. वर्ष 2017 में 553 पंचायतों में यह प्रक्रिया पूरी की जायेगी. गुरजीत सिंह ने कहा कि शुरूआती तौर पर दो-दो जिलों में इंदिरा आवास और आंगनबाड़ी केंद्रों का भी सामाजिक अंकेक्षण संपन्न किया जायेगा.प्रतिभागियों में जुनून देख 
 
कर बढ़ी आशाएं : सिन्हा
 
ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के प्रधान सचिव एनएन सिन्हा ने सभी प्रतिभागियों को उनकी मेहनत और निष्ठा की प्रशंसा करते हुए कहा कि सोशल ऑडिट जैसे कार्यों के लिए जो जुनून और उत्साह देखा, उससे काफी आशाएं बढ़ गयी है. साथ ही कहा कि सोशल ऑडिट यूनिट को एक परंपरागत सरकारी ढांचे की तरह न बनाकर एक कार्यकर्ता आधारित संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए. उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि हमें लोगों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करना और योजना के प्रति आशावादी बनाना चाहिए . 
 
संगठित करने का दायित्व मास्टर ट्रेनर पर : पारितोष
 
जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पारितोष उपाध्याय ने प्रतिभागियों के सफलता की कामना करते हुए उनको कोर्स पूरा करने की बधाई दी और बताया कि समुदाय को उनके हक के लिए जागरूक कर उन्हें संगठित करने का दायित्व भी उनके कन्धों पर है.