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  • Jun 21 2017 1:23PM

साथ पलेंगी मछली मुर्गी व बतख, खेती भी होगी

साथ पलेंगी मछली मुर्गी व बतख, खेती भी होगी
मुन्ना प्रसाद
जल संरक्षण के लिए राज्य सरकार की ओर से शुरू किये गये डोभा निर्माण योजना को धरातल पर उतारते हुए जिला प्रशासन ने गिरिडीह में एक अनोखा पहल शुरू की है. मनरेगा से शुरू करायी गयी इस योजना में कन्वर्जेंस के तहत एक साथ तीन-तीन योजनाओं की शुरुआत हुई है. इस योजना में डोभा में मछली पालन के साथ-साथ उसके एक कोने पर बतख पालन और दूसरे कोने में मुर्गी पालन की भी व्यवस्था होगी. जिससे एक परिवार का बेहतर तरीके से गुजर-बसर होने की संभावना है.

राज्य में पहली बार गिरिडीह में शुरू की गयी यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया गया है. नमूना के तौर पर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में इस योजना को लिया गया है. वहां इस योजना के सफल होने पर अगले वित्तीय वर्ष में जिले भर में इसे धरातल पर उतारा जायेगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने और संसाधन विकसित करने के साथ-साथ लाभुकों को रोजगार से जोड़ना है. आदर्श डोभा के नाम से प्रसिद्ध इस योजना से गिरिडीह जिले में कुल 40 योजनाएं ली गयी है. इसकी लागत लगभग 4.8 लाख रुपये होगी. आदर्श डोभा की लंबाई 50 फीट और चौड़ाई 50 फीट होगा. इस डोभा निर्माण के बाद उसके ऊपर एक कोने में 40 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा एक मुर्गी पालन शेड बनाया जायेगा. जबकि दूसरे कोने में 20 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा एक बतख शेड का निर्माण किया जायेगा.
 
जिले में बनना है 17,500 सामान्य डोभा : गिरिडीह जिले में कुल 17,500 सामान्य डोभा बनाया जाना है. जिसमें करीब 5000 डोभा का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि 9500 डोभा का निर्माण कार्य चल रहा है. एक सामान्य डोभा की लागत 60 से 70 हजार रुपये आती है. लेकिन, आदर्श डोभा निर्माण में चार लाख 80 हजार रुपये की लागत आयेगी.
 
लाभुक को मिलेगा रोजगार : कार्यक्रम पदाधिकारी बसंत कुमार ने कहा कि पहले चरण में जिले भर में प्रत्येक प्रखंड में 10-10 डोभा बनाये जायेंगे. जिले के कुल 13 प्रखंडों में 150 डोभा बनाये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस योजना से एक डोभा की लागत चार लाख 80 हजार रुपये के आसपास होगी. इस योजना से लाभुक अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर सकेगा. उन्होंने कहा कि यह योजना एक परिवार के लिये जीविकोपार्जन का एक बेहतर जरिया होगा.
 
मुर्गी व बतख के मल से तैयार होगा मछलियों का आहार : डीडीसी
डीडीसी किरण कुमारी पासी ने कहा कि आदर्श डोभा निर्माण से एक तरफ जहां इससे फसल की सिंचाई होगी, वहीं दूसरी तरफ इसमें मछली पालन भी होगा. खास कर इस योजना को आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में शुरू की गयी है. वहां लोग बतख पालने में ज्यादा रूचि रखते हैं. मुर्गी पालन करना उनका मूल पेशा रहता है. ऐसे में आदर्श डोभा के ऊपरी हिस्से में एक कोने में बतख पालन होगा और दूसरे कोने में मुर्गी पालन. डोभा के ऊपरी हिस्से में निर्मित मुर्गी और बतख पालन शेड में पाले गये मुर्गी और बतख के मल से डोभा में मछलियों के लिए आहार तैयार होगा. इन दोनों का मल डोभा में पल रही मछलियों के लिए आहार बनेगा और इससे मछलियां तेजी से बढ़ेगी. इस कार्य में मनरेगा से जहां डोभा और शेड बनाया जा रहा है, वहीं पशुपालन विभाग से मुर्गी और बतख पालन करने का लाभुक को प्रशिक्षण दिया जायेगा. मुर्गियों के चूजे और बतख दोनों जिला प्रशासन उपलब्ध करायेगी. इसके लिए पशुपालन विभाग को इस योजना से जोड़ा गया है.