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  • Jul 4 2017 1:16PM

तीन लाख मैट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

तीन लाख मैट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

पंचायतनामा डेस्क

राज्य सरकार ने मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये राज्य में स्थित जलाशयों पर अध्ययन कर एक रिपोर्ट तैयार करने पर जोर गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कितने मत्स्य बीच का उत्पादन व संचयन किया जा सकता है. इस कार्य के लिए मत्स्य मित्रों की सेवा लेने और वाटर बॉडी के लिए एक पोर्टल बनाने को कहा गया है, जिसमें सभी जलाशयों को एमआइएस इंट्री सुनिश्चित की जा सके. बंगाल पर मछली की निर्भरता को कम करने के लिए राष्ट्रीय खपत के अनुरूप मछली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करें, ताकि राज्य के लोगों को पौष्टिक आहार के रूप में मछली उपलब्ध हो सके. साथ ही मछली के क्वालिटी प्रोडक्शन पर विशेष ध्यान देने का भी निर्देश दिया गया है. 

वित्तीय वर्ष 2017-18 में सभी जिला मत्स्य पदाधिकारियों को 1500 करोड़ मछली बीज के उत्पादन/संचयन के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 869 करोड़ बीज का उत्पादन एवं संचयन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है. साथ ही 10,000 मत्स्य बीज उत्पादकों के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में अब तक 8059 मत्स्य बीज उत्पादकों को निबंधित एवं प्रशिक्षित किया जा चुका है. साथ ही तीन लाख मैट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस संबंध में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मत्स्य पालकों/मित्रों को मछली पालन योजना से जोड़ने तथा सरकार द्वारा दी जानेवाली सुविधाओं की राशि का भुगतान डीबीटी के माध्यम से सुनिश्चित किया जाय. कल्स्टर एप्रोच के तहत 120 हैचरी निर्माण के लिए लाभुक तथा स्थलों का चयन किया गया है, जिसमें से 65 हैचरी का निर्माण शुरू हो चुका है. इसके अलावा आरकेवीवाइ द्वारा 120 हैचरी का निर्माण भी कराने का प्रस्ताव है, जिसकी प्रक्रिया 15-20 दिनों में पूर्ण कर ली जायेगी. 

साथ ही अगले वित्तीय वर्ष में 1000 नई हैचरी के निर्माण के लिए स्थल चयन भी किया जा रहा है. विभाग के मुताबिक, रिवर फिश फार्मिंग के तहत अब तक 2000 स्थानों का चयन किया गया है.